Zika Virus: जीका वायरस कैसे फैलता है, जीका वायरस के लक्षण और इलाज क्या है?

जीका वायरस इंफेक्शन के तेजी से बढ़ते मामले चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहें हैं. फिलहाल इसके मामले यूपी के कानपुर में ही देखने को मिले हैं. कानपुर में अभी तक 100 से अधिक लोग इस वायरस के चपेट में आ चुके हैं. इनमें 17 बच्चे भी शामिल हैं. हालांकि यह वायरस दुनिया या भारत में नया नहीं है. इसी साल जुलाई के महीने में इसके कुछ मामले केरल में और अगस्त में महाराष्ट्र के पुणें में भी देखने को मिले थे. 

क्या आप जानते हैं कि इस वायरस की उत्पत्ति कब और कैसे हुई थी? किस देश में यह सबसे फैला? यह वायरस कैसे फैलता है और इसके क्या लक्षण हैं? इस वायरस के लक्षण हैं और इसका क्या इलाज है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ें ये पूरी खबर….

Zika Virus की उत्पत्ति के बारे में जानने से पहले आइए इसके बारे में जानते हैं.

क्या है Zika Virus

जीका वायरस(Zika Virus) का संबंध फ्लेविविरिडे या फ्लेविवायरस (Flavivirus) के समूह से है. यह वायरस ज्यादातर एडीज इजिप्ती (Aedes aegypti) और एडीज एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus) जैसे मच्छरों में पाया जाता है. एडीज इजिप्ती और एडीज एल्बोपिक्टस मच्छरों की एक प्रजाति है. ये वही मच्छर हैं जो डेंगू (Dengue), चिकगुनिया (Chikungunya) और पिली बुखार (Yellow Fever) जैसी खतरनाक बीमारियां भी फैलाते हैं. 

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कैसे फैलता है

जीका वायरस का इंफेक्शन मादा मच्छरों के काटने से फैलता है. जब एडीज इजिप्ती या एडीज एल्बोपिक्टस प्रजाति की मादा मच्छर जीका वायरस से संक्रमित होती है और किसी इंसान को काटती है तो यह वायरस संचारित होकर इंसानों के शरीर में फैल जाता है. 

इस वायरस को मुख्य रुप से एडीज इजिप्ती प्रजाती के मच्छरों में पाया जाता है. ये मच्छर आमतौर पर दिन के समय काटते हैं लेकिन भोर और शाम के समय इनका प्रकोप चरम पर होता है.

संक्रमण के अन्य स्त्रोत

आपको बता दें कि गर्भावस्था में भी जीका वायरस को फैलते हुए देखा गया है. गर्भ के दौरान यह वायरस गर्भवती महिला के भ्रूण (Foetus) से होकर शिशु तक पहुंचता है, जिससे बच्चे में कुछ जन्मजात विकृतियां होने की संभावना हो सकती है. 

Zika Virus Affect
Microcephaly (Image Source : Twitter)

जैसे कि जन्म के समय बच्चे का सर सामान्य से छोटा हो सकता है. इस अवस्था को माइक्रोसिफेली (microcephaly) कहते हैं. इसके अलावा बच्चे में जीका सिंड्रोम भी होने का खतरा रहता है.

इसके अलावा यह वायरस रक्तदान, सेक्स, और अंग प्रतिरोपण (Organ Transplantation) दौरान भी किसी इंसान के भीतर संचारित हो सकता है. 

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क्या हैं इसके लक्षण

जीका वायरस के संक्रमित होने के बाद कई तरह के लक्षण देखने को मिल सकते हैं. आमतौर पर इसमें व्यक्ति को हल्का बुखार, शरीर पर दाने, कंजंक्टिवायटिस (Conjunctivitis), मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द या सिरदर्द हो सकता है. आमतौर पर जीका वायरस संक्रमण वाले अधिकांश लोगों में लक्षण विकसित नहीं होते हैं.

Zika Virus Symptoms Rashes
Zika Virus Symptoms Rashes (Image Source : Wikipedia)

क्या है इसका इलाज 

अभी तक जीका वायरस के इलाज के लिए किसी तरह की दवा या टीके का निर्माण नहीं हो पाया है. हालांकि इस वायरस से संक्रमित ज्यादातर मरीज बिना किसी खास इलाज के ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन संक्रमित मरीज को बुखार और शरीर में होने वाले विभिन्न प्रकार के दर्दों के लिए Acitaminophen नाम की दवा दी जाती है.

इस वायरस से संक्रमित मरीजों के लिए जरुरी है कि वे ज्यादा से ज्यादा से आराम करें और शरीर को डीहाईड्रेशन से बचाने के लिए तरल पदार्थ जैसे ORS घोल लेते रहें.

