भारत की GDP में 20.1 प्रतिशत की उछाल के बाद भी क्यों चिंताजनक हैं हालात

इस साल अप्रैल से जून के बीच भारत (India) की जीडीपी (GDP) में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. एसबीआई (SBI) की इकोरैप रिसर्च रिपोर्ट ने अनुमान लगाया था कि भारत(India) की वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी(GDP) में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. वहीं आरबीआई (RBI) ने अप्रैल से जून के बीच की पहली तिमाही के लिए 21.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था.

अगर आंकड़ों पर नज़र डाले तो साल 2020-21 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी 24.4 प्रतिशत की कमी हुई थी यानी साल 2020 के पहली तिमाही में भारत बड़ी मंदी चपेट में था और वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में 20.1 प्रतिशत के उछाल आने के बाद भी भारत अपने पुराने स्तर से नीचे है.

GDP
Source- Harvard School

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी 26.95 लाख करोड़ रुपये थी जो इस साल अप्रैल से जून की तिमाही में 20 प्रतिशत बढ़कर 32.38 लाख करोड़ रुपये हो गयी है.

हालांकि सरकारी विज्ञप्ति में साल 2019 के पहली तिमाही का जिक्र नहीं हुआ है और न ही यह बताया गया है कि पिछले साल की पहली तिमाही में 24.4 प्रतिशत की कमी हुई थी. साल 2019 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के बीच भारत की जीडीपी 35.85 लाख करोड़ रुपये थी. अगर साल 2019, 2020 और साल 2021 की पहली तिमाही के आंकड़े पर नजर डाले तो पता चलता है कि भारत की अर्थव्यवस्था साल 2019 के मुकाबले अभी भी कम है भले ही साल 2021 के पहली तिमाही में वृद्धि हुई हो.

What is GDP

पिछले साल की तिमाही से होती है जीडीपी की तुलना-

आप यह सोच रहे होंगे कि मैंने पहली तिमाही कि तुलना पिछली तिमाही के बजाय पिछले साल कि तिमाही से क्यों कर रहा हूं, असल में अर्थशास्त्र में यह नियम है कि जीडीपी की तुलना पिछले साल से ही की जाती है.

भारत की अब तक की जीडीपी पर एक नजर-

  • साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ उस समय देश की जीडीपी 3 प्रतिशत थी.
  • साल 1961 में भारत की जीडीपी 3.72 प्रतिशत थी.
  • साल 1964 के दौरान भारत में अकाल पड़ा. जिसका फर्क जीडीपी पर भी पड़ा साल 1965 में पिछले साल की तुलना में 10.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भारत की जीडीपी माइनस 2.63 प्रतिशत हो गई.
  • साल 1967 में जब अकाल खत्म हुआ और मानसून अनुकूल देश में एक बार फिर सामान्य तरीके से वर्षा होने लगी तब भारत की जीडीपी 7.83 प्रतिशत हो गई.
  • साल 1971 में अचानक भारत की जी़डीपी में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.64 प्रतिशत पर पहुंच गई.
  • आपातकाल के दौरान भारत की जीडीपी 9.15 प्रतिशत थी.
  • साल 1979-80 में भारत की जीडीपी माइनस 5.24 प्रतिशत थी.
  • साल 1985 में भारत की जीडीपी 5.25 प्रतिशत थी.
  • साल 1988 में भारत की जीडीपी में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई और यह बढ़कर 9.63 प्रतिशत हो गई. हालांकि साल 1991 में जी़डीपी में भारी गिरावट देखने को मिली और यह घटकर 1.06 प्रतिशत हो गई.
  • साल 1995 में एक बार फिर जीडीपी में बढ़ोत्तरी हुई और यह 7.55 प्रतिशत हो गई.
  • साल 1999 में भारत की जीडीपी 8.65 प्रतिशत हो गई.
  • साल 2004 में भारत की जीडीपी 7.92 प्रतिशत थी.
  • साल 2006 में भारत की जीडीपी 8.06 प्रतिशत थी.
  • साल 2010 में भारत की जीडीपी 8.50 प्रतिशत थी.
  • साल 2016 में भारत की जीडीपी 8.26 प्रतिशत थी.
  • साल 2017 में भारत की जीडीपी 7.04 प्रतिशत थी
  • साल 2018 में भारत की जीडीपी 6.12 प्रतिशत थी.
  • साल 2019 में भारत की जीडीपी 4.02 प्रतिशत थी.

साल 2020-21 में कोविड-19 महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी. वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान देश की जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर माइनस -7.3 प्रतिशत हो गई. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक चौथे तिमाही यानी जनवरी से मार्च में 1.6 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली. यह पिछले 40 सालों में अर्थव्यवस्था का सबसे खराब दौर था. इससे पहले साल 1779-80 में देश की जीडीपी माइनस 5.2 प्रतिशत थी.

जीडीपी क्या है (What is GDP)

जीडीपी का पूरा नाम ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी सकल घरेलू उत्पाद है. किसी एक साल में देश के अंदर पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं के कुल वैल्यू को कहते हैं. जीडीपी से ही पता चलता है कि किसी देश की अर्थव्यवस्था कैसी है. कुछ साल पहले इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिग और कंप्यूटर जैसी सर्विस सेक्टर को भी जोड़ा गया.

GDP
Source- Tehran Times

भारत में सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (सीएसओ) यानी केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय जीडीपी का आंकलन करता है. सीएसओ तिमाही पर जीडीपी का आंकलन प्रस्तुत करता है.

जीडीपी की गणना में सभी सार्वजनिक एव निजी उपभोग, सरकारी परिव्यवय, निवेश, निजी इंवेटरी, पेड-इन कंस्ट्रक्शन कॉसल्ट और विदेशी व्यापार संतुलन को शामिल किया जाता है. इसके अलावा निर्यात को इसमें जोड़ा जाता है और आयात को घटा दिया जाता है.

जीडीपी का आंकलन कैसे होता है –

जीडीपी के आंकलन के लिए चार महत्वपूर्ण घटक हैं. पहला उपभोग व्यय, दूसरा सरकारी व्यय, तीसरा निवेश व्यय और आखिरी शुद्ध निर्यात है. जीडीपी का आंकलन नॉमिनल और रियल टर्म में होता है.

नॉमिनल टर्म्स में वस्तुओं और सेवाओं की मौजूदा कीमतों पर वैल्यू है. वहीं किसी बेस ईयर के संबंध में इसे महंगाई के सापेक्ष एडजस्ट किया जाता है तो रियल जीडीपी प्राप्त होता है.

जीडीपी के डेटी में कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी, गैस सप्लाई, माइनिंग, क्वैरीइंग, वानिकी और मत्स्य, होटल, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और कम्युनिकेशन, फ़ाइनेंसिंग, रियल एस्टेट और इंश्योरेंस, बिजनेस सर्विसेज़ और कम्युनिटी, सोशल और सार्वजनिक सेवाओं को शामिल किया जाता है.

आम जनता पर GDP का असर

जीडीपी का बढ़ने या घटने से आम जनता प्रभावित होती है. अगर किसी देश की जीडीपी बढ़ रही है तो इसका मतलब है कि वह देश आर्थिक गतिविधियों में अच्छा काम कर रही है. अगर किसी देश की जी़डीपी कम या नीचे जा रही है तो इसका मतलब है कि वह देश मंदी की तरफ जा रही है और सरकार को अपनी नीतियों पर काम करने की जरूरत है.

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