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ये हैं भारतीय वायुसेना की तीसरी आंख, इनसे बच पाना है नामुमकिन

भारतीय वायुसेना के ये ड्रोन करते हैं दुश्मन की नींद हराम

भारतीय वायुसेना ने मंगलवार को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठीकानों पर 1000 किलो बम गिराकर उसे नेस्तनाबूद कर दिया है. इसके लिए वायुसेना ने मिराज-2000 फाइटर जेट का इस्तेमाल किया है. मिराज 2000 विमान बहुउद्देश्यीय चौथे जेनरेशन के फाइटर हैं. इसे फ्रांस की राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने बनाया है.

रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऑपरेशन में सेना ने Netra AEW&C और Heron ड्रोन का इस्तेमाल किया. मालूम हो कि वर्तमान समय में ड्रोन भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं. यह जंग में प्लानिंग करने, अटैक करने और एक ऑब्जर्वर के तौर पर हमारी मदद करते हैं. चलिए जानते हैं कुछ कमाल के ड्रोन्स के बारे में.

हेरोन

बता दें कि IAI Heron (Machatz-1) इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के Malat डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है. यह एक मध्यम-ऊंचाई वाला और लंबे समय तक चलने वाला मानव रहित हवाई वाहन यानि कि UAV है. यह 10.5 किलोमीटर तक़रीबन 35,000 फीट की ऊंचाई पर 52 घंटे तक उड़ सकता है.

हार्पी

बता दें इसे भी इजराइल ने ही बनाया है जिसे भारतीय सेना इस्तेमाल करती है. इसकी खास बात यह है कि ये विस्फोटक ले जाने के साथ-साथ रडार सिस्टम को भी नष्ट कर सकता है. दरअसल इसे रडार सिस्टम पर हमला करने के लिए बनाया गया है. आपको बता दें कि हार्पी को दक्षिण कोरिया, तुर्की, भारत और चीन सहित कई विदेशी देशों को बेचा गया है.

AEW&C

DRDO की ओर से कैरियर जेट के रूप में बनाए गए एयरबॉर्न अर्ली वॉर्निंग और कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम भी बेहद खास है. दरअसल यह भारतीय वायुसेना को एयरबॉर्न सर्विलांस सिस्टम देता है. बता दें कि इसे पूरी तरह से घरेलू टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म EMB-145 का इस्तेमाल कर बनाया गया है.

निशांत

यह भी DRDO द्वारा निर्मित है. दरअसल निशांत एक मानव रहित हवाई वाहन यानि कि UAV है जिसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए DRDO एक शाखा ADE ने विकसित किया है. बता दें कि निशांत को मुख्य रूप से दुश्मन के इलाके में खुफिया जानकारी एकत्र करने, प्रशिक्षण, निगरानी, आर्टिलरी फायर करेक्शन, डैमेज असेसमेंट, ELINT और SIGINT के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

 

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