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VVIP लोगों को सुरक्षा देने वाले ब्लैक कैट कमांडो के बारे में जानिये

भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा सात केन्द्रीय सशस्त्र बलों (सीएपीएफ) में से एक नेशनल सिक्योरिटी गॉर्ड्स या एनएसजी कमांडो होते हैं. एनएसजी कमांडो हमेशा काले रंग के नकाब. काले कपड़े और काले रंग के ही अन्य जरूरत के सामानों का प्रयोग करते हैं.इसलिए एनएसजी कमांडो को ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है.

देश के सबसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों की सुरक्षा एवं आतंकवादी हमलों से बचाव एवं जवाब देने की जिम्मेदारी एनएसजी कमांडो की होती है. एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग, रैंक, सैलरी और जिम्मेदारी से जुड़ी हुई बातें जानिये

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गठन

एनएसजी का गठन साल 1984 में किया गया था. भारत के अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा के साथ ही विकट आतंकवादी हमलों से सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एनएसजी पर ही होती है. 26/11 में हुए मुंबई हमलों में इन्हीं ब्लैक कैट कमांडो ने स्थिति में नियंत्रित किया था. एनएसजी कमांडो भारत का प्रमुख कमांडो संगठन है. यह आतंक निरोधी फोर्स के तौर पर भी जाना जाता है.

प्रशिक्षण

एनएसजी में कमांडो को प्रशिक्षण के दौरान किसी भी आतंकवादी हमले की स्थिति में आतंकवादियों पर काबू पाना, आतंकवादियों द्वारा अपहृत किये गए लोगों को मुक्त कराना, बम आदि संदिग्ध वस्तुओं एवं लोगों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करना आदि सिखाया जाता है.

एनएसजी का ध्येय वाक्य सबके के लिए एक, एक के लिए सब.

वेतन और भत्ता

एनएसजी कमांडो का औसत वेतन लगभग 140,296 रुपये प्रति वर्ष होता है. किसी भी एनएसजी सुरक्षा गार्ड के लिए अनुभव और रैंक के अनुसार ही वेतन और अन्य चीजों में बढ़ोत्तरी होती है. वेतन के साथ ही उन्हें ड्रेस और यूनीफार्म के लिए कपड़े आदि मिलते हैं.

  • सैलरी का औसत 84,236 रुपये से लेकर 239,457 रुपये होता है.
  • इनका बोनस लगभग 153 रुपये से लेकर 16913 रुपये क होता है.
  • इनका Profit Share लगभग 2.04 से लेकर 121,361 रुपये तक होता है.
  • इन्हें लगभग 10000 रुपये तक का Commission भी दिया जाता है.
  • इस प्रकार पद और अनुभव के आधार पर एनएसजी कमांडो की सैलरी औसतन लगभग 84,236 रुपये से लेकर 244,632 रुपये तक ही होती है.

इसके अतिरिक्त ऑपरेशनल ड्यूटी पर रहने वाले लोगों को एसपीजी ऑफिसर्स को 27,800 रुपये और नॉन ऑपरेशनल ड्यूटी करने वाले लोगों को सालाना 21,225 रुपये उनकी ड्रेस के लिए भत्ते के रूप में भी दी जाती है. हाल ही में वेतन आयोग में सियाचीन में ड्यूटी करने वाले जवानों को दिये जाने वाले भत्ते में 14000 रुपये से लेकर 30000 रुपये तक बढ़ा दिये गये हैं.

रैंक

एनएसजी में जवानों और अधिकारियों की रैंक पुलिस और सीएपीएफ के पैटर्न पर ही आधारित होती है.

अधिकारी

  • महानिदेशक (लेफ्टिनेंट कर्नल)
  • अतिरिक्त महानिदेशक (लेफ्टिनेंट जनरल)
  • इंस्पेक्टर जनरल(मेजर जनरल)
  • उपनिरीक्षक जनरल (ब्रिगेडियर)
  • समूह कमांडर (कर्नल)
  • स्क्वाड्रन कमांडर(लेफ्टिनेंट कर्नल)
  • टीम कमांडर(मेजर)

सहायक कमांडर(Assistant Commanders,JCOs)

  • सहायक कमांडर ग्रेड1 (सूबेदार मेजर)
  • सहायक कमांडर ग्रेड2 (सूबेदार)
  • सहायक कमांडर ग्रेड3 (नायब सूबेदार)

अन्य

  • रेंजर ग्रेड1 (Ranger Grade1)
  • रेंजर ग्रेड 2 (Ranger Grade2)
  • मुकाबला ट्रेडर्स (Combatised trdesmen)

एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग

एनएसजी में सीधी भर्ती नहीं की जाती है. इसके लिए भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलों के सर्वश्रेष्ठ जवानों को चयनित किया जाता है. कठिन ट्रेनिंग और परीक्षाओं के विभिन्न चरणों में उनमें से भी कई ट्रेनिंग पूरी नहीं कर पाते हैं.

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इसके लिए 35 साल से अधिक उम्र के जवानों को चयनित भी नहीं किया जाता है. इसके लिए फिजिकल और मेंटल टेस्ट होता है. 12 सप्ताह की अवधि तक चलने वाली एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग देश की सबसे कठिन ट्रेनिंग मानी जाती है.

एनएसजी कमांडो को अंधेरे में निशाना लगाने, आंखे बंद करके निशाना लगाने से लेकर बहुत ही कम रोशनी में निशाना लगाने की ट्रेनिंग दी जाती है. एनएसजी कमांडो की निशानेबाजी को अचूक बनाने के लिए आईफैक्स ट्रेनिंग सिमुलेटर का प्रयोग करना भी शुरु कर दिया गया है. इसके लिए कई अन्य कंप्यूटर प्रोग्रा्म्स की भी मदद ली जाती है.

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एनएसजी कमांडो को बैटल असाल्ट ऑब्सक्टल कोर्स और सीटीसीसी काउंटर टेररिस्ट कंडिशनिंग कोर्स का प्रशिक्षण भी दिया जाता है.

भारत का एकमात्र नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर एनएसजी के पास में ही है. इस सेंटर में आतंकवादियों के द्वारा उपयोग किये गये बम धमाकों के साथ विभिन्न आतंकी गुटों के तौर-तरीकों आदि पर रिसर्च किया जाता है.