क्या भारत में खत्म होने वाला है कोरोना का असर, क्या है WHO की चीफ साइंटिस्ट डाॅ. सौम्या स्वामीनाथन की राय

WHO की चीफ साइंटिस्ट डाॅक्टर सौम्या स्वामिनाथन ने कहा है भारत में कोरोना एंडेमिक (Endemic) की तरफ बढ़ रहा है. इस दौरान लोगों को संक्रमण तो होगा लेकिन कोरोना के फैलने की गति धीमी हो जाएगी. द वायर को दिए एक इंटरव्यू में डाॅक्टर सौम्या स्वामिनाथन ने कहा कि एंडेमिक के दौरान भी स्थिति अभी के जैसा ही रह सकती है लेकिन कोरोना के फैलने का स्तर लो से मोडरेट रहेगा.

इस दौरान कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने-घटने का सिलसिला जारी रहेगा. इसके अलावा हो सकता है कि देश के किसी में मरीजों की संख्या ज्यादा और किसी हिस्से में कम, ये पूरी तरह से वैक्सीनेशन और लोगों के प्राकृतिक इम्युनिटी पर निर्भर होगा. 

एंडेमिक का मतलब क्या होता है?

अमेरिका के सेंटर्स फाॅर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, एंडेमिक का मतलब है किसी देश या क्षेत्र में कोई बीमारी या संक्रमित करने वाला एजेंट उस देश या क्षेत्र के लोगों के बीच निरंतर बना रहेगा. 

वहीं 2020 में जर्नल साइंस में छपे एक लेख के अनुसार, जब कोई एपिडेमिक यानी महामारी एंडेमिक बन जाती है, तो आसानी से उसका सामना किया जा सकता  है. उस बीमारी से रक्षा के करने के लिए सरकार द्वारा अतिरिक्त सहायता करने की जरुरत नहीं पड़ती. हम उसे व्यक्तिगत स्तर पर निपट सकते हैं. 

dr soumya swaminathan
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महामारी के दौरान क्या स्थिति होती है?

यदि महामारी की बात करें तो महामारी के दौरान एक बीमारी अचानक अपेक्षा से कई गुना तेजी से फैलने लगती है, जिसे रोकना लगभग नामुमकिन होता है. पोलियो, प्लेग, रेबीज जैसी बीमारी इसके मुख्या उदाहरण है. जब ये बीमारीयां आई तब अचानक बहुत तेजी से लोगों के बीच फैलने लगी थी. उस वक्त इससे निपटने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था. 

कैसे तय किया जाता है कि किसी देश ने एंडेमिक में प्रवेश किया या नहीं? 

किसी देश या क्षेत्र की एंडेमिक की स्थिति उसकी जनसंख्या, भौगोलिक क्षेत्र और बीमारी के मामलों की संख्या पर आधारित होती है. एंडेमिक के दौरान सभी देशों में बीमारी की संख्या एक जैसी नहीं होती. 

उदाहरण के तौर पर भारत की आबादी लगभग 130 करोड़ है और एंडेमिक के दौरान यदि यहां प्रतिदिन मरीजों की संख्या निरंतर तौर पर 50,000 होगी, वहीं श्रीलंका जिसकी आबादी लगभग 2.5 करोड़ है, यदि वहां भी मरीजों की संख्या निरंतर तौर पर 50,000 होगी तो इसका मतलब उसने अभी एंडेमिक में प्रवेश नहीं किया है. 

क्योंकि दोनों देशों में मरीजों की संख्या भले ही भारत के समान 50,000 ही है लेकिन उसकी आबादी भारत की तुलना कई गुना कम है. इसके अलावा उसका भौगोलिक क्षेत्र भी भारत की तुलना बहुत कम है. इसलिए जो स्थिति भारत के लिए एंडेमिक होगी वो किसी और देश के लिए एंडेमिक नहीं होगी. किसी भी देश में एंडेमिक घोषित करने के लिए उसकी आबादी और भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार उसके मरीजों की संख्या में निरंतरता को देखा जाएगा.

कितने तरह का होता है कोरोनावायरस ?

