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रहस्यमयी ओशो के तर्कों ने खींचा था दुनिया का ध्यान, लेकिन इन कारणों से बन गए विवादित गुरू

प्रचलित मान्यताओं को तीखे तर्कों की काट से ध्वस्त करने में माहिर ओशो के विचार आज खासे प्रासंगिक हैं। राजनीति, सामाजिक कुरीतियों और प्रतिष्ठित लोगों के बारे में खुलकर अपने विचार जाहिर करने के कारण ओशो अपने जीवन काल में ही विवादित गुरुओं में शुमार हो गए.

आज के नामी गुरुओं-बाबाओं के उलट ओशो ने जिस आश्रम परंपरा की शुरुआत की वो भारतीय परंपराओं से ठीक उलट थी. इसमें सन्यास तो था लेकिन उपवास, पूजन-पाठ और जंतर-मंतर की प्रचलित विधियों से परहेज भी.

ओशो ने भारतीय ध्यान विधियों की व्याख्या अपने तरह से की और उनमें आमूलचूल बदलाव के बाद अपने शिष्यों को इन विधियों को प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया.

दुनिया के तमाम धर्मों और जीवन जीने के तरीकों के बारे में सप्रमाण जानकारी के साथ अपने विचार रखने वाले ओशो ने भारत के हिंदू, जैन, सिक्ख धर्मों के साथ ही चीन के ताओ धर्म और कुरान के बारे में गहरी जानकारी प्रवचनों में रखी.

इन मुद्दों पर ओशो खुले मंच से न केवल उपस्थित श्रोताओं-विचारकों के प्रश्न स्वीकार करते थे बल्कि अपने तर्कों के दम पर दमदार और संतोषजनक उत्तर भी देने में माहिर थे.

मध्यप्रदेश की गाडरवारा तहसील से ताल्लुक रखने वाले ओशो ने उस दौर की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, जवाहरलाल नेहरू, एनीबीसेंट और महात्मा गांधी के बारे में बेबाक टिप्पणियां कीं.

हिंदुस्तान में सेक्स जैसे विषय जिस पर आज भी लोग खुलकर चर्चा करने से कतराते हैं. लेकिन ओशो ने उस दौर में संभोग से समाधि तक जैसी प्रवचन श्रंखला में सेक्स और ध्यान के आंतरिक संबंधों के बारे में रोचक व्याख्या की. ये ओशो के विचारों का ही परिणाम है कि आज लोग तिरस्कृत समझे जाने वाले विषय संभोग के बारे में अब अपनी राय रखने-सुनने लगे हैं.

ओशो के तर्कों में वो उदाहरण बहुत महत्वपूर्ण है जिसमें वो कहते हैं कि दूसरी दुनिया का कोई प्राणी धरती के किसी बुक स्टॉल पर किताबों को देखने के बाद अपना माथा पीट लेगा क्योंकि स्टॉल पर बिकने वाली 95 फीसदी किताबों में सेक्स मटेरियल भरा पड़ा है. मौजूदा सायबर एज में तो आप जानते ही होंगे कि सोशल मीडिया से लेकर मोबाइल में आने वाले तमाम अलर्ट्स में क्या-कुछ परोसा जा रहा है.


राजनीतिक हस्तियों से लेकर नामी गिरामी हस्तियों के खिलाफ की गईं बेबाक टिप्पणियों के कारण क्रांतिकारी विचारक-दार्शनिक ओशो हिंदुस्तान से लेकर दुनिया भर में विवादित हो गए.

अमेरिका तो यहां तक उनसे चिढ़ गया कि ओशो को निर्वासन के बाद अमेरिका छोड़कर फिर भारत में अपने अंतिम दिन गुजारने पड़े. क्या कहना है आपका ओशो किन कारणों से विवादित हुए. अपने कमेंट्स हमारे साथ शेयर जरूर करें और हां शेयर, लाइक, सब्सक्राइब करना भी न भूलें.

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