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गिरगिट रंग कब और कैसे बदलता है, गिरगिट से जुड़े रोचक तथ्य जानिये

धरती पर मौजूद सभी पशु, पक्षियों और जानवरों के शरीर का अपना एक कलर होता है, लेकिन गिरगिट के शरीर का कोई एक कलर नहीं होता है. गिरगिट अपने आसपास के माहौल के हिसाब से अपना रंग बदल लेता है. आइए जानते हैं गिरगिट कब, क्यों और कैसे अपने आप को तरह-तरह के रंगों में बदल लेगा है. दरअसल हर जानवर को अपनी सुरक्षा के लिए कोई ना कोई युक्ति जरूर आती है. ऐसे ही अपनी सुरक्षा के लिए गिरगिट रंग बदलते हैं. गिरगिट अपना रंग इसलिए बदलता है जिससे शिकारी की नजर से वो खुद को बचा सके.

इसके अलावा गिरगिट के रंग बदलने के और भी कई कारण हैं. बाहर के तापमान के अनुसार अपने शरीर का तापमान एडजस्ट करने के लिए. ठण्ड में रहने वाला गिरगिट ज्यादा गर्मी लेने के लिए अपना रंग गहरा कर लेता हैं, जबकि गर्मी में रहने वाला गिरगिट ठंडक के लिए अपना रंग हल्का कर लेता है.

गिरगिट का रंग बदलना उसके मूड के बारे में भी बताता है. गिरगिट अगर गुस्से में है तो उसके शरीर का रंग गहरा होता है. अगर शांत है तो बॉडी कलर हल्के रंग का हो जाता है.

गिरगिट रंग
गिरगिट

दरअसल गिरगिट में विशेष प्रकार की सेल्स क्रोमैटोफोर्स पाई जाती हैं, जो मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती हैं. जब ख़तरा होने का संकेत मस्तिष्क तक जाता है, तो गिरगिट का दिमाग इन सेल्स को संकेत भेजता है जिसके अनुसार ये सेल्स फैलने सिकुड़ने लगती है और अपना आकार बदलकर छोटी बड़ी भी हो जाती है. ऐसा करने से गिरगिट का रंग बदलने लगता है. गिरगिट अपने शरीर को पीला, गहरा भूरा, काला और सफेद कई तरह के रंग में ढाल सकते हैं.

ऐसा माना जाता है कि पेड़ पर चढ़ने वाले गिरगिट ही ज्यादा रंग बदलते हैं और तुरंत पेड़ पौधों जैसा रंग बना लेते हैं.

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