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जब इजराइल के खुफिया एजेंसी मोसाद ने आतंकियों को ढूंढ-ढूंढ के मारा

'Operation Wrath of GOD' Part-2 :

इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद गोल्डा मेयर को बताती है की ये आतंकी हमला पीएलओ यानी फिलिस्तीनी लिबरेशन आर्गेनाइजेशन से ही अलग हुए एक नए आतंकी संगठन BLACK SEPTEMBER ने प्लान किया था और हमने उन सारे आतंकियों की लिस्ट तैयार कर ली है जो भी इसमें शामिल थे.

Golda Rache

“ऑपरेशन रैथ ऑफ़ गॉड”  ने भरी हुंकार

ये इस वक्त पूरी दुनियां में कहीं भी छिपे हो सकते हैं पर हम तैयार है ऑपरेशन रैथ ऑफ़ गॉड के लिए, आप परमीशन दें. मेयर कुछ देर सोचती हैं और फिर कहती हैं “सेंड योर बॉयज” और इसके साथ ही एक्ज़िक्यूशन में आता है “ऑपरेशन रैथ ऑफ़ गॉड” जिसे “ऑपरेशन बायोनेट” के नाम से भी जाना जाता है।

Black September

कमेटी X का गठन हुआ 

प्रधानमन्त्री की अध्य्क्षता में एक खूफिया टीम बनायीं गयी जो पूरे ऑपरेशन पर नज़र रखेगी और साथ ही तय करेगी की मोसाद को कब और क्या करना है. कमेटी X के बाद मोसाद को भी तीन टीमों में बांटा गया था. पहली टीम में कुछ 7- 8 लोग थे जो टारगेट(आतंकवादी) का पता लगाकर सुनिश्चित करते थे की वो शख्स वही है जिसकी उन्हें तलाश है.

उसके बात अपनी बाकि टीमों के लिए उस जगह पर रहने और बाकि चीज़ों का इंतज़ाम करते थे. इसके बाद दूसरी टीम में 2 लोग होते थे जो मोसाद के शार्प शूटर या यूं कहें की हत्या में माहिर टीम जिसका नाम किडेन है को कवर देने का काम करते थे.

कमेटी X

शुरुआत होती है वेल ज्वेटर से 

वेल ज्वेटर

वेल ज्वेटर जो की इज़राइल के अनुसार रोम में पीएलओ का प्रमुख था. वेल ज्वेटर को तब 12 गोलियां मार दी जाती है जब वो डिनर के बाद अपने अपार्टमेंट में लौट रहा था. इज़राइल का मकसद सिर्फ हत्या का बदला लेना नहीं था बल्कि एक पूर्व मोसाद अधिकारी के अनुसार वे उनमें खौफ भर देना चाहते थे.

डॉ महमूद हमशारी

इसके बाद जनवरी 1973 में मोसाद का दूसरा टारगेट बनता है डॉ महमूद हमशारी जिसे उसके अपार्टमेंट में बम से उड़ा दिया जाता है जब वो एक इंटरव्यू देकर लौटता है ये घटना पेरिस में होती है.

मोसाद का लास्ट टारगेट अली हसन सलामेह  

मोसाद की लिस्ट में जो नाम सबसे ऊपर था वो था सलामेह का जिसको मारने की लगभग 5 नाकाम कोशिशें की गई जिसमे कई निर्दोष लोगो की जान तो गई ही साथ ही मोसाद के भी कुछ एजेंट्स को जान गवानी पड़ी पर आखिरकार  22 जनवरी 1979 की दोपहर करीब 3 बजकर 35 मिनट पर मोसाद की मुराद पूरी हो गई.

सलामेह के उड़ा दिए गए चीथड़े

जब सलामेह अपने चार बॉडीगार्ड के साथ अपनी कार में आया तो एक धमाका हुआ और वो मारा गया. इस पूरे ऑपरेशन में कई लोगो की हत्या की गई जिसमे ज्यादातर को बम से उड़ाया गया था पर कुछ को गोली भी मारी गई थी और ख़ास बात ये थी की जिसे भी गोली मारी गई उसे 12 गोलियां मारी गई जिसको इज़राइल के 12 खिलाडियों को श्रद्धांजलि के तौर पर देखा गया. 

‘याद रखना हम न तो भूलते हैं न ही माफ करते हैं.’

ब्रिटिश इंटेलिजेंस लेखक गॉर्डन थॉमस कहते हैं कि हर आतंकी की हत्या से कुछ घंटे पहले उसके परिवार के पास फूल भेजे जाते थे, जिसमें एक कंडोलेंस कार्ड भी होता था, जिसमें लिखा रहता था, ‘याद रखना हम न तो भूलते हैं न ही माफ करते हैं.’
थॉमस बताते हैं कि हर हत्या के बाद मोसाद मध्यपूर्व के अरबी भाषा के अखबारों को इसकी पूरी जानकारी लीक कर देता था.

आपको  Operation Wrath of God  के बारे में और ज्यादा जानकारी साइमन रीव की किताब One Day in September से मिल जाएगी

ये भी पढ़ें: – पढ़िए “Operation Wrath of GOD” का पहला भाग यहाँ

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