Home Facts दिमाग का गेम यूं ही नहीं कहलाता, जानिए शतरंज के बारे में

दिमाग का गेम यूं ही नहीं कहलाता, जानिए शतरंज के बारे में

बचपन से हम सभी शतरंज खेलने का शौक पालना चाहते हैं लेकिन ऐसा कम लोगो के साथ ही हो पाता है कि उन्हें शतरंज खेलना आ जाए. माना जाता है कि शतरंज दिमाग का खेल है और इसे खेलना हर किसी के बस की बात नहीं है और यह भी कह सकते हैं कि हर इंसान इसमें दिलचस्पी भी नहीं दिखाता.

शतरंज खेलने के लिए स्थिरता और मन का एकांत में होना बहुत ज़रूरी होता है. आज हम आपको शतरंज से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य बताएंगे जिन्हें जानकर आप हैरान हो सकते हैं तो चलिए इन तथ्यों को थोड़ा डिटेल में जानते हैं..

1. इस खेल की शुरुआत भारत के गुप्त साम्राज्य द्वारा की गई थी. यह माना जाता है कि इस खेल को पहली बार नवीं शताब्दी में खेला गया था. हालांकि तब से लेकर अब तक इस खेल में कई बदलाव किए गए हैं. साल 1280 में प्यादों को दो कदम बढ़ाने का नियम शुरू हुआ था.

2. आपको यह बात सुनकर बहुत अजीब लगेगा कि शतरंज की मशीन का भी अविष्कार किया गया था. यह मशीन तुर्की में साल 1770 में बनाई गई थी. इस मशीन कि यह खासियत थी कि इसमें आपके चेहरे के भाव के अनुसार मोहरे हिला करते थे. लेकिन इस मशीन को चलाना हर किसी के बस की बात नहीं थी इसीलिए इस मशीन का एक्सपर्ट ही इसको चलाता था.

3. यह माना जाता है कि जब इस खेल की शुरुआत हुई थी तब इस खेल में एक वर्ग ऐसा था जो पहला कदम तिरछा बढ़ाता था और दो कदम सीधा बढ़ाता था.

4. इस मोहरे को परामर्शदाता भी कहा जाता था लेकिन जब गोरे लोगों ने इस खेल में रूचि बढ़ाई तो उन्होंने इस मोहरे का नाम रानी रख दिया उसके बाद से ही इस खेल में रानी का महत्व बढ़ गया.

5. यह बात तो जगजाहिर है कि शतरंज एक बहुत ही जटिलतम खेल है. यह खेल तब तक खत्म नहीं होगा जब तक दोनों प्रतिभागी इस में अपना पूर्ण दिमाग नहीं लगाएंगे. या यह भी कहा जा सकता है कि यह चालों का नहीं बुद्धिमत्ता का गेम है.

6. आप शतरंज के खेल की तुलना मुक्केबाजी के खेल से भी कर सकते हैं क्योंकि इसमें भी दोनों धावक एक दूसरे के ऊपर प्रहार करते हैं और दूसरे को दबाने की कोशिश करते हैं.

7. आज के इस टेक्नोलॉजी के युग में थ्रीडी शतरंज स्टार ट्रेक के टीवी पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है.

8. यह बात तो मानने वाली है कि अगर शतरंज में अपनी मर्जी के मुताबिक चालें होती तो यह खेल कब का लुप्त हो गया होता.

9. चालों पर रखे गए नियम के कारण ही यह जटिल खेल बना और लोगों की रूचि इस खेल में बढ़ी. यह बात जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि इस खेल में हजार से भी ज्यादा चालें हो सकती हैं.

10. शतरंज के खेल में एक खेल होता है जिसका नाम होता है मूर्ख दोस्त. इस खेल में एक सदस्य दूसरे सदस्य को हराकर यह साबित करता है कि वह दिमागी रुप में उस से श्रेष्ठ है और उसके बाद उस दोस्त को मूर्ख कहा जाता है.

11. आप यह बात जानकर हैरान हो जाएंगे कि शतरंज के बोर्ड का अविष्कार एक पुजारी ने किया था क्योंकि उस समय में पादरियों ने इस खेल को खेलने से मना कर दिया था.

12. पुजारी ने अपने चतुर दिमाग से एक शतरंज का बोर्ड बनाया और जब भी बस समय मिलता था तो वह इस खेल को खेलता था. इस बोर्ड को पुस्तक की भर्ती बनाया गया था ताकि आसानी से कहीं भी ले जाया जा सके.

13. ‘चेसअकादमी’ नाम की यह वेबसाइट विडियो टुटोरिअल, छोटी पहेलियों और मनोरंजक खेलों के माध्यम से आपको चेस के नियम और खेल की बारीकियों से अवगत करवाती है.

14. चौपाट रखते समय यह ध्यान दिया जाता है कि दोनो खिलाड़ियों के दायें तरफ का खाना सफेद होना चाहिये तथा वजीर के स्थान पर काला वजीर काले चौरस में व सफेद वजीर सफेद चौरस में होना चाहिये. खेल की शुरुआत हमेशा सफेद खिलाड़ी से की जाती है.

15. शतरंज ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद को साल 1998 और 1999 में प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था.

16. आनंद को साल 1985 में प्राप्त अर्जुन पुरस्कार के अलावा, साल 1988 में पद्म श्री व 1996 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार मिला. सुब्बारमान विजयलक्ष्मी व कृष्णन शशिकिरण को भी फीडे अनुक्रम में स्थान मिला है.