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इंडियन आर्मी में होते हैं कौन से रैंक, जानिए यहां

भारतीय थल सेना यानी इंडियन आर्मी का हम और आप सब बेहद सम्मान करते हैं. अधिकारियों को उनकी वर्दियों में देखना बेहद खास अहसास दिलाता है. सेना के अधिकारियों की कई रैंक तो हमें पता होती हैं, लेकिन इनका सही क्रम हमें नहीं पता होता. आज आपको बताते हैं भारतीय सेना में मौजूद अधिकारियों और उनके रैंक के बारे में. 

1. फील्ड मार्शल – थल सेना में सबसे ऊंचा रैंक फील्ड मार्शल का होता है. यह अधिकारी नियमित नहीं होते और आमतौर पर यह रैंक सेना के जनरल को सेरिमोनियल रूप में दिया जाता है. युद्ध में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए भी सेना के जनरल को ये रैंक दिया जाता है. भारतीय थल सेना के इतिहास में के एम करियप्पा और सैम मानेकशॉ ही ऐसे दो जनरल रैंक के अधिकारी रहे जिन्हें फील्ड मार्शल बनाया गया.

कमिशंड ऑफिसर – 

2. जनरल – आधिकारिक तौर पर जनरल भारतीय थल सेना के उच्चतम अधिकारी की रैंक होती है जिन्हें कमांडर-इन-चीफ भी कहा जाता है. मौजूदा समय में जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष हैं. जनरल का रैंक 4-स्टार रैंक होता है और अधिकारी की वर्दी की कॉलर पर भी 4-स्टार लगे होते हैं.

3. लेफ्टिनेंट जनरल – सेना में जनरल के बाद का रैंक लेफ्टिनेंट जनरल का होता है जो 3-स्टार ऑफिसर होता है. इस रैंक पर गिनती के ही अधिकारी होते हैं. आर्मी के डेप्युटी चीफ का रैंक भी यही होता है साथ ही अलग-अलग कमांड के कमांडिग ऑफिसर भी इसी रैंक के होते हैं.

इंडियन आर्मी
courtesy-Indiatimes

4. मेजर जनरल – यह सेना में 2- स्टार अधिकारी होते हैं. 32 साल तक सेना में सेवा देने के बाद ही आप इस रैंक के लिए एलिजिबेल होते हैं.

5. ब्रिगेडियर – थलसेना का ये रैंक आम आदमी के बीच भी सबसे ज्यादा लोकप्रिय होता है. एक ब्रिगेड को संभालने वाले ब्रिगेडियर 1-स्टार रैंक अधिकारी होते हैं. कर्नल के रैंक के बाद ब्रिगेडिर के रैंक में प्रमोशन सेलेक्शन के आधार पर होता है. यानि आपके न्यूनतम 25 साल के सेवाकाल पर गौर किया जाता है और काम की क्वालिटी के आधार पर प्रमोशन मिलता है.

6. कर्नल – सेना में सीधे कमीशन प्राप्त करने वाले अधिकारी अगर पर्मनेंट कमीशन प्राप्त हैं तो कर्नल के रैंक तक प्रमोशन के जरिए पहुंचते हैं. इसके आगे के प्रमोशन को सेलेक्शन के आधार पर किया जाता है. कर्नल की वर्दी के कंधों पर एक अशोक चिन्ह और 2 स्टार होते हैं.

7. लेफ्टिनेंट कर्नल – यह रैंक प्राप्त करने के लिए 13 साल की सेवा करना अनिवार्य होता है. इस रैंक के अधिकारी के कंधों पर अशोक चिन्ह और एक स्टार होता है.

8. मेजर – मेजर का रैंक आर्मी में कम से कम 6 साल की सेवा के बाद दिया जाता है. इस रैंक के अधिकारी के कंधे पर अशोक चिन्ह होता है.

9. कैप्टन – सेना में 2 साल बतौर कमीशन्ड अधिकारी काम करने के बाद कैप्टन के रैंक पर प्रमोशन होता है. कैप्टन के कंधे पर 3 स्टार होते हैं.

10. लेफ्टिनेंट – यह भारतीय सेना में शुरुआती कमीशन्ड रैंक होता है. आईएमए, ओटीए जैसी अकादमियों में ट्रेनिंग के बाद जब युवा अधिकारी पास आउट होते हैं तो वो लेफ्टिनेंट ही बनते हैं.

जूनियर कमीशंड ऑफिसर – 

11. सुबेदार मेजर – यह रैंक जेसीओ अधिकारियों में सबसे बड़ा होता है. जेसीओ रैंक के सभी अधिकारियों के कंधे पर रैंक के चिन्ह के साथ ही एक रिबन भी होता है ताकि कमीशंड अधिकारियों से उनका अंतर दिख सके. इस रैंक के अधिकारी को रिटायरमेंट के समय हॉनरी लेफ्टिनेंट या फिर हॉनरी कैप्टन के तौर पर सेवानिवृत्त किया जाता है.

12. सुबेदार – भारतीय थलसेना में अधिकतर जूनियर कमीशंड अधिकारी इसी रैंक से रिटायर होते हैं. इस रैंक के अधिकारी के कंधे पर रिबन के साथ ही 2 स्टार भी होते हैं.

13. नायब सुबेदार – यह जेसीओ अधिकारियों में शुरुआती रैंक होती है. आमतौर पर नॉन कमीशंड अॉफिसर यानि सीधे भर्ती होने वाले अधिकारी प्रमोशन लेते हुए इस रैंक पर पहुंचते हैं.

Courtesy-The Indian Express

नॉन कमीशंड आफिसर – 

14. हवलदार – इस रैंक के अधिकारी आमतौर पर 26 साल की सेवा के बाद रिटायर होते हैं, अगर उन्हें इस दौरान जेसीओ रैंक पर प्रमोशन न मिले.

15. नाइक – इन अधिकारियों की वर्दी के बाजू पर दो वी-शेप की पट्टियां होती हैं.

16. लांस नाइक – इस रैंक के अधिकारी की वर्दी की बाजू पर 1 वी शेप पट्टी होती है.

सिपाही – 

17. सिपाही – अंग्रेजी में इस पद को सिपॉय लिखा जाता है. सेना में रैली के जरिए सीधे भर्ती होने वाले शख्स की तैनाती शुरुआत में इसी रैंक पर होती है.

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