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मनचाहे फल की हो कामना, तो गोवर्धन के पास जरुर करें ये काम

दिवाली सेलेब्रेशन शुरू हो चुका है जहां एक तरफ पूरे देश में कल दिवाली का त्यौहार मनाया वहीं आज लोगों ने गोवर्धन की भी पूजा की. शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन की पूजा बड़े ही धूम धाम से की जाती है. जिसमें भगवान श्री कृष्ण की पूजा आराधना कर के उन्हें व्यंजनों का भोग लगाया जाता है. आज सुबह ही आप लोगों ने इनकी पूजा तो कर ही ली होगी. लेकिन क्या अपने एक काम ऐसा किया जो आपको मनचाहा फल देने में मदद करे.? अगर नहीं तो अब भी देर नहीं हुई है.

गोवर्धन पूजा को अन्‍नकूट के नाम से भी जाना जाता है. गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाने की मान्यता के साथ इस दिन गोवर्झन की परिक्रमा करने की परंपरा भी प्रचलित है. जिससे सभी मान्यताओं के पूरे होने की बात भी पुराणों में कही गयी है. तो आइये जानते हैं कि क्यों की जाती है गोवर्धन की परिक्रमा.

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-हिंदू पुराणों के अनुसार गोवर्धन की परिक्रमा करने से मनवांछित फल मिलता है. वल्लभ सम्प्रदाय के वैष्णवमार्गी लोग तो अपने जीवनकाल में इस पर्वत की कम से कम एक बार परिक्रमा अवश्य ही करते हैं क्योंकि वल्लभ संप्रदाय में भगवान कृष्ण के उस स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसमें उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठा रखा है.

– वल्लभ संप्रदाय में भगवान कृष्ण के उस स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसमें उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठा रखा है. ऐसी भी मान्‍यता है कि जो ईच्‍छा मन में रखकर इस गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है, वह ईच्‍छा जरूर पूरी होती है.

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– भक्त अपनी मनोकामनाओं को पूरा करने केलिए भी इसकी परिक्रमा करते हैं. हिन्‍दु धर्म के लोगों का यह भी मानना है कि चारों धाम की यात्रा न कर सकने वाले लोगों को भी गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा जरूर करनी चाहिए.

– ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन पर्व के दिन मथुरा में स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से मोक्ष प्राप्त होता है. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा 21 किलोमीटर की है. इस दिन हजारों श्रद्धालु गिरिराज की परिक्रमा करने आते हैं. इस परिक्रमा में लगभग दो दिन लग जाते हैं.