Dharmik Ajaybhai Kakadiya : ब्रेन डेड बच्चे ने किया ऐतिहासिक काम, 6 लोगों को दी नई जिन्दगी

हाल ही में एक 14 साल के ब्रेन डेड बच्चे ने ऐसा काम किया है, जिससे दुनिया उसके मरने के बाद भी उसे याद रखेगी. इस बच्चे का नाम धार्मिक काकड़िया है. धार्मिक गुजरात में सूरत के रहने वाले हैं. वे गुजरात के पहले ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका अंगदान उनके परिवार ने किया है. इसके जरिए उन्होंने 6 लोगों को नई जिन्दगी दी है.

किडनी की बीमारी थी, हो गया ब्रेन डेड

धार्मिक के माता-पिता का दर्द केवल वही समझ सकते हैं. क्योंकि बेटे को पाँच सालों से किडनी की बीमारी थी. बीमारी इतनी गंभीर हो गई थी कि पिछले एक साल से प्रत्येक सप्ताह धार्मिक की तीन डायलीसिस हो रही थी. उन्हें तुरंत किडनी ट्रांसप्लांट कराना जरूरी हो गया था.

इसके लिए उन्हें स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उन्हें प्रतीक्षा सूची (waiting list) में रखा जाने वाला था. उनके माता-पिता वेटिंग लिस्ट की प्रक्रिया को पूरा करने में लगे हुए लगे हुए थे. लेकिन उसी दिन डाॅक्टरों के पैनल ने बच्चे को ब्रेन डेड घोषित कर दिया.

Surat child Dharmik Kakadiya

दुःख में भी धर्म का काम, 6 लोगों की मिलेगी नई जिन्दगी

पूरा परिवार धार्मिक की मौत से शोक में था. इसके बावजूद धार्मिक के माता-पिता ने दुःख में भी अपने बेटे के नाम के अनुसार काम किया. किरण हाॅस्पिटल के कहने पर वे तुरंत अपने बेटे के अंगदान के लिए तैयार हो गए. वे धार्मिक का न केवल हृदय, फेफड़े, लिवर और आंखें, बल्कि उनके दो हाथों को भी दान करने के लिए तुरंत सहमत हो गए. उन्होंने इस अंगदान से 6 लोगों को नई जिन्दगी दी है.

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हाथ दान करने वाला पहला नाबालिग

इसके साथ ही धार्मिक का अंगदान एक किडनी फेल रोगी और नाबालिग व्यक्ति द्वारा हाथ की जोड़ी को दान करने वाला पहला दान बन गया है. धार्मिक के हाथों को मुंबई के ग्लोबल अस्पताल में पुणे के रहने वाले एक 32 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में ट्रांसप्लांट किया गया है.

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इसके अलावा उनके हृदय को अहमदाबाद के सीआईएमएस अस्पताल में जूनागढ़  के 15 वर्षीय बच्चे में, फेफड़े को चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में आंध्र प्रदेश के एक 44 वर्षीय व्यक्ति में ट्रांसप्लांट किया गया. धार्मिक के लिवर को अहमदाबाद के जायडस अस्पताल में एक 35 वर्षीय व्यक्ति में ट्रांसप्लांट किया गया. वहीं उनके कॉर्निया को सूरत में लोकद्रष्टी आई बैंक को दान कर दिया गया है, जिसका ट्रांसप्लांटेशन किरण अस्पताल में किया गया, जहाँ धार्मिक का इलाज चल रहा था.