Home Religion जानिए कायस्थों में क्यों की जाती है भगवान चित्रगुप्त की पूजा..

जानिए कायस्थों में क्यों की जाती है भगवान चित्रगुप्त की पूजा..

दिवाली और गोवर्धन पूजा के बाद कलम के आराध्यदेव चित्रगुप्त भगवान की पूजा कल यानि की 9 नवंबर की की जाएगी. चित्रगुप्त भगवान की पूजा का हिंदू धर्म में बहुत महत्व माना जाता है. इस पूजन में लोग अपनी आय-व्यय का पूरा लेखा जोखा भगवान को समर्पित करते हैं. आपको बता दें कि दिवाली के बाद भाई दूज वाले दिन चित्रगुप्त की पूजा करने की मान्यता है.

कहा जाता है इस शुभ दिन के बाद से कोई भी नया काम शुरू करने से पहले श्री जरुर लिखना चाहिए. कार्तिक शुक्ल द्वितीया को चित्रगुप्त का पूजन लेखनी के रूप में किया जाता है. वहीं भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमाओं का पूजन कर अगले दिन उन प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है.

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कायस्थों में चित्रगुप्त भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. बता दें कि कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त भगवान से मानी जाती है. मान्यता के अनुसार मुताबिक महाभारत में शर-शैया पर पड़े पितामह भीष्म ने भगवान चित्रगुप्त का विधिवत पूजन किया था ताकि उन्हें मुक्ति मिल सके. इसके लिए यह पूजन बल, बुद्धि, साहस और शौर्य के लिए काफी अहम माना जाता है. वहीं पुराणों और ग्रंथों में इस पूजन के बिना की गई कोई भी पूजा अधूरी मानी गई है.

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वहीं इस पूजा का खास महत्व कायस्थों में माना जाता है क्योंकि कायस्थों की उत्पत्ति चित्रगुप्त से मानी जाती है. इसके लिए उनके लिए यह पूजन काफी विशेष माना जाता है. मान्यता के मुताबिक महाभारत में शर-शैया पर पड़े पितामह भीष्म ने भगवान चित्रगुप्त का विधिवत पूजन किया था ताकि उन्हें मुक्ति मिल सके. इसके लिए यह पूजन बल, बुद्धि, साहस और शौर्य के लिए काफी अहम माना जाता है. वहीं पुराणों और ग्रंथों में इस पूजन के बिना की गई कोई भी पूजा अधूरी मानी गई है.

ऐसी मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त पाप पुण्य का लेखा जोखा रखा करते हैं. दिवाली के बाद भैया दूज के दिन चित्रगुप्त पूजा के साथ लेखनी, दवात और पुस्तकों की पूजा भी की जाती है.