Airplane में को-पायलट और पायलट को नहीं दिया जाता है एक जैसा खाना, क्या है इसका कारण

हवाई जहाज में कई लोग सफर करते हैं और कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने कभी इसका सफर नहीं किया. लेकिन फिर भी हवाई जहाज के बारे में जो कुछ अहम बातें है वो तो हर व्यक्ति जानता है. जैसे कि हवाई जहाज में दो पायलट होते हैं. जी हां, अगर किसी ने हवाई जहाज की यात्रा नहीं भी कि होगी तो भी अधिकतर लोग जानते हैं कि इसमें दो पायलट होते हैं.

एक को-पायलट और पायलट, लेकिन बहुत ही कम लोग ये जानते हैं कि दोनों पायलट को सफर के दौरान अलग-अलग भोजन परोसा जाता है. कभी भी दोनों पायलट्स को एक जैसा खाना नहीं दिया जाता है. लेकिन क्यों? आइए जानते हैं इसके पीछे का काफी रोचक कारण.

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फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए देते हैं अलग खाना

बता दें कि को-पायलट और पायलट को अलग-अलग खाना सुरक्षा की दृष्टि से दिया जाता है. जिससे की अगर कभी फूड पॉइजनिंग की नौबत आई तो दोनों में से एक पायलट सुरक्षित रह सके. क्योंकि पूर्व में ऐसी कई घटनाएं घट चुकी हैं जिसमें प्लेन का खाना खाने के कारण लोगों को फूड पॉइजनिंग की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. इसलिए सतर्कता भरा कदम उठाके हुए दोनों पायलट्स को अलग-अलग खाना दिया जाता है.

पायलट को फर्स्ट क्लास का खाना दिया जाता है

साल 2012 में सीएनएन द्वारा किए गए एक कोरियन पायलट के इंटरव्यू में भी इस बात का खुलासा हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक उसने बताया था कि दोनों पायलट को फूड पॉइजनिंग से बचाने के लिए अलग-अलग खाना दिया जाता है. आमतौर पर पायलट को फर्स्ट क्लास का खाना दिया जाता है, तो वहीं को पायलट को बिजनेस क्लास का खाना मुहैया कराया जाता है.

कई एयरलाइन्स पायलट्स के लिए बनाती हैं अलग खाना

कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो कई एयरलाइन्स कॉकपिट के क्रू के लिए पूरी तरह से अलग खाना बनाती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक उसने बताया था कि दोनों पायलट को फूड पॉइजनिंग से बचाने के लिए अलग-अलग खाना दिया जाता है.

साल 1895 में हुआ था हवाई जहाज का आविष्कार

कहा जाता है कि राइट बंधुओं से आठ साल पहले यानी साल 1895 में मुंबई के रहने वाले शिवकर बापूजी तलपड़े ने हवाई जहाज का आविष्कार कर दिया था, लेकिन उनकी उपलब्धि इतिहास के पन्नों में कहीं खो गई. आइए आज हम आपको हवाई जहाज से जुड़े एक ऐसे ही रोचक तथ्य के बारे में बताते हैं, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे.