पेगासस मामले में हलफनामा नहीं दाखिल करेगी केंद्र सरकार, SC ने सुरक्षित रखा फैसला

सु्प्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 13 सितंबर को पेगासस (Pegasus) मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि वह इस मामले पर हलफनामा दाखिल नहीं करेगी. केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ऐसे मामलों में हलफनामा दाखिल नहीं किया जा सकता है लेकिन सरकार जासूसी के आरोपों की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगी. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. अगले 2 से 3 दिनों में इस पर आदेश सुनाया जा सकता है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एन. वी. रमना ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि आखिर सरकार इस मामले पर क्या चाहती है. इससे पहले केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो बार वक्त मांगा था, लेकिन अब केंद्र ने हलफनामा दाखिल करने से ही इनकार कर दिया है.

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पेगासस जासूसी मामले में SIT का गठन होगा या न्यायिक जांच, इस पर फैसला 2-3 दिनों के भीतर लिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हलफनामा फाइल करने पर फिर से विचार करने के लिए कहा है.

पब्लिक डोमेन का मामला नहीं-

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जासूसी के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है या नहीं, यह पब्लिक डोमेन का मामला नहीं है. इस मामले के लिए विशेषज्ञों की एक टीम जांच कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रमना ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘आप बार-बार उसी बात को दोहरा रहे हैं, हम जानना चाहते हैं कि इस मुद्दे पर सरकार क्या कर रही है’.

Source- Amar Ujala

सॉफ्टवेयर का हुआ है गलत इस्तेमाल-

याचिकाकर्ता पत्रकार एन राम की तरफ से कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि नागरिकों की निजता का संरक्षण करे. अगर सरकार हलफनामा दाखिल नहीं करती है तब यह माना जाना चाहिए कि पेगासस का अवैध इस्तेमाल हुआ है. याचिकाकर्ता जानना चाहते हैं कि सरकार द्वारा पेगासस का इस्तेमाल हुआ है या नहीं.

पेगासस विवाद क्या है-

मानूसन सत्र से एक दिन पहले न्यूज वेबसाइट द वायर ने अपने रिपोर्ट में दावा किया कि इजरायली कंपनी NSO ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर ने भारत में 300 से अधिक लोगों की जासूसी की है. जिसमें तीन विपक्षी नेता, एक जज, कई पत्रकार और व्यवसायी शामिल हैं.

न्यूज प्लेटफॉर्म द वायर ने 18 जुलाई को बताया कि 50 हजार नंबरों की लीक हुई सूची, फ्रांस की संस्था फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास है. इन संस्थानों का दावा है कि ये वो नंबर है, जिन्हें पेगसास स्पाइवेयर के जरिए हैक किया गया था.

ऐसे काम करता है पेगासस

हैकर्स पेगासस को किसी डिवाइस में इंस्टॉल करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. टारगेट डिवाइस को मैसेज के जरिए एक लिंक भेजा जाता है. जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, वैसे ही उसके फोन का डेटा पेगासस के पास जाने लगता है.

एक बार पेगासस के एक्टिव हो जाने के बाद हैकर्स के पास उस डिवाइस के पासवर्ड, कॉन्टेक्ट नंबर, लोकेशन, कॉल्स, व्हाट्सप मैसेज, कैमरे और माइक का एक्सेस, ई-मेल, ब्राउजिंग हिस्ट्री और रियल टाइम लोकेशन तक का पता चलता रहता है.

2016 में सुर्खियों में आया था पेगासस-

पहली बार पेगासस साल 2016 में सुर्खियों में आया था. यूएई के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को अनजान नंबर से कई सारे मैसेज आ रहे थे. जब इन मैसेजेस की जांच करवाई गई तो पता चला कि मैसेज में भेजी गई लिंक को क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता है.

न्यूज वेबसाइट का दावा, इजरायली सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी करा रही हैं सरकारें