क्या हैं इसके बचाव

जीका वायरस के संक्रमण का एक मुख्य कारण एडीज प्रजाति के मच्छरों का पनपना और प्रजनन करना है. इसलिए हम यदि उनके पनपने और प्रजनन करने के स्त्रोत को रोक दें इस वायरस से बचा जा सकता है. 

मच्छरों के प्रजनन में कमी के लिए हमें घर में पड़े कंटेनरों को खाली, साफ या कवर करके रखना चाहिए. यह ध्यान देना चाहिए कि किसी भी तरह से उनमें पानी न जमे. 

इसके अलावा बाल्टी, फूल के गमले या टायर जैसे चीजों जहां पानी अधिक दिनों तक पानी जमा होने की संभावना रहती है, उनमें पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छर ना पनपे. साथ ही कीटनाशकों का छिड़काव करते रहना चाहिए.

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Zika Virus की उत्पत्ति

यह वायरस इस दुनिया के लिए नया नहीं है. इसे हमारी दुनिया में आए 74 साल हो गए हैं. जीका वायरस को सबसे पहले 1947 में युगांडा के जीका जंगल में रेसस बंदरों में पाया गया था. बता दें कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक देश है. 

और रेसस बंदरों की एक प्रजाति है जो मुख्य रुप से एशिया में पाई जाती है. क्योंकि पहली बार ये युगांडा के जीका नामक जंगल में पाए गए इसलिए इस वायरस का नाम जीका वायरस रख गया. 

पहली बार इंसानों में

अपने उत्पत्ति के बाद पांच सालों तक यह वायरस जंगल और जानवरों तक ही सीमित था. लेकिन साल 1952 में युगांडा में ही इसे इंसानों में पाया गया. 1960 से 1980 के बीच धीरे-धीरे यह वायरस युगांडा से निकलकर पहले पूर्वी अफ्रीका और फिर पूरे पश्चिम अफ्रीका में फैल गया. 

इसके बाद 70 के दशक के अंत तक यह एशिया में भी पहुंच गया. 1966 में मलेशिया में एडीज इजिप्ती मच्छरों में इस वायरस के संक्रमण को पाया गया. 1969 से 1983 के बीच पूरे एशिया में धीरे-धीरे फैलता रहा. 

हालांकि 1952 में इस वायरस का संक्रमण इंसानों में हो गया था लेकिन 2007 तक ये वायरस मुख्य रुप से जानवरों में ही सीमित रहा. 1952 से 2007 तक इंसानों में जीका वायरस के केवल 15 मामले पाए गए थे.

Zika Virus की पहली महामारी

इस वायरस ने 2007 तक कुछ ज्यादा नुकसान नहीं किया था. लेकिन 2007 में इस वायरस की पहली महामारी सामने आई. याप द्वीप (Yap Island) की लगभग 73 प्रतिशत आबादी इसकी चपेट में आ गई थी.

यह द्वीप दक्षिण एशिया देशों में आता है, जो पश्चिमी प्रशांत महासागर ( West Pacific Ocean) में बसा हुआ है. 2010 के जनगणना के अनुसार इस द्वीप की आबादी लगभग 12 हजार थी. 

इसके साथ ही 2008 में यौन संबंध बनाने से इस वायरस के संक्रमण का पहला मामला भी सामने आया. 

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दूसरी महामारी

इसके बाद इस वायरस की दूसरी महामारी 2013-15 के दौरान आई. इस दौरान जीका वायरस का संक्रमण फ्रेंच पाॅलिनेशिया, ईस्टर और कैलीडोनिया में फैला. इसके बाद यह वायरस तेजी से दक्षिण अमेरिका, मध्य अमेरिका, मैक्सिको और कैरिबियन हिस्सों में फैल गया.

इन सभी देशों के बाद इस वायरस ने ब्राजील में अपना कहर बरपाया. जहां 2015 से 2017 के बीच महामारी के दौरान माइक्रोसेफली के कुल 2,639 मामले सामने आए.

इतनी बड़ी संख्या में जीका वायरस के मामलों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के लिए चिंता का कारण बन गया. जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 1 फरवरी 2016 को इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया.

भारत में इसकी पहुंच

अफ्रीका, कैरिबियन और दक्षिण अमेरिका के देशों में फैलने के बाद यह वायरस 2017 में भारत पहुंचा. हालांकि जीका वायरस एशिया में पहले ही आ चुका था. लेकिन भारत में इंसानों में इसका पहला मामला गुजरात के अहमदाबाद में सामने आया. 2018 में भी राजस्थान और बिहार समेत कई राज्यों में जीका वायरस के केस रिपोर्ट किए गए. 

इस साल जुलाई में पहले केरल और अगस्त में महाराष्ट्र के पुणे में इसके कई मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं. वहीं हालिया प्रकोप की बात करें तो 23 अक्टुबर को कानपुर जीका वायरस का पहला मामला एक महिला में पाया गया था.

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