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ISRO अपने प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा से ही क्यों करता है ? जानिए श्रीहरिकोटा से ही क्यों होता है चमत्कार

आज दुनियाभर के लोग इसरो के बारे में जानते हैं. लेकिन हाल ही में इसरो ने एक साथ 104 सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण किया है. इसरो अपने सभी प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से करता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसरो इस काम के लिए श्रीहरिकोटा को ही क्यों चुनता है ? आइये आज हम आपको इसकी वजह बताते हैं.

1. सतीश धवन स्पेस सेंटर (SHAR) श्रीहरिकोटा में स्थित है. यह एक स्पिंडल शेप आइलैंड है जो आंध्र प्रदेश में स्थित है. इक्वेटर से इसकी करीबी (पूर्व दिशा की तरफ लॉन्चिंग में फायदेमंद) यहां से लॉन्चिंग होने की एक बड़ी वजह है.

2. श्रीहरिकोटा आइलैंड को 1969 में सैटलाइट लॉन्चिंग स्टेशन के रूप में चयनित किया गया था. 1971 में RH-125 साउंडिंग रॉकेट की लॉन्चिंग के साथ सेंटर ऑपरेशनल हुआ. पहला ऑर्बिट सैटलाइट रोहिणी 1A 10 अगस्त 1979 को लॉन्च किया गया लेकिन एक खामी की वजह से 19 अगस्त को यह नष्ट हो गया.

3. श्रीहरिकोटा ही क्यों? इसकी पहली वजह श्रीहरिकोटा की लोकेशन ही है. इक्वेटर से इसकी करीबी इसे जियोस्टेशनरी सैटलाइट के लिए उत्तम लॉन्च साइट बनाती है. यह पूर्व दिशा की तरफ होने वाली लॉन्चिंग के लिए बेहतरीन है. पूर्वी तट पर स्थित होने से इसे अतिरिक्त 0.4 km/s की वेलोसिटी मिलती है. ज्यादातर सैटलाइट को पूर्व की तरफ ही लॉन्च किया जाता है.

4. यहां तक पहुंचने वाले उपकरण बेहद भारी होते हैं. इन्हें दुनिया के कोने कोने से यहां लाया जाता है. जमीन, हवा और पानी हर तरह से यहां पहुंचना बेहतर है.

5. यह नेशनल हाइवे (NH-5) पर स्थित है. नजदीक के रेलवे स्टेशन से 20 किलोमीटर और चेन्नई के इंटरनेशनल पोर्ट से 70 किलोमीटर दूर है.

6. ऐसे काम के लिए आपको आबादी से दूर रहने की जरूरत होती है. जनता की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की हिफाजत पहला काम होती है. इसीलिए दुनिया के ज्यादातर लॉन्चिंग पैड वाटर बॉडीज के पास हैं. बैकोनुर एक अपवाद है. भारत में दो लॉन्चिंग पैड हैं. एक श्रीहरिकोटा में और दूसरा थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन, तिरुवनंतपुरम में है.

7. पृथ्वी की परिक्रमा को हर मिशन अपने लिए इस्तेमाल कर लेना चाहता है. पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की तरफ परिक्रमा करती है इसलिए परिक्रमा को एक बूस्ट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है और ईंधन की भी बचत होती है.

8. यहां की आबादी बेहद कम है और यहां रहने वाले ज्यादातर लोग या तो इसरो से ही जुड़े हैं या फिर स्थानीय मछुआरे हैं…

9. इसरो की इजाजत से ऐसा संभव है कि आप लॉन्चिंग पैड को देख सकें. हर बुधवार को विजिटर्स को लिमिटेड एक्सेस के साथ यहां ले जाया जाता है.