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रेडियो की कैसे हुई शुरुआत, कैसे लोंगो के दिलों मे आज भी जिंदा है रेडियो?

रेडियो के बारे में ये बाते कोई नहीं जानता

साल 1918 में पहली बार रेडियो पर आवाज सुनाई दी थी. साइंस के वजह से हम अपने बहुत से काम आसानी कर सकते हैं. एक ओर जहां साइंस लगातार दुनिया को बदल रही है तो दुसरी तरफ ये कई ऐसे टेक्नोलॉजी को दुनिया से खत्म भी कर रही हैं. और रेडियो उनमें से एक है.

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स्मार्टफोन, टीवी, कंप्यूटर व इंटरनेट की दुनिया में आज भी रेडियो की जगह कोई नहीं ले सकता है. तकनीक के इस तूफान में रेडियो का दीया जलता रहा. मोबाइल फोन में रेडियो सुनने की सुविधा आ जाने इसे फिर से नया जीवन मिल गया. आइये जानते है आज तक का रेडियो का सफर.

1. साल 1918 में ली द फोरेस्ट ने न्यूयॉर्क के हाईब्रिज इलाके में दुनिया का पहला रेडियो स्टेशन शुरु किया था. एक साल बाद ही ली द फोरेस्ट ने 1919 में सैन फ्रैंसिस्को में एक और रेडियो स्टेशन शुरु किया.

2. साल 1920 में फ्रैंक कॉनार्ड को दुनिया में पहली बार कानूनी तौर पर रेडियो स्टेशन शुरु करने की अनुमति मिली. कुछ ही सालों में देखते ही देखते दुनिया भर में सैकड़ों रेडियो स्टेशनों ने काम करना शुरु कर दिया गया. साल 1923 में रेडियो पर विज्ञापन की शुरुआत हो गई थी.

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3. भारत में 1936 में सरकारी ‘इम्पिरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ की शुरुआत हुई जो आजादी के बाद ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी बना. दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत होने पर भारत में भी रेडियो के सारे लाइसेंस रद्द कर दिए गए और ट्रांसमीटरों को सरकार के पास जमा करने के आदेश दे दिए गए.

4. ‘इम्पिरियल रेडियो ऑफ इंडिया’ ने ही गांधी जी का भारत छोड़ो का संदेश, मेरठ में 300 सैनिकों के मारे जाने की खबर, कुछ महिलाओं के साथ अंग्रेजों के दुराचार जैसी खबरों का प्रसारण किया.

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5. आजादी के बाद 16 नवंबर 2006 तक रेडियो केवल सरकार के अधिकार में था. धीरे-धीरे आम लोंगो के पास रेडियो की पहुंच के साथ इसका विकास हुआ.

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