हिंदी दिवस: संस्कृत से हिन्दी बनने तक का सफर, हिन्दी कितनी पुरानी भाषा है, हिन्दी के बारे में रोचक तथ्य

1500 ईसा पू्र्व में हिन्दी की जननी कही जाने वाली संस्कृत भाषा की शुरुआत हुई थी. साल 1900 में हिन्दी को खड़ी बोली के रूप में पढ़ना-लिखना शुरू किया गया. National Hindi Day (राष्ट्रीय हिंदी दिवस) पर आज आपको हम कुछ रोचक तथ्य बताएंगे.

संस्कृत से हिन्दी बनने तक का सफर

  • 1500 ईसा पूर्व में ऋग्वेद पहला ग्रंथ था जिसकी भाषा संस्कृत थी.
  • 1000 ईसा पूर्व में संस्कृत भाषा में रामायण और महाभारत लिखा गया.
  • 500 ईसा पूर्व में महर्षि पाणिनि ने संस्कृत व्याकरण का प्रचार किया.
  • 500 ईसवी में संस्कृत के अपभ्रंश की शुरुआत हुई. अपभ्रंश का अर्थ है बोलने का देशी अंदाज जैसे अग्नि का आग.
  • 1000 ईसवी में भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाएं बोली जाने लगी. इन्हें प्रकृत भाषा कहा गया. इनमें शैरसेनी (पश्चिमी हिन्दी), पैशाची (लंहदा और पंजाबी), मगधी (बिहारी, बांग्ला, उड़िया और असमिया), अर्ध मगधी (पूर्वी हिन्दी) भाषा शामिल हैं.

हिन्दी में सबसे पहले लिखी गई रचनाएं

  • 1000 ईसवी में पहली हिन्दी रचना खुमान रासो ने की थी, इसमें चित्तौड़ के राजा रावल खुमान की कहानी थी.
  • 1212 ईसवी में वीसलदेव रासो लिखी गई. इसे राजपुतों का इतिहास माना जाता है.
  • 1225 से 1249 ईसवी में हिन्दी के पहले नामी कवि चंद्र वरदाई हैं. इन्होंने पृथ्वीराज रासो की रचना की.
  • साल 1230 में जगनिक ने महोबा के दो वीर आल्हा और ऊदल की कहानी का वर्णन किया.
  • 1340 ईसवी में अमीर खुसरो ने पारसी और हिन्दी में कई पहेलियां, गीत और दोहे लिखे.
  • 1450-1500 ईसवी के दौरान भक्तिकाल में कबीर, मीराबाई, रैदास, मलिक मुहम्मद जायसी ने समाज और भक्ति के ऊपर कई कविताएं लिखी.
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Source- The Financial Express

200 सालों तक ब्रज और अवधी भाषा का रहा प्रभाव

  • लोगों के ऊपर सूरदास की ब्रज भाषा और तुलसीदास की अवधी भाषा का प्रभाव तकरीबन 200 सालों तक रहा. अगर कोई हिन्दी का कवि बनना चाहता था तो उसे सबसे पहले अवधी या ब्रज भाषा सीखनी पड़ती थी.
  • 1805 में लल्लू लाल की प्रेम सागर हिंदी में प्रकाशित होने वाली पहली किताब मानी जाती है.
  • आज जो हिन्दी लिखी और बोली जा रही है उसकी नींव भारतेंदू हरिश्चंद ने रखा था. भारतेंदू हरिश्चंद का जन्म साल 1850 में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ था. इन्हें हिन्दी गद्य का जनक माना जाता है.

19वीं शताब्दी में हुई थी हिन्दी की शुरुआत

हिन्दी की पहली कहानी इंदूमती को माना जाता है इसके लेखक किशोरीलाल गोस्वामी हैं. यह रचना हिन्दी की खड़ी बोली में है. साल 1904 में उत्तर भारत के स्कूलों में हिन्दी भाषा पढ़ाए जाने की मांग उठी थी. हालांकि साल 1905 में ब्रिटिश सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया.

