राजनीतिक दल किसे कहते हैं, राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं?

आप भारत के कई राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के नाम जानते होंगे. लेकिन क्या आपको ये पता है कि एक राजनीतिक दल किसे कहते हैं? rajnitik dal kise kahate hain, राजनीतिक दल किसे कहते हैं , राष्ट्रीय राजनीतिक दल किसे कहते हैं, rashtriya rajnitik dal kise kahate hain. इनका गठन किस प्रकार होता है? ये कितने प्रकार के होते हैं और भारत में कितने ऐसे राजनीतिक दल हैं? आज हम आपको इन्हीं सब सवालों के जवाब देंगे.

राजनीतिक दल किसे कहते हैं?

एक राजनीतिक दल कई लोगों का समूह होता है, जिसका गठन समाज में सामूहिक भलाई के लिए किया जाता है. यह समूह अपनी नीतियों और दृष्टिकोण को लेकर आम जनता के बीच जाती हैं और उनका समर्थन प्राप्त करने की कोशिश करती हैं.

इस प्रकार वे चुनावों के माध्यम से किसी देश की सरकार में अपनी सत्ता हासिल करते हैं. समाज की भलाई और विकास के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं. देश की जनता को जिस राजनीतिक दल के विचार अच्छे लगते हैं, उन्हें वोट देकर अपना समर्थन जाहिर करती है और उन्हें सत्ता में लाने की कोशिश करती है.

राजनीतिक दलों को फंडिंग कैसे मिलती है

इन राजनीतिक दलों को चलाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है. जिन्हें क्राउड फंडिंग, किसी कंपनी या समाजसेवी संस्थानों से दान या चंदा, सदस्यता शुल्क जैसे विभिन्न माध्यमोंं से इक्कठा किया जाता है. 

रोचक तथ्य : चुनाव आयोग ने अब आधिकारिक तौर पर चुनाव के समय रानीतिक दलों द्वारा दीवारों पर चित्र के माध्यम से प्रचार करने पर बैन लगा दिया है.

प्रतिकात्मक तस्वीर
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भारत में राजनीतिक दलों की संख्या

वर्तमान में भारत में कुल 2858 पार्टियां हैं. इनमें से आठ पार्टी राष्ट्रीय और 54 राजकीय पार्टीयां हैं. इसके अलावा 2796 पार्टियां ऐसी हैं जिन्हें अभी अपने क्षेत्र में कोई खास पहचान नहीं मिल पाई है.

राजनीतिक दलों के प्रकार 

मुख्य रुप से तीन तरह के राजनीतिक दल होते हैं. पहला राष्ट्रीय राजनीतिक दल, दूसरा क्षेत्रीय या राज्य स्तरीय राजनीतिक दल और तीसरा गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल. 

गैर मान्यता प्राप्त, क्षेत्रीय/राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय राजनीतिक दल का दर्जा प्राप्त करने के लिए सभी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग की कुछ शर्तों को पूरा करना पड़ता है. 

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राष्ट्रीय राजनीतिक दल बनने की शर्तें – 

i) पार्टी कम से कम चार राज्यों में चुनाव आयोग के द्वारा राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा प्राप्त हो चुकी हो या

ii) पार्टी ने लोकसभा चुनाव में कम से कम तीन राज्यों दो प्रतिशत सीटें जीती हो यानी कम से कम तीन राज्यों से 11 लोकसभा सीटें जीती हो

iii) पार्टी ने लोकसभा चुनावों में कम से कम चार राज्यों में कुल वैध मतदान का कम से कम 6 प्रतिशत वोट प्राप्त किया हो और चार लोकसभा सीटे जीती हो.

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कैसे होता है राजनीतिक दलों का गठन  

एक लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारतीय नागरिकों का कोई भी समूह एक राजनीतिक दल का गठन करने स्वतंत्र है. यदि एक राजनीतिक दल का गठन करना है तो सबसे पहले कम से कम 100 सदस्यों को इक्कठा होना होगा, जो पार्टी का सदस्य बनने के लिए तैयार हो.

ये 100 लोग किसी भी धर्म, जाती या समुदाय के हो सकते हैं लेकिन उनका व्यस्क और वोटर लिस्ट में नाम होना अनिवार्य है. इसके बाद दल की बैठक और अन्य जरुरी कार्यों के लिए के कार्यालय का जगह निर्धारित करना होता है.

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नो ऑब्जेक्शन

राजनीतिक कार्यालय का जगह निर्धारित होने पर उस जगह के मालिक से एफिडेविट के फाॅर्म में एक नो ऑबजेक्शन (No Objection) लेना अनिवार्य है, जिसमें लिखा हो कि उसके जमीन पर उस राजनीतिक दल का कार्यालय होने पर उसे किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है. इसके अलावा ग्राम पंचायत या नगर पंचायत (Municipal Corporation) से भी नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है.

इसके बाद दल के सभी सदस्यों की एक बैठक कर उसका नाम, नियम-कानून, मेमोरेंडम और संविधान बनाया जाता है. इसके अलावा इस बैठक के दौरान दल के ऑफिस बेयरर्स यानी अध्यक्ष या महासचिव, ट्रेजरर इत्यादि का चयन एक चुनाव के जरिए किया जाता है. ये सारी प्रकिया पूरी करने बाद वह राजनीतिक दल अपने पंजीकरण प्रक्रिया के लिए आवेदन दे सकता है.

आपको बता दें कि किसी भी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य नहीं है. लेकिन चुनाव आयोग के पास पंजीकरण करवाने से पंजीकृत पार्टियों को Representation of People Act, 1951 के प्रावधानों के तहत कई तरह के फायदे मिलते हैं. 

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