भारत में बढ़ रहा डेंगू का खतरा, जानिए इसके लक्षण, बचाव और इलाज

भारत के कई राज्यों में इन दिनों वायरल फीवर और डेंगू के मामले रोज बढ़ रहे हैं. दिल्ली में इस साल डेंगू के 124 मामले मिले. वहीं पिछली साल दिल्ली में डेंगू के केवल 96 मामलों की पुष्टि हुई थी. उत्तर प्रदेश में रहस्यमयी बुखार के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. यूपी का फिरोजाबाद जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है. यहां डेंगू और बुखार के कारण 430 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं. अगर केरल की बात करें तो राज्य में कोविड-19 और जीका के बाद निपाह वायरस ने पांव फैलाना शुरू कर दिया है.

बच्चों को डेंगू का खतरा

साल 1996 में दिल्ली व उत्तर भारत में डेंगू के कारण लाखों लोग प्रभावित हुए थे. डेंगू से वयस्कों के मुकाबले बच्चों को ज्यादा खतरा है. यह बीमारी यूरोप को छोड़कर पूरे विश्व में होती है. एक अनुमान के मुताबिक हर साल 2 करोड़ लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं.

डेंगू कैसे फैलता है

मलेरिया की तरह ही डेंगू भी मच्छरों के काटने से फैलता है. इन मच्छरों को एडीज मच्छर कहते हैं. भारत में डेंगू रोग बरसात के मौसम में सबसे अधिक होता है क्योंकि जुलाई से लेकर अक्टूबर के बीच एडीज मच्छर आसानी से पनपते हैं.

डेंगू तीन प्रकार का होता है क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार, डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF) और डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) इन तीनों में सबसे खतरनाक DHF और DSS को माना जाता है. आमतौर पर ‘डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार’ भी कहा जाता है.

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Source- The Jakarta Post

डेंगू के लक्षण

डेंगू के लक्षण माइल्ड और ज्यादा दोनों हो सकता है. कई बार डेंगू के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं. हालांकि संक्रमित व्यक्ति में चार से सात दिन के भीतर लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

  • डेंगू में सिरदर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • उल्टी
  • जी मिचलाना
  • आंखों में दिक्कत
  • शरीर पर चकत्ते पड़ना
  • सूजन
  • सांस लेने में दिक्कत थकान

हालांकि गंभीर मामलों में Dengue Haemorrhagic Fever होने का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान ब्लड में प्लेटलेट्स में कमी हो जाती है और रक्त वाहिकाएं डेमेज हो जाती हैं.

डेंगू की जांच

डेंगू की शुरुआती जांच एंटीजन ब्लड टेस्ट के जरिए किया जाता है. इसके अलावा एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरॉली) के जरिए भी डेंगू का पता लगाया जाता है. डेंगू की जांच के दौरान किसी मरीज में मौजूद प्लेटलेट्स और वाइट ब्लड सेल्स काउंट किया जाता है.

बच्चों को ज्यादा खतरा

डेंगू से ज्यादा खतरा बच्चों को है. बच्चों की इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होती है और वह ज्यादात्तर खुले स्थानों में रहते हैं. बच्चों को डेंगू से बचाने के लिए उन्हें घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेंजे इसके अलावा साफ-सुथरी जगह पर खेलने भेजे.

डेंगू से बचने के उपाय

  • अपने घर के आस-पास पानी एकत्रित न होने दे.
  • गड्ढ़ों को मिट्टी से भर दे.
  • नालियों को साफ करते रहें.
  • कूलर और पौधों के पानी समय-समय पर बदलते रहें.
  • पानी की टंकी को ढक कर रखें.

डेंगू का इलाज क्या है

डेंगू की कोई खास दवा नहीं है. डॉक्टर बुखार और दर्द के लिए सामान्य पेनकिलर देते हैं और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह देते हैं. हालांकि डेंगू के गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है. ऐसे मरीजों को Intravenous fluid या इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट दिया जाता है.

बुखार होने पर सिर्फ पैरासिटामोल (क्रोसिन, कैलपोल) लें. एस्प्रिन (डिस्प्रिन, इकोस्प्रिन) या एनॉलजेसिक (ब्रूफिन, कॉम्बिफ्लेम) बिल्कुल न लेंने से बचें क्योंकि यह दवाएं प्लेटलेट्स को कम कर देती हैं.

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