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जौन एलिया की टॉप 20 शायरी पढ़िये

जौन एलिया का नाम तो आपने सुना ही होगा, वही जिन्होंने ने शायरी की दुनिया में अलग मुकाम को छुआ. आज हम आपको जौन एलिया की कुछ शायरियां पढ़ाते हैं.

आज बहुत दिन ब’अद मैं अपने कमरे तक आ निकला था

जूँ ही दरवाज़ा खोला है उस की ख़ुश्बू आई है

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अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर

कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते

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अब तो उस के बारे में तुम जो चाहो वो कह डालो

वो अंगड़ाई मेरे कमरे तक तो बड़ी रूहानी थी

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बहुत नज़दीक आती जा रही हो

बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या

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हासिल-ए-कुन है ये जहान-ए-ख़राब

यही मुमकिन था इतनी उजलत में

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हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर का

सब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो

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हर शख़्स से बे-नियाज़ हो जा

फिर सब से ये कह कि मैं ख़ुदा हूँ

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इक अजब आमद-ओ-शुद है कि न माज़ी है न हाल

‘जौन’ बरपा कई नस्लों का सफ़र है मुझ में

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इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ

वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से

हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है

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कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई

तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया

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कौन इस घर की देख-भाल करे

रोज़ इक चीज़ टूट जाती है

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कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं

क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे

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क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!

आख़िरी बार मिल रही हो क्या

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मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस

ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं

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मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले

अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को

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सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में

हिज्र के दालान और आँगन में बस इक साया ज़िंदा था

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उस गली ने ये सुन के सब्र किया

जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं

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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता

एक ही शख़्स था जहान में क्या

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ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर

था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियाँ था

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