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कहानी उस जादूगर की जिसने टीवी पर लाइव कत्ल कर दिया लेकिन लड़की जिंदा रही

भारत का ऐसा जादूगर जिसकी दिवानी थी दुनिया

तारीख 23 फरवरी. साल 1913. जगह थी बंगाल (अब बांग्लादेश). एक लड़का पैदा हुआ था. ये लड़का आगे चलकर जादू की दुनिया का सरकार कहलाया. नाम था पीसी सरकार. 1964 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार भी दिया गया. इस जादूगर की और भी विशेषता जानने से पहले एक बेहद ही दिलचस्प किस्सा पढ़ते चलिए

9 अप्रैल 1956 रात थी. टीवी पर रात 9 बजे एक शो चल रहा था- पैनोरामा. जादू का शो था. शो दिखाने वाले जादूगर थे पीसी सरकार. 17 साल की एक लड़की भी शो में थी. शो के मुताबिक जादूगर लड़की को अपने वश में कर लेता है. वश में करने के साथ ही जादूगर ने लड़की को एक टेबल पर लिटा दिया. लड़की पूरी तरह से शांत थी. बिना हिले डुले जादूगर के आदेश का पालन कर रही थी. चूंकि जादूगर ने लड़की को टेबल पर लेटने का आदेश दिया तो लड़की टेबल पर लेट गई. टीवी पर देखने वालों दर्शकों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर जादूगर लड़की के साथ क्या करने वाला है . थोड़ी ही देर में जादूगर ने लड़की को आरी की सहायता से दो टुकड़े करने शुरू कर दिए. टीवी देख रहे दर्शकों के मुंह से चीख निकल गई . सब कुछ लोगों के सामने हो रहा था .

जादूगर ने लोगों के सामने ही लड़की के दो टुकड़े कर दिए. लड़की के दो टुकड़े करने के बाद जादूगर लड़की को उठाने की कोशिश करने लगा लेकिन लड़की के शरीर में किसी भी प्रकार की हलचल नहीं हो रही थी.  अब टीवी देख रहे दर्शक और भी सन्न हो गए . क्या सचमुच में उन्होंने अपनी आंखों के सामने लाइव कत्ल होते देखा ? जब लड़की के शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो जादूगर ने एक काला कपड़ा लड़की के चेहरे पर डाल दिया . उसके अगले ही पल टीवी का प्रजेंटर आया, उसने कार्यक्रम के खत्म होने की घोषणा कर दी. हालांकि लड़की थोड़ी देर बाद खड़ी हो गई लेकिन लोगों को यकीन नहीं हुआ. एक अंग्रेजी टीवी के दफ्तर में लोगों के फोन घनघनाने शुरू हो गए. सबकी एक ही शिकायत थी कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने एक लड़की का कत्ल होते देखा है. इस जादू के बाद शो की लोकप्रियता आसमान तक पहुंच गई . इसी के साथ पीसी सरकार जादू की दुनिया के सबसे बड़े फनकार बन गए. हालांकि बाद में लोगों ने माना कि लड़की को मेज पर आरी से काटकर छोड़ देना हाथ की सफाई का बेहतरीन नमूना था.

गणित के स्टूडेंट थे पीसी सरकार

पीसी सरकार का जन्म बंगाल ( वर्तमान बांग्लादेश ) के टांगाइल जिले के अशेकपुर गांव में हुआ था. बचपन में नाम रखा गया – प्रोतुल चंद्र सरकार. स्कूल के शुरूआती दिनों में पढ़ाई में बेहद कुशाग्र थे. खासकर गणित में बहुत ज्यादा मेधावी थे. गणित की पढ़ाई अपनी जगह लेकिन जादूगरी में दिल लगाना दूसरी जगह. पीसी सरकार का मन जादूगर की दुनिया में ज्यादा बसता था. तो क्या बचपन से ही जादू सीखना शुरू कर दिया. बाद में पीसी सरकार ने क्लब, सर्कस और थियेटर में अपनी जादू का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. एक दिलचस्प बाद और भी है कि बाद के दिनों में सरकार में अपना नाम सरकार से बदलकर सॉरसर कर लिया जो कि अंग्रेजी भाषा के सॉरसरर यानी जादूगर की आवाज से मिलता जुलता था.

