Explained: Molnupiravir Vs Paxlovid कोरोना की दो नई दवाओं में कौन बेहतर?

पिछले ही सप्ताह यूके ने कोविड के इलाज के लिए पहली एंटीवायरल Oral drug (मुंह से ली जाने वाली दवा) Molnupiravir को मंजूरी दी है. इस दवा को Merck and Ridgeback ने विकसित किया है. फिलहाल हल्के और मध्यम कोविड मरीजों के इलाज के लिए इसकी मंजूरी दी गई है. वहीं भारत में Molnupiravir की ट्रायल अभी जारी है. इसके अलावा अमेरिका में FDA (Food and Drug Administration) द्वारा भी इसकी समीक्षा की जा रही है. हालांकि अमेरिका ने Merck से दवा का 17 लाख कोर्स पहले ही बुक कर लिया है.

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Molnupiravir को मंजूरी मिलने के अगले ही दिन Pfizer ने कोविड के इलाज के लिए तैयार की जा रही एक और एंटीवायरल ओरल ड्रग के ट्रायल के नतीजे घोषित कर दिए. 

Paxlovid antiviral covid oral drug
Paxlovid (Image Source : openaccessgovernment.org)

Pfizer द्वारा तैयार की जा रही इस दवा का नाम Paxlovid रखा गया है. इसके ट्रायल के नतीजे में उसने बताया कि यह कोविड रोगियों को अस्पताल जाने और मौत की संभावना को रोकने में काफी प्रभावी है. अमेरिका में Paxlovid के आपातकालीन इस्तेमाल के लिए Pfizer भी जल्द ही FDA को अपने ट्रायल का डेटा जमा करने वाला है.  

WHO की राय

27 अक्टूबर को WHO ने कहा था कि कोविड -19 के इलाज के लिए Molnupiravir की समीक्षा की जा रही है. WHO की रेगुलेटरी बाॅडी द्वारा अभी इसके आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति लंबित है. समीक्षा के आधार पर ही तय होगा कि इस दवा को WHO के दिशानिर्देशों में शामिल किया जाएगा या नहीं. 

Molnapiravir के बारे में

Molnupiravir को MK-4482 या EIDD-2801 के नाम से तैयार किया गया है. शुरुआत में इसे इंफ्लुएंजा के इलाज के लिए विकसीत किया गया था. बाद में इसे कोविड-19 के लिए रिडिजाइन किया गया. यह SARS-CoV-2 के म्युटेशन में हस्तक्षेप करता है. जिसके कारण इससे होने वाली बीमारी की गंभीरता कम हो जाती है. 

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जितनी जल्दी इसे कोविड मरीज को दिया जाएगा, ये उतना ही ज्यादा ये प्रभावी होगा. युके ने सलाह दिया है कि कोविड के लक्षण दिखने के बाद जल्द से जल्द इस दवा का इस्तेमाल करें.

Paxlovid के बारे में 

इस दवा को मुंह के जरिए लेने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि कोविड लक्षण दिखने के साथ ही तुरंत इसके सेवन का सलाह दिया जा सके. जिससे मरीज को गंभीर अवस्था में जाने से रोका जा सके. यह दवा बीमारी के प्रोटियोलाइसिस स्टेज पर ही हस्तक्षेप करना शुरु कर देता है. प्रोटियोलाइसिस वायरस के म्युटेशन शुरु करने से पहले का स्टेज है.

Pfizer
Image Source : Financial Times

दोनों में कौन बेहतर

दोनों कंपनियों के ट्रायल के नतीजों से अनुमान लगाया गया है कि Merck के मुकाबले Pfizer कोविड के खिलाफ ज्यादा असरदार है. हालांकि Pfizer ने अपने ट्रायल पूरे डेटा को जमा नहीं किया है. 

Pfizer ने अपने ट्रायल के नतीजों के आधार पर कहा है कि यदि इसकी दवा को लक्षण दिखने के तीन दिन के भीतर दिया जाए तो यह कोविड मरीजों के अस्पताल जाने और मौत की संभावना को 89 प्रतिशत तक कम कर देता है. वहीं यदि इसे पांच दिनों के भीतर दिया गया तो इस संभावना को 85 प्रतिशत तक कम कर देता है.

