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अफगानिस्तान में कहां से आई बुद्ध की मू्र्तियां, जिसे तालिबान ने कर दिया तबाह?

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मूर्तियों को इस्लाम के खिलाफ घोषित किया

अफ़ग़ानिस्तान के बमियान में बुद्ध की विशालकाय मूर्ति स्थित है. अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल से दूर एक शहर है जिसका नाम है बामियान. ये अफ़ग़ानिस्तान से 130 किलोमीटर की डोरी पर है. इसका नाम इसीलिए लिया जा रहा है क्योंकी बामियान में भगवान बुद्ध की दो विशाल प्रतिमाएं हुआ करती थी.

आज भी इस बारे में कहते हुए बड़ा दुःख होता है कि इन मूर्तियों को लेकर सिर्फ इतिहास बन गया है. आज हम इन मूर्तियों को सामने से नही देख सकते है. इस्लामिक आतंकवादियों की दूषित मानसिकता के कारण बमियान में स्थित इन मूर्तियों का विनाश हो गया था. हालंकि 2015 में मूर्तियों का स्टेचू फिर से तैयार किया गया आज हम बताते हैं ऐसे कब और क्यों हुआ था.

दरअसल ये मूर्तियां कुषाणों द्वारा 5वीं और 6वीं सदी के मध्य में बनवाई गई थी. इन्हें बामियान घाटी में एक पहाड़ी को काटकर बनाया गया था. आपको बता दें कि 1999 में बमियान में तालिबान की सरकार थी और उनका राजा मुल्ला मुहम्मद ओमार.

कैसे किया गया मूर्तियों का विनाश

पहले तो खुद ही तालिबान सरकार इन मूर्तियों को सुरक्षित रखना चाहती थी. क्योंकी ये मूर्तियां उनके लिए पर्यटन का एक स्त्रोत थी और उन्हें इसके जरिये आय की प्राप्ति होती थी. लेकिन बाद में अफ़गानिस्तान में मुस्लिम धर्म गुरूओं ने इन मूर्तियों को इस्लाम के ख़िलाफ करार दे दिया.
2 मार्च 2001 को तालिबान ने इन मूर्तियों को नष्ट करना शूरू किया. पहले तो रॉकेट लांचर से इन मूर्तियों पर लगातार प्रहार किए गए, पर मूर्तियां इतनी मज़बूत थी कि नष्ट नही हुई.

 

इसके बाद मूर्तियों में बने सुराखों में बारुद लगा दिये गए. साथ ही मस्जिद से नारे भी लगवाए गए. बारुद से छोटी मूर्ति तो आराम से नष्ट हो गयी. लेकिन बड़ी मूर्ति की सिर्फ टाँगे ही नष्ट हो पायी. इसलिए जब तक मूर्ति पूरी तरह भस्म नहीं हुयी तब तक मूर्ति के बीच बारुद लगा दिए जाते थे लगभग 24 दिन में ये दोनों मूर्तियां पूरी तरह से भस्म हो चुकी थी.
इस्लाम के जन्म से बहुत पहले बौद्ध धर्म अरब में पहुंच चुका था और जगह–जगह बुद्ध की मूर्ति पूजा हो रही थी. यहीं नही हिंदू देवी–देवता भी पूजे जाते थे.

दोबारा बनाई गई मूर्तियां

हालांकि बाद में कई सालों बाद जर्मनी के म्यूनिख यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एरविन एमर्लिंग ने इस मूर्ति को दुबारा बनाने की योजना बनाई
वो मूर्ति के टूटे हुए 500 पत्थरों को पहचान गए थे. और तालिबान द्वारा तोड़ी गयी मूर्तियों को दोबारा बनाना चाहते थे. आपको बता दें की प्रोजेक्टर्स की मदद से विशालकाय होलोग्राफिक स्टेचू तैयार किए गए. इस काम को 7 जून 2015 को अंजाम दिया गया था.

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