 

विदेश में भी छाया पीसी सरकार का जादू

पहली बार साल 1950 में पीसी सरकार को शिकागो में जादू दिखाने के लिए बुलावा आया. विदेश में स्टेज पर पहली बार शो दिखाया तो दर्शकों को उनका शो ज्यादा पसंद नहीं आया. हर किसी ने नकारात्मक फीडबैक दिया . बाद में पीसी सरकार पर विदेशी जादूगरों ने फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगा. लेकिन इसके बाद भी पीसी सरकार ने जादू दिखाना जारी रखा . सरकार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अपने जादू के कारनामों के बारे में लिखते रहते थे. इनमें शानदार तस्वीरें और पोस्टर हुआ करते थे. पीसी सरकार का शो इंद्रजाल जो भारत में काफी मशहूर हुआ, वो पहली बार 1955 में पेरिस में दिखाया था. धीरे-धीरे पीसी सरकार की ख्याति बढ़ती गई. ख्याति इतनी बढ़ी कि वो दुनिया के सबसे ज्यादा मशहूर जादूगरों में शुमार हो गए.

1970 में दुनिया को अलविदा कह दिया

जादूगर का जादू उसके हाथों का कमाल होता है. जिसे देखकर देखने वाला दांतों तले अंगुलियां दबा लेता है. पीसी सरकार को उनके जादू के लिए जाना जाने लगा था. साल 1970 में डॉक्टर ने पीसी सरकार को कही भी यात्रा ना करने का सलाह दिया था. लेकिन बावजूद इसके उनकी स्वास्थ्य खराब है, वो जापान में शो करने के लिए चले गए. 6 जनवरी 1970 को सरकार ने होक्काइडो द्वीप के शिबेत्सू शहर में अपना मशहूर शो इंद्रजाल किया. लेकिन स्टेज़ छोड़कर बाहर निकलते ही उनको हार्ट अटैक आ गया. इसी हार्ट अटैक में उनकी जान चली गई. पीसी सरकार को दुनियाभर के जादूगरों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी.

पीसी सरकार जूनियर का कमाल

पीसी सरकार जादूगरों की पीढ़ी के 7वें वंशज थे. हर पीढ़ी ने जादू की दुनिया में हाथ आजमाया था. अब पीसी सरकार के बाद उनके दूसरे बेटे पीसी सरकार जूनियर विरासत को बखूबी संभाल रहे हैं…पीसी सरकार जूनियर का भी जादू की दुनिया में काफी नाम है …उन्होंने क्षण भर में ताजमहल को गायब कर दिया था..इतना ही नहीं 10 बोगी वाली ट्रेन को बर्धवान स्टेशन पर न्यायधीशों की टीम के सामने गायब कर दिया था…पीसी सरकार जूनियर को विश्व का सबसे बड़ा जादूगर अवॉर्ड ‘मर्लिन पुरस्कार’ मिल चुका है. साल 2014 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं हालांकि उनका जादू यहां पर काम नहीं आया और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

तो क्या जादू का आकर्षण कम हो रहा है ?

भारत में जादू का आकर्षण कम होता जा रहा है. भारत से जादू की कला लगातार खत्म होते जाने की सबसे बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर भारतीय जादूगरों ने कभी इसे कला माना ही नहीं…शायद यही वजह है कि ये कला आज हाशिए पर पड़ी है…थोड़ा बहुत टीवी की दुनिया में जरूर आकर्षण है लेकिन मंच से लगभग गायब ही हो चुका है…जादू के फनकारों का मानना है कि दर्शकों का कम होना एकाएक नहीं हुआ है बल्कि कई वजहे हैं मसलन बार बार एक ही जादू को दोहराना …तो भला दर्शक एक ही जादू को देखना क्यों पसंद करेगा ….ऐसे कई सारे फैक्टर हैं..एक वजह और है ….जादूगर अब जादू की कला को सिर्फ ट्रिक कहने से कतराते हैं. वो इसे काले जादू संज्ञा में रखना ज्यादा पसंद करते हैं. भारत के जादूगरों की एक शिकायत और भी है कि भारत सरकार की तरफ से उनको कोई मदद नहीं मिलती है जबकि विदेशों में इस कला को काफी मदद दी जाती है.

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