History of UAE: यूएई का इतिहास क्या है, दुबई कैसे बना, UAE के संस्थापक कौन हैं

क्या आप जानते हैं कि यूएई कैसे बना? इसकी स्थापना किसने की थी? इन्हीं सब सवालों के जवाब देने के लिए हम आपको बताने जा रहें हैं यूएई का संक्षिप्त इतिहास…

ऐतिहासिक रुप से यूएई(UAE) अरबी जनजातियों का क्षेत्र रहा है. इस क्षेत्र में फारसी संस्कृति का गहरी प्रभाव है. यह क्षेत्र शुरू से ही अपने व्यापार के लिए जाना जाता रहा है. यहां की जनजातियां पशुपालन, कृषि और शिकार सहित विभिन्न प्रकार के व्यापार में शामिल थीं.

अबु धाबी व्यापार का मुख्य केंद्र

18वीं शताब्दी में पुर्तगाल और डच लोगों ने यहां के कई क्षेत्रों पर अपना कब्जा जमा लिया. 19वीं शताब्दी आते-आते ब्रिटिश हुकुमत ने अपने मजबूत समुद्री बल पर इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया. इस दौरान विदेशीयों के लिए बनी यास जिस हम अबु धाबी के नाम से जानते हैं, व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था.

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ट्रुशियल स्टेट्स का गठन

19वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने कई अमीरातों के साथ व्यक्तिगत समझौतों किए. इन समझौतों के परिणामस्वरूप कई अमीरातों ने मिलकर अपना क्षेत्र बनाया. इन क्षेत्रों को “द ट्रुशियल स्टेट्स” के नाम से जाना जाता है. उन्हें ट्रुशियल ओमान या ट्रुशियल शेखडोम भी कहा जाता था.

इस समझौते के अनुसार ये स्टेट्स कभी भी बिना ब्रिटिश सरकार की मंजूरी के बिना किसी भी दूसरे देश के साथ नहीं मिलते या उनकी हुकुमत स्वीकार नहीं करते थे. हालांकि अंग्रेजों अधीन वे अपने अमीरात पर राज कर सकते थे. ब्रिटिश सरकार बदले में विदेशी हमलों से उनकी रक्षा करती थी.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ट्रुशियल स्टेट्स की आजादी

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ट्रुशियल स्टेट्स बहराइन और कतर ने अपनी आजादी घोषित कर दी थी. उन्हें ब्रिटिश हुकुमत से आजादी मिल गई. लेकिन अब भी कई स्टेट्स थे, जो अंग्रेजों के अधीन ही थे. उन्हीं में यूएई के सात अमीरात भी शामिल थे. 

आर्थिक मंदी

19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान मोतीयों का व्यापार ट्रुशियल स्टेट्स की आय का मुख्य श्रोत हुआ करता था. यही व्यापार खाड़ी देश के ज्यादातर लोगों के लिए रोजगार का जरिया हुआ करता था. लेकिन प्रथम विश्व युद्ध का इस व्यापार बहुत बुरा असर पड़ा. इसके बाद 1920 और 1930 के दशक की आर्थिक मंदी ने इस व्यापार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था.

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नई शुरुआत

हालांकि इस क्षेत्र का मोती व्यापार का उधोग ध्वस्त हो चुका था, लेकिन ब्रिटिशर्स को अनुमान था कि ये क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरा है. क्योंकि इससे पहले उन्होंने पर्सिया (अब ईरान) और मेसोपोटामिया (अब ईराक) में भी तेल की खोज कर ली थी.

Image Source : Gulf news

1930 के शुरुआत में एक ब्रिटिश कंपनी ईराक पेट्रोलियम कंपनी ने इस क्षेत्र में तेल की खोज के लिए अपनी दिलचस्पी दिखाई. 1935 में वहां के लोकल शासकों ने इसकी अनुमति दे दी और कंपनी तेल खोजने में कामयाब हुई.

