दुनियाभर में 32% मौत के लिए हार्ट अटैक जिम्मेदार, आखिर युवाओं में क्यों बढ़ रहा है इसका खतरा

आज वर्ल्ड हार्ट डे है. कोवि़ड-19 के बाद सबसे बड़ी समस्या ह्दय रोग की उभरकर सामने आई है. दुनियाभर में जितनी मौतें कोरोना के कारण नहीं हुई उससे ज्यादा मौतें हर साल दिल की बीमारी के कारण होती है. WHO के डेटा के मुताबिक साल 2020 में दिल की बिमारी की वजह से 18 लाख 13 हजार लोगों की जान गई. जबकी साल 2019 में 1 करोड़ 79 लाख लोगों की मौत हुई. दुनियाभर में 32 प्रतिशत मौत केवल हार्ट अटैक की वजह से होता है. पिछले कुछ सालों में बुजुर्गों की अपेक्षा युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा है. कोरोना के बाद दिल के रोगियो में 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

देश में हार्ट अटैक के अधिकत्तर मामले 50 साल से कम उम्र वाले लोगों में आते हैं. साल 2000 से साल 2016 के बीच 50 साल से कम उम्र के लोगों में हर साल हार्ट अटैक की औसत दर में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

टीवी कलाकार सिद्धार्थ शुक्ला की मात्र 41 साल की उम्र में हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई. जिसके बाद इस बारे में चर्चा तेज हो गई कि आखिरकार कम उम्र केे नौजवानों में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ रहा है.

हार्ट अटैक क्या है

ह्दय में खून की स्प्लाई तीन तरफ से होती है. जब शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है. तब ह्दय के नसों में ब्लॉकेज होने लगता है. अगर ब्लॉकेज 70 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाए तब ह्दय में पहुंचने वाले ब्लड का फ्लो धीमा हो जाता है और ह्दय पंपिंग करना बंद कर देता है. इसे ही हार्ट अटैक कहते हैं.

Source- Amar Ujala

कम उम्र के लोगों में क्यों बढ़ रहा है ह्दय रोग का खतरा

  • कम उम्र में हार्ट अटैक आने के कई कारण हो सकते हैं. जैसे- स्ट्रेस, स्मोकिंग, सुस्त जीवनशैली, फास्ट फूड, टाइम पर न सोना और सामान्य से अधिक चीनी या नमक का प्रयोग करना.
  • मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना से रिकवर हुए मरीजों में ह्दय से संबंधित बीमारी देखने को मिली है. इसकी वजह कोविड इंफेक्शन, प्रोथ्रोम्बोटिक, प्रो-इंफ्लेमेटरी, इम्युनोजेनिक है. सीधे शब्दों में कहे तो कोरोना के दौरान दी जाने वाली दवाएं इम्यूनिटी सिस्टम पर असर डालती है.
  • डायबिटीज और मोटापे की वजह से भी हार्ट अटैक आने का खतरा ज्यादा होता है.
  • कुछ मामलों में देखा गया है कि अगर परिवार के किसी व्यक्ति की मौत ह्दय रोग कारण हुई है. तो यह बीमारी आनुवांशिक रूप से अगली पीढ़ी के लोगों को होने के चांसेज होते हैं. ऐसे परिवारों को कम से कम दो साल में एक बार टीएमटी और इको टेस्ट करवाना चाहिए.
  • दिल में जन्मजात छेद, ह्दय के वॉल का खराब होना और ह्दय की धमनियों में दिक्कत जैसी बीमारियों को वक्त रहते इलाज कराया जा सकता है.

ह्दय रोग के लक्षण

  • सीने में दर्द
  • सीने में खिंचाव जैसे महसूस होना
  • सांस फुलना
  • हाथ-पैर का ठंडा पड़ना
  • सीने में बाई तरफ दर्द होना
  • पसीना होना
Source- Nai Dunia

ह्दय रोग से बचाव

ह्दय रोग से बचने के लिए फिजिकल और मेंटल फिटनेस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. हार्ट अटैक से बचने के लिए रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चले, रनिंग, स्विंमिंग और साइकिलिंग करें. हालांकि अगर आप पहले से किसी ह्दय रोग से पीड़ित हैं तो वेट लिफ्टिंग और पुश अप्स जैसे एक्सरसाइज से बचें. दिमाग को चुस्त रखने के लिए योग करें.

अधिक से अधिक फलों और सब्जियों का सेवन करें. नास्ते में ड्राई फू्र्ट्स ले. दिन में कम से कम दो लीटर पानी पिए और फास्ड फूड खाने से बचें.

हार्ट अटैक से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें

  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक सबसे ज्यादा हार्ट अटैक आने के चांसेज सोमवार को होता है. दरअसल रविवार को छु्ट्टी होने के कारण लोग शनिवार रात से ही पार्टी और घूमने में व्यवस्त हो जाते हैं. वहीं जब छुट्टी खत्म होती है तो काम पर जाने के ख्याल से लोगों में तनाव बढ़ जाता है. इसे हॉली-डे सिंड्रोम कहते हैं.
  • दुनियाभर में हार्ट अटैक सबसे ज्यादा सर्दियों के मौसम में आता है.
  • तनाव और डिप्रेशन में रहने वाले लोगों में ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसे ही दिल टूटना कहते हैं. इसमें ह्दय का एक हिस्सा कमजोर हो जाता है.
  • महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के ह्दय का भार ज्यादा होता है. औसतन दिल का वजन 450 ग्राम होता है.
  • सबसे छोटा दिल फेयर फ्लाय नामक ततैया का होता है.
  • सबसे बड़ा और भारी दिल ब्लू व्हेल का होता है. इसके ह्दय का वजन 180 किलो है.
  • पहली ओपन हार्ट सर्जरी अमेरिका में 9 जुलाई साल 1893 में कार्डियोलॉजिस्ट डेनिअल विलिम्स ने की थी. चौंकाने वाली बात यह है कि उन्होंने यह सर्जरी बिना एक्सरे और एंटीबायोटिक्स के की.

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