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इस पाकिस्तानी ने गांव से आकर भारत के खिलाफ लगाया था शतक, ऐसे हुआ करियर खत्म

पाकिस्तानी क्रिकेट में इमरान खान को ऐसे कप्तान के रूप में जाना जाता है कि वह प्रतिभाशाली खिलाड़ी को कभी भी बिना किसी रस्म अदायगी के टीम में लेकर ऐसा खिलाड़ी बना दिया कि बाद में उन्होंने देश का नाम किया.

इमरान के बारे में कहा जाता है वह किसी को भी खिलाड़ी बना देते थे, लेकिन ऐसा नहीं है| वह प्रतिभा को पहचानते थे. अब तक उन्होंने जितने खिलाड़ियों को टीम में लिया वो सारे खिलाड़ी हिट रहे और उन्होंने देश का नाम रोशन किया.

ऐसा ही एक वाक्या है जब उन्होंने एक खिलाड़ी को गांव से बुलाया और उस खिलाड़ी ने तमाम विपरीत परिस्थितियों में भी मैन आफ द मैच का अवार्ड जीता था. यह बात 1987 के पाकिस्तान टीम के भारत दौरे की है जब अहमदाबाद के मोटेरा में टेस्ट मैच होना था.

भारत से मैच से पहले जब इमरान ने पिच का मुआयना किया तो पाया कि यह पिच बल्लेबाजों की कब्रगाह है और स्पिनरों के लिए स्वर्ग है. इमरान चिंतित हो गए कि यहां आखिर भारतीय स्पिनरों का सामना कौन सा बल्लेबाज़ कर सकता है? इसके बाद उन्होंने अपनी टीम का मुआयना किया तो पाया कि एक ऐसा बल्लेबाज होना चाहिए जो भारत के खाटी स्पिनरों को झेल सके और रन भी बनाए.

इस पर उन्हें इजाज फकीह याद आये. जब पाकिस्तान में फोन करके इजाज को बुलाने को कहा तो पता चला कि वह गांव गये हैं. उनके गांव सूचना भेजी गई तो घर वालों ने बताया कि इंग्लैंड से काउंटी मैच खेलने का बुलावा आ गया था वो इंग्लैंड में खेलने गए हैं. जब इंग्लैंड में संदेश भेजा गया कि वहां काउंटी का मैच छोड़ कर तुरंत इंडिया पहुंचो.

संदेश मिलने के बाद फकीह पहले पाकिस्तान अपने गांव गए और उसके बाद भारत आए. भारत आते ही इमरान ने उनसे पूछा कि काउंटी में खेल रहे थे तो फकीह ने बताया कि काउंटी ही खेल रहा था.

इमरान ने फिर कहा तो ठीक है. उसके बाद अहमदाबाद में जब मैच खेला गया तो इजाज फकीह ने कपिल देव, मोहिन्दर अमरनाथ, मनिन्दर सिंह, गोपाल शर्मा, एनएस यादव, और रवि शास्त्री गेंदों पर चौके -छक्के लगाकर पाकिस्तानी टीम की ओर से सबसे अधिक 105 रन बनाए.

इस तरह उन्होंने भारतीय गेंदबाज़ों के खिलाफ शतक लगाकर मैच ड्रॉ करवाया. दूसरी पारी में बैटिंग का नंबर ही नहीं आया. इसके अलावा फकीह ने 27 ओवर की बॉलिंग भी की थी. सलामी बल्लेबाज श्रीकांत को आउट करके सनसनी मचा दी थी. इस मैच में फकीह मैन ऑफ द मैच रहे थे. इजाह फकीह को 1988 में ही पाकिस्तानी टीम से आउट कर दिया गया और इसके साथ ही उनका करियर खत्म हो गया.