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महात्मा गांधी की नीतियों पर जीती है चीन की ये महिला

भारत के राष्ट्रपिता का सम्मान पूरे भारत में किया जाता है लेकिन कुछ लोग उनकी आलोचना करना नहीं छोड़ते. गांधी जी जो भी करते थे वो सबके हित के लिए करते थे और उनके काम करने के तरीकों में उनके बहुत से उसूल शामिल होते थे. गांधी जी दुनिया के कई बड़े हिस्सों में गए लेकिन आजतक वे चीन नही गए. चीन के लोग महात्मा गांधी के बारे में जानते हैं, क्योंकि वे उनके बारे में पढ़ते हैं. वहीं की रहने वाली एक महिला वू पेई आज भी गांधी जी के सिद्धांतों को मानती हैं.

महात्मा गांधी के बारे में जानता है पूरा चीन :

महात्मा गाधी
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साल 1920 के समय जब महात्मा गांधी का प्रभाव भारत के कोने-कोने में फैल रहा था तब चीन एक ऐसा देश था जब वहां के कई लोग प्रेरणा के लिए उनकी ओर देख रहे थे. उनके मन में एक सवाल था कि क्या सत्याग्रह और अहिंसा का पालन करने से उनके देश का भला होगा? उन दिनों भारत में जहां ब्रिटिश हुकूमत थी वहीं चीन में ब्रिटेन के साथ-साथ अमरीका और फ्रांस जैसे बड़े देशों की ताकत का जोर था. इसके साथ ही चीन में अलग-अलग गुटों में लड़ाई के कारण गृह युद्ध जैसी स्थिति बन गई थी. गांधी जी कभी चीन नहीं गए लेकिन वहां उनके विषय पर काम करने वाले साउथ चाइन नॉर्मल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर शांग छुआनयू ने बताया कि चीन में महात्मा गांधी के ऊपर लिखी गईं करीब 800 किताबें मौजूद हैं.

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पूरे चीन में गांधी की एकमात्र मूर्ति राजधानी बीज़िंग के छाओयांग पार्क में लगी है जहां सामने एक मानवनिर्मित तालाब है और वो मारकेज़, इग्नेसी जान पेडेरेव्स्की और ह्रिस्टो बोटेव जैसी शख़्सियतों से घिरे हुए हैं. चीन के लोग आज भी उनके जीवन जीने के तरीकों से प्रभावित हैं. ऐसी ही एक 57 साल की महिला पू पेई हैं, जो पूर्वी आनहुई प्रांत के हुआंग थिएन गांव में रहती हैं और आज भी वे गांधी जी जैसे साधारण जीवन जी रही हैं. चीन में जहां की एक बड़ी जनसंख्या मांसाहारी है वहीं वू पेई पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं. वे पुराने कपड़े पहनती हैं और एसी और वाशिंग मशीन का इस्तेमाल नहीं करतीं हैं. वू गांधी के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए साल 2017 में अपने गांव में ही एक स्कूल खोला, जहां चीनी विद्यार्थियों को वे गांधी के सिद्धांतों को पढ़ाती हैं.

गांधी के सिद्धांतों की मिलती है सीख :

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वू पेई बीबीसी से बातचीत में बताया, ”मैं बच्चों को महात्मा गांधी के सिद्धांतों के बारे में सीधे तौर पर नहीं बताती बल्कि मैं उन्हें सिखाती हूँ कि वो हर जीव से प्यार करें, गांव के लिए अच्छा काम करें, कूड़ा इकट्ठा करें, अगर लोग अकेले हैं तो वो उनके घरों में उनसे मिलने जाएं.” इन सभी सिद्धांतों को वू अपने स्टूडेंट्स को पढ़ाती हैं और सिखाती भी हैं.

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