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यदि Merck की बात करें तो, इसने बताया है कि यदि इसकी दवा को लक्षण दिखने के पांच दिनों के भीतर दिया गया तो यह कोविड मरीजों के अस्पताल जाने और मौत की संभावना को 50 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है. मालुम हो कि कंपनी ने तीन दिनों के भीतर दवा दिए जाने के बारे में कोई डेटा जारी नहीं किया है. 

आपको बता दें कि Pfizer की दवा का ब्रांड नाम Paxlovid है जबकि Merck की दवा का ब्रांड नाम Lavgevrio रखा गया है. 

कितनी सुरक्षित हैं ये दवाएं

हालांकि दोनों कंपनियों ने फिलहाल इलाज पर सीमित डेटा ही जारी किया है लेकिन इन दवाओं को इलाज के लिए सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया है. 

Molnupiravir Merck Covid efficacy
Molnupiravir (Image Source : Merck)

Pfizer ने बताया है कि इस दवा की गोली या प्लेसबो (डमी) का इस्तेमाल करने वाले 20 प्रतिशत मरीजों में प्रतिकुल प्रभाव देखने को मिला है,जो बहुत कम मात्रा में थे. जबकि दवा लेने वाले 1.7 प्रतिशत मरीजों में और प्लेसबो लेने वाले 6.6 प्रतिशत मरीजों पर गंभीर प्रतिकुल प्रभाव हुए. 

वहीं Merck ने बताया है कि इसकी गोली को लेने वाले 12 प्रतिशत मरीजों में प्रतिकुल प्रभाव देखने को मिला. जबकि इसकी प्लेसबो या डमी गोली को लेने वाले 11 प्रतिशत मरीजों में प्रतिकुल प्रभाव देखने को मिला.

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कब और कितनी होगी सप्लाई

Pfizer और Merck दोनों कंपनियों ने कहा है कि वे चाहते है कि सभी देशों के लोगों तक यह दवा पहुंचे. इसके लिए वे अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं.  

Pfizer ने इस साल के अंत तक दवा की 1,80,000 कोर्स का निर्माण करने का अनुमान लगाया है. उसका लक्ष्य है कि 2022 तक वे इसके 5 करोड़ कोर्स का निर्माण करें.

वहीं Merck ने इस साल के अंत तक दवा की 1 करोड कोर्स का निर्माण करने का प्लान किया है. जबकि 2022 तक उसने इसके कम से कम 2 करोड़ कोर्स का लक्ष्य निर्धारित किया है. 

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भारत में ट्रायल की स्थिति

Molnupiravir के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए Merck भारत की कई दवा निर्माण कंपनियों से बातचीत कर रहा है. 29 जून को सिप्ला लिमिटेड, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज लिमिटेड (डीआरएल), एमक्योर फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड सहित पांच भारतीय फार्मा कंपनियों ने घोषणा किया था कि वे हल्के कोविड मरीजों के इलाज के लिए Molnupiravir के परीक्षण के लिए मिलकर काम करने जा रही है. 

Merck Molnupiravir

अभी के लिए भारत में इसके ट्रायल जारी है. साथ ही साथ कुछ शुरुआती डेटा भारत के ड्रग कंट्रोलर के साथ साझा भी की गई है. ये डेटा मध्यम कोविड मरीजों पर किए गए ट्रायल के थे. 

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हाल ही में हैदराबाद की कंपनी ऑप्टिमस ग्रुप ने तीसरे फेज का ट्रायल खत्म होने की घोषणा की थी. ट्रायल के पांचवें दिन इलाज होने वाले ग्रुप के 78.4 प्रतिशत मरीजों का RT-PCR टेस्ट का रिपोर्ट निगेटिव आया. वहीं प्लेसबो इस्तेमाल करने वाले ग्रुप के 48.2 प्रतिशत मरीज निगेटिव पाए गए थे.  

जबकि ट्रायल के दसवें दिन इलाज होने वाले ग्रुप के 91.5 प्रतिशत मरीजों और प्लेसबो ग्रुप के 43 प्रतिशत मरीजों का RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव पाया गया. 

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