आजादी के बाद हिन्दी की राजभाषा बनने की कहानी

6 दिसंबर साल 1946 में भारत का संविधान तैयार करने के लिए संविधान सभा का गठन हुआ. तब उनके सामने एक बड़ा सवाल यह था कि भारत की आधिकारिक भाषा क्या होगी. उत्तर भारत के लोग चाहते थे कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले तो वहीं दक्षिण भारतीय चाहते थे कि तमिल या तेलुगू राष्ट्रभाषा बने. आखिरकार 14 सितंबर साल 1949 को संविधान सभा के सदस्यों ने एक मत होकर हिंदी को राजभाषा के रूप में चुना.

संविधान लागू होने के अगले 15 सालों तक अंग्रेजी को भी भारत की राजभाषा बनाए जाने का फैसला लिया गया, लेकिन जब यह तारीख नजदीक आने लगी तब दक्षिण भारत के कई राज्यों में दंगे भड़कने लगे. इसलिए साल 1963 में तत्कालीन सरकार राजभाषा अधिनियम लेकर आयी. इस अधिनियम में साल 1965 के बाद भी आधिकारिक कामकाज अंग्रेजी में बनाए रखना शामिल था. इसके अलावा राज्यों को यह अधिकार दिया गया कि वह अपनी मर्जी के अनुसार किसी भी भाषा में सरकारी कामकाज कर सकते हैं.

वर्तमान में 22 भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला हुआ है. संविधान में अनुच्छेद 343 से लेकर अनुच्छेद 351 तक राजभाषाओं को शामिल किया गया है.

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन के महत्व देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मानने का फैसला लिया और पहली बार 14 सितंबर साल 1953 को हिन्दी दिवस मनाया गया.

महात्मा गांधी चाहते थे राष्ट्रभाषा हिन्दी बने

दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद साल 1918 में महात्मा गांधी ने इंदौर के हिन्दी साहित्य सम्मेलन में कहा था कि ब्रिटिश अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं. उनके सारे काम अंग्रेजी में ही होते हैं. वैसे ही मैं सभी प्रार्थना करता हूं कि हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का सम्मान दिया जाए.

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Source- ET

विश्व हिन्दी दिवस और राष्ट्रीय हिन्दी दिवस में फर्क

बहुत से लोग विश्व हिन्दी दिवस और राष्ट्रीय हिन्दी दिवस को एक ही समझ लेते हैं लेकिन दोनों में अंतर है. विश्व हिन्दी दिवस 10 जनवरी को दुनियाभर में मनाया जाता है. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार करना है. वहीं 14 सितंबर को देशभर में राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जाता है. दरअसल 14 सितंबर साल 1949 को हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया गया इसलिए इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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Source- The Swaddle

इन देशों में भी बोली जाती है हिन्दी

भारत में एक बड़ी आबादी हिंदी बोलती और लिखती है. एक सर्वे के मुताबिक भारत 75 प्रतिशत लोग हिन्दी बोल सकते हैं

फिजी : फिजी की लगभग 38 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है. इस कारण यहां हिन्दी बोलने वालों की संख्या बहुत अधिक है.

मॉरीशस : मॉरीशस हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है. यहां बड़ी संख्या भारतीयों की है. तीन शताब्दियों तक यह ब्रिटिश, डच और फ्रांसीसी लोगों के अधीन रहा.

सिंगापुर : सिंगापुर में बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं. सिंगापुर में तमिल भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया है.

नेपाल : भारत का पड़ोसी देश नेपाल में हिन्दी बोलने वालों की तादाद ज्यादा है. नेपाल में भारतीय पर्यटकों की संख्या भी अधिक है.

पाकिस्तान : पाकिस्तान की आधिकारिक भाषा भले ही उर्दू और अंग्रेजी हो लेकिन यहां के लोग हिंदी, पंजाबी, सिंधी, पश्तो और बलूची भाषा बोलते हैं

भारत के अलावा इन सात देशों में तमिल बोली जाती है, सवाल ये भी कि सबसे पुरानी भाषा तमिल या संस्कृत ?