कच्चे तेल की निर्यात की शुरुआत

इस खोज के बाद लोकल शासक और ब्रिटिश सरकार में एक समझौता हुआ. जिसके तहत वहां के शासक उनके अनुमति के बिना तेल नहीं निकाल सकते थे.

ब्रिटिश सरकार ने उस क्षेत्र के लिए विकास के लिए अपना कार्यालय खोला और पूरे क्षेत्र को विकसित करना शुरु किया. जिससे आसानी से तेल निकाला और निर्यात किया जा सके. अंततः तीस वर्षों के बाद 1962 में अबु धाबी से कच्चे तेल का पहला कार्गों निर्यात के लिए रवाना हुआ.

सात अमीरात के शेख एक साथ आए

तेल की खोज के बाद दुबई, शारजाह, अबु धाबी, अजमान, फुजैराह, रास अल खैमाह, और उम्म अल क्वैन जैसे अमीरातों का विकास होने लगा. तभी इन सातों अमीरात के शेखों ने एक सात मिलकर एक परिषद बनाने का निर्णय लिया.

उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए विकास कार्यालय की कमान अपने हाथों में ले ली और इस कार्यालय के जरिए नीति बनाने लगे. नीति बनाने और फैसलों के समन्वय के लिए यह कार्यालय बहुत मददगार साबित हुआ. 1971 में यूएई की स्थापना के बाद इस परिषद को खत्म कर दिया गया.

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राज करने में अक्षम ब्रिटिश सरकार

1966 आते-आते यह साफ हो गया था कि ब्रिटिश सरकार वहां अब और राज करने में सक्षम नहीं है. क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध में उसे काफी नुकसान हुआ था. धीरे-धीरे विश्व में लगभग सभी जगह से ब्रिटेन अपना राज खत्म कर रहा था. खाड़ी देशों की आजादी भी अब करीब थी.

अबु धाबी को मिला नया शासक

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Sheikh Zayed bin sultan al Nahyan (Image Source : Wikipedia)

इसी वर्ष शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान को अबू धाबी के शासक के रूप में चुना गया था. उनके शासन को दौरान अबु धाबी ने तेजी से विकास किया. उन्होंने तेल से होने वाली कमाई से अबू धाबी में स्कूलों, घर, अस्पतालों और सड़कों का निर्माण करवाया. इससे अबु धाबी के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव आया.

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ब्रिटिश सरकार की वापसी की घोषणा

राज करने में असमर्थ होने के कारण 1968 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों से वापसी की घोषणा कर दी. उन्होंने इन अमीरात के साथ किए समझौतों को खत्म कर दिया. इसका एक मतलब था कि अब ब्रिटिश सरकार इन अमीरातों को किसी प्रकार की सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगी.

यूएई की स्थापना

ब्रिटिश हुकुमत के इस घोषणा के साथ ही अबु धाबी के शासक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान ने अमीरात के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित करने के लिए कदम उठाना शुरु कर दिया. उन्होंने दुबई के शासक शेख रशीद के साथ मिलकर सात अमीरात के शेखों के सामने एक संघ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा.

UAE history
Image Source : Al Arabiya

शेख जायद ने इस संघ में सात अमीरात दुबई, शारजाह, अबु धाबी, अजमान, फुजैराह, रास अल खैमाह, और उम्म अल क्वैन के साथ-साथ ट्रुशियल स्टेट्स कतर और बहरीन को भी शामिल होने का प्रस्ताव भेजा. लेकिन इनमें से केवल 6 अमीरात के शेखों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया.

और 2 दिसंबर 1971 को अबू धाबी, दुबई, शारजाह, उम्म अल-क्वैन, फुजैरा और अजमान के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते के बाद यूएई यानी यूनाइटेड अरब अमीरात संघ की स्थापना हुई. इस संघ की स्थापना के अगले साल ही सातवां अमीरात रास अल खैमाह इस संघ से जुड़ गया.

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