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प्रेंग्नेंसी के दौरान कहीं आप भी तो नहीं खाती ऐसा खाना.?

प्रेंग्नेंसी के दौरान मां को खुद का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है. कहा जाता है कि मां के खान पान का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है. ऐसे में वो जितना हेल्थी खाना खाएगी तो उसका बच्चा भी हेल्थी और स्वस्थ होता है. आपको बता दें कि आप जितना अधिक स्वास्थ्यवर्धक खाना खाते हैं शरीर को उतना ही पोषण दे पाते हैं और आपका शरीर उतना ही सेहतमंद बना रहता है.

मसालेदार और स्पाइसी खाना किसे पसंद नहीं होता. लेकिन प्रेंग्नेंसी के दौरान इसके फायदे हों ऐसा जरूरी नहीं है. प्रेंग्नेंसी में डॉक्टर भी ऐसे खाने से दूरी बनाने के लिए सलाह देते हैं.

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प्रेंग्नेंसी में मसालेदार खाना खाने से पहले आपको सावधानी बरतनी चाहिए. तो आइये जानते हैं कि स्पाइसी, तला-भूना और मसालेदार खाना प्रेंग्नेंसी के दौरान क्यों नहीं खाना चाहिए.

प्रेंग्नेंसी के दौरान शुरुआत के तीन महीने काफी महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा गर्भपात का खतरा भी सबसे ज्यादा बना रहता है. इसलिए अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए. हालांकि मसालेदार खाना खाने से गर्भपात नहीं होता है लेकिन इससे डायरिया और मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानियां हो सकती है.

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प्रेंग्नेंसी में पाचन शक्ति कम हो जाती है. ऐसे में ब्लोटिंग, गैस और जी की जलन और हॉट फ्लैश जैसी समस्याएं तेजी से पैदा होती है. ये मसालेदार खाना खाने से ये समस्याएं तेजी से पैदा होती है. मसालेदार खाना खाने से शिशु की सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है लेकिन आपको इससे असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में कम मसालेदार खाना खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है.

बहुत सारी महिलाओं ने यह माना है कि मसालेदार खाना खाने के बाद उनके पेट में पल रहा शिशु लात मारता है या फिर लगातार हिचकी लेता है. प्रेंग्नेंसी के आखिरी दिनों में शिबच्चा खाने के स्वाद को पहचानना शुरु कर देता है और साथ ही अलग-अलग तरह के रिएक्शन भी देता है.

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