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इस एक इंजेक्शन से खत्म हो जाएंगी आपकी सारी बीमारियां

अब सारी बीमारियों के लिए बन रहा है सिर्फ एक इंजेक्शन

कितना अच्छा हो अगर एक इंजेक्शन लगवा लेने से आप सभी तरह के वायरल फ्लू से बच सकें. अब रिसर्चरों ने इसे सच कर दिखाने वाले ऐसे ‘किलर’ सेल का पता लगा लिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्हें शरीर में ही ऐसी प्रतिरोधी कोशिकाओं का पता लगा लिया है जो अब तक के हर तरह के बुखार देने वाले वायरसों से बचा सकते है.

इंफ्लुएंजा का वायरस से मिलेगा छुटकारा

इसी के साथ एक ऐसा टीका बनाने की उम्मीद भी जगी है जिसे लेकर इंसान हर तरह के वायरल फ्लू से छुटकारा पा जाए. उदाहरण के तौर पर इंफ्लुएंजा का वायरस. हर साल एक खास मौसम में इसके वायरस खूब फैलते हैं.

इंफ्लुएंजा संक्रमण लाखों लोगों की लेता है जान

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल ऐसे गंभीर इंफ्लुएंजा संक्रमण लाखों लोगों की जान ले लेते हैं. इसके वायरस में रूप बदलने यानि म्यूटेशन का गुण होता है, जिसके कारण उसकी कुछ किस्मों के खिलाफ टीके होने के बावजूद दुनिया भर के सभी इलाकों में हर मरीज को इस बीमारी से बचाया नहीं जा सकता.

संक्रमण से लड़ सकती हैं ‘किलर टी कोशिकाएं’

ऑस्ट्रेलिया में रिसर्चरों ने बताया है कि दुनिया की आधी से भी अधिक आबादी के शरीर में पाई जाने वाली “किलर टी कोशिकाएं” इसका तोड़ दे सकती हैं. इन कोशिकाओं पर परीक्षण करने से पता चला है कि ये अब तक के सभी कॉमन फ्लू संक्रमणों से लड़ सकती हैं. इसका अर्थ यह हुआ कि किलर टी सेल्स से अगर ऐसे यूनिवर्सल फ्लू वैक्सीन बनाए जाएं, तो वह दुनिया की बड़ी आबादी को तमाम तरह के फ्लू से बचा सकती है.

सभी फ्लू के लिए होगा सिर्फ एक इंजेक्शन

इसका एक और फायदा ये भी है कि ऐसे टीके का एक शॉट ही काफी होगा और हर साल इसे बदलने की जरूरत भी नहीं होगी. इसके अलावा ये उन लोगों में भी असरदार होगा जिनके शरीर में यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते. टी सेल्स एक तरह की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं जो शरीर में घूमकर किसी तरह के संक्रमण और गड़बड़ियों को पकड़ती हैं. बैक्टीरिया और वायरस से होने वाली कई बीमारियों के लिए प्रतिरोधी क्षमता देने में इनकी अहम भूमिका होती है.

‘किलर टी कोशिकाएं’ फ्लू पर करती हैं सीधा हमला

“किलर” टी सेल इनसे इस मायने में खास हैं कि ये संक्रमित कोशिकाओं पर सीधे निशाना साध कर उन्हें नष्ट कर सकती हैं. मेलबर्न यूनिवर्सिटी के डोअर्टी इंस्टीट्यूट के रिसर्चर मारिओस कूटसाकोस और उनके सहयोगियों ने मास स्पेक्ट्रोमेट्री नामक स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर अणुओं को उनके भार के आधार पर अलग किया. इस तरह उन्होंने वायरस के उन हिस्सों की पहचान कर ली, जो फ्लू की सभी किस्मों में समान थे. इस तरह उन्होंने साबित किया कि किलर टी कोशिकाएं इंफ्लुएंजा ए, बी या सी सभी से लड़ सकती है

कम प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों ज्यादा होता है फ्लू

यह फ्लू बच्चों, बूढ़ों और कमजोर प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों में खास तौर पर खतरनाक होता है. किलर टी सेल की खोज करने वाली रिसर्चरों की टीम ने इस खोज को पेटेंट करवा लिया है और उम्मीद कर रहे हैं कि इससे यूनिवर्सल फ्लू वैक्सीन बन पाएगी.

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