SARS, MERS और 2019 में आई SARS-CoV-2 तीन तरह के कोरोनावायरस दुनिया में मौजूद है. ये तीनों तरह के कोरोनावायरस इंसान को गंभीर रुप से बीमार कर सकते हैं. इन तीनों में से दुनिया अभी SARS-CoV-2 या कोविड-19 से जुझ रही है. कोरोना के दूसरी लहर के दौरान हमने ये भी देखा कि ये कितनी तेजी से लोगों की जान ले सकता है. MERS को सऊदी अरब में ही नियंत्रित कर लिया गया था लेकिन अभी भी इसके मामले आते है. वहीं SARS का आखिरी मामला 2003 में आया था. 

भारत और अन्य देशों के लिए क्या है एंडेमिक के मायने ?

इस साल साइंस मैगजीन में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि अगले कुछ सालों में SARS-CoV-2 यानी कोविड-19 कमजोर पड़ जाएगा और इसके वायरल होने की शक्ति बहुत कम हो जाएगी. आने वाले सालों में ये दूसरो कोरोनावायरस के जैसा ही हो जाएगा. लोग इससे संक्रमित तो होंगे लेकिन उन्हें गंभीर बीमारी का सामना नहीं करना पड़ेगा. इस वायरस से संक्रमित होने के बाद लोग को ज्यादा से ज्यादा सर्दी, बुखार जैसी बीमारी होगी.

क्या है इस वायरस के कमजोर होने के कारण?

स्टडी के अनुसार, SARS-CoV-2 जैसा वायरस अपने सभी को होस्ट्स नहीं मारता. यदि आसान भाषा में कहें तो, किसी भी वायरस को जीवित रहने के लिए एक होस्ट की जरुरत पड़ती है. वर्तमान में इस वायरस का होस्ट मानव शरीर है. यदि मानव शरीर जीवित रहेगा तभी ये वायरस भी जीवित रह पाएगा. इसलिए भविष्य में जितने लोग इस वायरस से संक्रमित होंगे या उनका वैक्सीनेशन हो जाएगा, इससे लोगों की मौत होनी भी बंद हो जाएगी. हालांकि इसके बावजूद ये लोगों को संक्रमित करता रहेगा.

कुछ अन्य कारण जिन पर एंडेमिक या इस वायरस के कमजोर होना निर्भर करता है

यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि भारत या दुनिया में कोविड -19 कब तक एंडेमिक हो जाएगा. अभी भी कई लोग कोरोना संक्रमण का शिकार हो रहें हैं लेकिन वैक्सीनेशन की प्रक्रिया जारी है. जिसके वजह से लोगों में धिर-धिरे इम्युनिटी विकसित हो रही है. कई लोगों में पहले ही कोरोना संक्रमण के कारण प्रकृतिक रुप से एंटी बाॅडी विकसित हो चुकी है. 

WHO की कोविड-19 डैशबोर्ड के अनुसार, 26 अगस्त तक दुनिया भर में 21,37,52,662 कोरोना के मामले सामने चुके हैं. वहीं 44,59,381 लोगों की इससे मृत्यु भी हो चुकी है. वैक्सीनेशन की बात करें तो Ourworldindata के अनुसार, वैक्सीन के 5.13 बिलियन डोज लोगों को लगाए जा चुके हैं और विश्व की 33 प्रतिशत विश्व की आबादी को कम से कम पहली डोज दी चुकी है. बता दें कि पूरी दुनिया की आबादी लगभग 7 बिलियन है. ऐसे में मात्र 33 प्रतिशत लोगों को ही पहली डोज लगना थोड़ी चिंताजनक है. ये संख्या जरुरी वैक्सीनेशन से बहुत कम है. 

इसके अलावा 5 बिलियन वैक्सीन की डोज ज्यादातर अमीर देशों की आबादी को ही लगाई गई है. Ourworldindata के अनुसार, गरीब या कम आय वाले देशों की मात्र 1.6 प्रतिशत आबादी को ही वैक्सीन की पहली डोज लगी है. जिसका मतलब यह है कि गरीब या कम आय वाले देश अमीर देशों के मुकाबले वैक्सीनेशन में बहुत पीछे हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि वे वैक्सीन के लिए COVAX जैसे कार्यक्रमों पर निर्भर हैं.

इसका मतलब ये है कि अभी वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है. इसके अलावा कई लोग वैक्सीन लगवाने से भी डर रहें हैं. यदि हम जल्द से जल्द से एंडेमिक की तरफ बढ़ना चाहते हैं तो वैक्सीनेशन की गति को बढ़ाना होगा साथ में लोगों को भी जागरुक करना होगा कि वे जाकर वैक्सीन लगवाएं.

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