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मैसूर टाइगर टीपू सुल्तान से जुड़े गौरवमयी तथ्य, जो आपको जरूर पढ़ने चाहिये

अंग्रेजों से शेर की तरह मरते दम तक बिना भागे लड़ते रहने वाले मैसूर टाइगर टीपू सुल्तान के बारे में कुछ तथ्य हैं. जिन्हें पढ़कर आपको टीपू सुल्तान की बहादुरी और ज्ञान-विज्ञान की समझ के बारे में पता चलेगा.

1- ऐसा कहा जाता है कि हैदर अली के बेटे और अंग्रेजों के दुश्मन टीपू सुल्तान के पास एक 41 ग्राम सोने की अंगूठी थी. जिसमें राम नाम लिखा हुआ था. ये अंगूठी उनके लिये विशेष थी. इसलिये वो इसे हमेशा पहने रखते थे. माना जाता है कि उनकी मौत के बाद एक अंग्रेज ऑफिसर ने उनकी ये अंगूठी चुरा ली. अब यह अंगूठी एक नीलामघर के पास रखी है.

टीपू सुल्तान
टीपू की अंगूठी

वेबसाइट christies.com की मानें तो उसमें इस अंगूठी का टीपू सुल्तान से सीधा संबंध नहीं बताया गया है. लेकिन वेबसाइट में लिखा है कि मेजर जनरल लॉर्ड फिट्जरॉय के पास से ये अंगूठूी बरामद की गयी थी. ये अंग्रेज ऑफिसर वही था, जिसने सुल्तान की मौत के बाद उनकी लाश से अंगूठी उतारी थी.

2- टीपू के पिता हैदरअली ने एक सिग्नल सिस्टम डेवलप किया था. जिसके तहत सिग्नल देने के लिये रॉकेट का इस्तेमाल किया जाता था. टीपू ने इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुये थोड़े और बड़े रॉकेट बनवाये.

3- इन रॉकेट में टीपू ने तलवारनुमा हथियार बंधवाये. जब ये रॉकेट्स सैकड़ों की संख्या में दुश्मन सेना पर गिरते थे, तो दुश्मनों की मौत बन जाते थे.

टीपू सुल्तान
टीपू सुल्तान के हथियार

 

डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब  ‘अग्नि की उड़ान’ में भी इस बातक का जिक्र किया है. उसमें लिखा गया है कि 1799 में टीपू के मारे जाने के बाद अंग्रेजों ने 700 से ज्यादा रॉकेट और 900 रॉकेटों की उप प्रणालियां उसके जखीरे से बरामद की थी. इस किताब में ये भी लिखा है कि टीपू की सेना में 27 ब्रिगेड थीं, इनको ‘कुशनू’ कहा जाता था. और प्रत्येक ब्रिगेड में एक रॉकेट कंपनी थी. इन रॉकेट कंपनी को ज़र्क्स नाम से पुकारा जाता था.

4- टीपू की मौत के बाद इन्हें बरामद करके विलियम कांग्रेव इंग्लैंड ले गया और इस तरह से भारतीय राजा की प्रणाली इंग्लैंड की हो के रह गयी.

टीपू सुल्तान के पास सोने की मूठ वाली तलवार थी, जिसमें बाघ की आकृति बनी हुयी है. इंग्लैंड की वेबसाइट नीलामघर बोनहैम्स की वेबसाइट bonhams.com पर इस बात का उल्लेख है.

5- इस तलवार को नीलामी के दौरान विजय माल्या ने 5 करोड़ रुपये में खरीद लिया था.

6- टीपू की एक भव्य तोप भी इसी नीलामघर में रखी है. जिसे टीपू ने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में प्रयोग किया था. जिसे उनकी मौत के बाद अंग्रेज अपने साथ ले गये.

टीपू सुल्तान
तोेप

टीपू सुल्तान का मानना था कि जिंदगी चाहे एक दिन की हो लेकिन होनी शेर की तरह चाहिये. वह चाहते तो अंग्रेजों से मिलकर अपने को सुरक्षित कर सकते थे. लेकिन उन्होंने लड़ने का फैसला किया. और इस लड़ाई में उन्होंने पुर्तगालियों से भी मदद ली.

 

टीपू से जब लड़ाई में कमजोर पड़ने के बाद सुरंग के रास्ते भागने के लिये कहा गया तो वो भागे नहीं. बल्कि मैदान में डटे रहे. और वीरगति को प्राप्त हुये.