World Organ Donation Day : अंगदान से एक व्यक्ति बचा सकता है आठ लोगों की जान, भारत में क्या है अंगदान पर कानून

दुनिया भर में हजारों लोगों को हृदय, लीवर, किडनी, आंख, फेफड़े जैसे कई महत्वपूर्ण अंगों की सख्त जरुरत पड़ती है. लोगों में जागरूकता की कमी के कारण इन जीवन रक्षक अंगों का लोग दान नहीं करते, जिससे इनकी मांग की आपूर्ति नहीं हो पाती है. इसलिए हर साल 13 अगस्त को विश्व अंग दान दिवस के जरिए लोगों को इसके महत्व को बताया जाता है. उन्हें इसके प्रति जागरूक कर ज्यादा से ज्यादा लोगों को उनके मरने पर अंग दान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. यदि अधिक से अधिक लोग अंग दान के लिए आगे आएंगे, तो ऑर्गन फेल्योर से जान गंवाने वाले कई लोगों को बचाया जा सकता है. 

अंगदान से एक व्यक्ति बचा सकता है 8 लोगों की जान

हालांकि विश्व अंग दान दिवस 13 अगस्त को मनाया जाता है लेकिन भारत हर साल 27 नवंबर को अपना राष्ट्रीय अंगदान दिवस मनाता है. इस दिन सरकार भारतीय नागरिकों को स्वेच्छा से अपने अंग दान करने और लोगों के जीवन बचाने के लिए प्रोत्साहित करती है. डाॅक्टर्स के अनुसार, एक व्यक्ति अपने हृदय, फेफड़े, किडनी, बोन मैरो इत्यादि जैसे अंगों का दान देकर इस तरह की बीमारीयों से जूझ रहे कम से कम आठ लोगों की जान बचा सकता है. 

1954 में हुआ था पहला सफल ट्रांसप्लांटेशन

आधुनिक चिकित्सा में विकास ने एक व्यक्ति के अंगों को से दूसरे व्यक्ति में ट्रांसप्लांट करना संभव बना दिया है. अंगों का  पहला सफल ट्रांसप्लांटेशन 1954 में किया गया था. अमेरिका के रोनाल्ड ली हैरिक ने अपने जुड़वा भाई के लिए अपनी किडनी दान दी थी. डॉक्टर जोसेफ मरे ने ऑपरेशन कर यह ट्रांसप्लांटेशन किया था, जिसके लिए 1990 में उन्हें मेडिसिन और फिजियोलाॅजी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था.  

Organ Donation
Organ Donation

किडनी दान देकर नवजात बच्चा बना था सबसे कम उम्र का अंगदाता

2015 में एक नवजात बच्चे ने अपनी किडनी दान देकर दुनिया का सबसे कम उम्र का अंगदाता बना. वो बच्चा जन्म लेने के बाद मात्र 100 मिनट तक जीवित रहा था. वहीं 2016 में स्काॅटलैंड के 107 साल के एक वृद्ध व्यक्ति मृत्यु के बाद अपनी कोर्निया का दान देकर विश्व के सबसे उम्रदराज अंगदाता बने. इसके अलावा वेस्ट वर्जिनिया के एक 95 साल के वृद्ध ने मृत्यु के बाद अपने लीवर का दान देकर आतंरिक अंगों को दान देने वाले विश्व के सबसे उम्रदराज व्यक्ति बने थे.

अंगदान के लिए भारत में क्या है नियम

भारत में अंग दान को रेगुलेट करने के लिए ‘ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्युमन ऑर्गन एंड टिश्युज’ एक्ट बनाया गया है. यह कानून जीवित और मृत दोनों व्यक्तियों को अंगदान की अनुमति देता है. किसी भी उम्र के लोग जरुरतमंद लोगों को अंगदान करने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. 

कौन व्यक्ति कर सकता है अंगदान

यदि कोई अंगदाता 18 साल से कम उम्र का है, तो उन्हें अंगदान के रजिट्रेशन के लिए माता-पिता की सहमति की आवश्यकता पड़ती है. यदि कोई व्यक्ति मरने के बाद अपने अंगों का दान करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाता है, तो उस व्यक्ती के मृत्यु के बाद उसकी मेडिकल जांच की जाती है. जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि उस व्यक्ति का कौन सा अंग दान करने योग्य है. इस तरह के दान को ‘कैडेवर डोनशन’ के नाम से जाना जाता है. 

भारत में 0.01 प्रतिशत करते हैं मरने के बाद अंगदान

भारतीय कानून के अनुसार जीवित व्यक्ति भी अपना अंगदान कर सकता है लेकिन जीवित व्यक्तियों के द्वारा अंग दान किडनी और लीवर जैसे कुछ अंगों तक ही सीमित है. एक इंसान के पास दो किडनी होती है लेकिन वो एक किडनी पर भी जीवित रह सकता है. इसी तरह से यदि किसी व्यक्ति के लीवर का कुछ हिस्सा काट कर दान में दे दिया जाए तब भी वह जीवित रह सकता है, क्योंकि लीवर में फिर से बढ़ने की क्षमता होती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार, भारत में मरने के बाद 0.01 प्रतिशत लोग अपने अंगों का दान करते हैं. 

कौन नहीं कर सकता अपना अंगदान

कुछ खास तरह की बीमारियों से गुजरने पर एक व्यक्ति अपने अंगों का दान नहीं कर सकता है. जैसे कि यदि कोई व्यक्ति एचआईवी, कैंसर या कुछ अन्य गंभीर संक्रमण वाली बीमारियों से पीड़ित है, तो वे लोग मृत्यु के बाद अपना अंगदान नहीं कर सकते हैं.