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Menopause: महिलाओं में ‘संबंध’ बनाने की इच्छा कब हो जाती है कम?

हर महिला की उस स्थिति से गुजरना पड़ता है जब उसके पीरियड्स बंद हो जाते हैं. इस स्थिति को हिंदी में रजोनवृत्ति और English में मैनोपॉज़ (Menopause) कहते हैं. लगभग 40-45 की उम्र के बाद यह स्थिति आती है जब महिला के पीरियड्स बंद हो जाते हैं. आइए जानते हैं इसका क्या असर पड़ता है महिलाओं पर…

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Courtesy-trmedbook

मैनोपॉज़ (Menopause) का क्या असर पड़ता है महिलाओं पर-

1- मैनोपॉज़ (Menopause) में प्रजनन शक्ति लगभग खत्म हो जाती है. क्योंकि इस स्थिति में हार्मोंस कम हो जाते हैं.

2- मैनोपॉज़ (Menopause) में ओवरी में एस्ट्रोजन नाम का हार्मोन बनना बंद हो जाता है. इस स्थिति में शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं.

3- मैनोपॉज़ (Menopause) को 4 भागों में बांटा गया है- पहला है प्री मैनोपॉज, दूसरा पेरी मैनोपॉज, तीसरा मैनोपॉज और चौथा पोस्ट मैनोपॉज.

4- पीरियड्स बंद होने से औरतों को गर्मी बहुत लगती है. और उसके तुरंत बाद ठंडी भी लगती है. इसके अलावा चेहरा, सीने और गर्दन के हिस्से में लालिमा आ जाती है. यह स्थिति 30 सेकंड से 5 मिनट तक भी होती है.

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5- हार्टबीट यानी दिल की धड़कन बढ़ जाती है. और काफी पसीना आता है क्योंकि खून में असंतुलन बढ़ जाता है.

6- पीरियड्स बंद होने पर जेनेटल बदलाव होते हैं जिससे जननांग में सिकुड़न पैदा हो जाती है.

7- पीरियड्स बंद होने पर जननांग में आई सिकुड़न की वजह से संबंध बनाने की इच्छा भी खत्म होने लगती है.

8- इस दौरान पेशाब में अनियमितता आती है. कभी ज्यादा तो कभी कम पेशाब आती है.

9- हड्डियां कमजोर होती हैं, इसके अलावा जोड़ों और पीठ में दर्द की भी समस्या होती है.

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10- Skin में रूखापन आता है और स्तन सिकुड़ जाते हैं. सिर दर्द. चक्कर आना और पाचन शक्ति का कमजोर होना भी इसके असर में शामिल है.

11- एस्ट्रोजन हार्मोंस के कम हो जाने से मायूसी और खोए रहने की समस्या के साथ चिड़चिड़ापन और उदासी की समस्या भी होती है. इस दौरान महिलाएं मानसिक तनाव से गुजरती हैं.

मैनोपॉज(Menopause) के दौरान बरतें ये सावधानियां-

1- Smoking, शराब, तला-भुना खाना और तेज मिर्च वाले खाने से परहेज करें.

2- Healthy चीजें खाएं और दूध जरूर लें. क्योंकि इस दौरान कैल्शियम की कमी होती है शरीर में. इम्यूनिटी मजबूत करने वाली चीजें जैसे ग्रीन टी आदि का सेवन करें.

3- व्यायाम करें और सकारात्मक रहें. योगासन से भी इस स्थिति से निपटने में मदद मिलती है.

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नोट- ऊपर दिये गये आंकड़े और बातें समाज में फैली धारणाओं के आधार पर हैं, इसलिए किसी विशेष सलाह के लिये अपने चिकित्सक से जरूर मिल लें.

 

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