न्यूज वेबसाइट का दावा, इजरायली सॉफ्टवेयर के जरिए जासूसी करा रही हैं सरकारें

न्यूज वेबसाइट द वायर ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि इजरायली कंपनी NSO ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर ने भारत में 300 से अधिक लोगों की जासूसी की है. जिसमें तीन विपक्षी नेता, एक जज, कई पत्रकार और व्यवसायी शामिल हैं.

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म द वायर ने रविवार को बताया कि 50 हजार नंबरों के लीक हुई सूची फ्रांस की संस्था फॉरबिडन स्टोरीज और एमनेस्टी इंटरनेशनल के पास है. इन संस्थानों का दावा है कि ये वो नंबर है, जिन्हें पेगसास स्पाइवेयर के जरिए हैक किया गया था.

300 वैरिफाइड नंबरों की भारतीय लिस्ट में मंत्री, विपक्षी नेता, पत्रकार, मानव अधिकार कार्यकर्ता, सरकारी अधिकारी, वैज्ञानिक, व्यापारी और अन्य लोगों के फोन नंबर शामिल हैं. हालांकि न्यूज वेबसाइट द गार्डियन ने कहा कि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि डेटाबेस में मौजूद सारे नंबर पेगासस द्वारा हैक किए गए थे.

Source- Zed Net

NSO ग्रुप का दावा, पेगासस की सेवाएं केवल संप्रभु सरकारों के लिए-

कैलिफोर्निया में व्हाट्सएप द्वारा पहले मुकदमे का जवाब देते हुए, NSO ग्रुप ने कहा था कि पेगासस की सेवाएं निजी कंपनियों को नहीं दी जाती हैं, बल्कि इसका इस्तेमाल केवल सरकार या सरकारी एंजेसियां ही करती हैं.

द वायर की रिपोर्ट पब्लिश होने के तुंरत बाद केंद्र सरकार ने इस खबर का खंड़न करते हुए कहा कि देश में किसी व्यक्ति का फोन गैरकानूनी रूप से हैक नहीं किया गया है. IT मिनिस्ट्री द्वारा जारी चिट्ठी में कहा गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसलों पर कानूनी प्रक्रिया का पालने करते हुए किसी का फोन टेप करने की इजाजत दी जा सकती है.

Source- The Indian Express

ऐसे काम करता है पेगासस-

हैकर्स पेगासस को किसी डिवाइस में इंस्टॉल करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. टारगेट डिवाइस को मैसेज के जरिए एक लिंक भेजा जाता है. जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, वैसे ही उसके फोन का डेटा पेगासस के पास जाने लगता है.

एक बार पेगासस के एक्टिव हो जाने के बाद हैकर्स के पास उस डिवाइस के पासवर्ड, कॉन्टेक्ट नंबर, लोकेशन, कॉल्स, व्हाट्सप मैसेज, कैमरे और माइक का एक्सेस, ई-मेल, ब्राउजिंग हिस्ट्री और रियल टाइम लोकेशन तक का पता चलता रहता है.

2016 में सुर्खियों में आया था पेगासस-

पहली बार पेगासस साल 2016 में सुर्खियों में आया था. यूएई के मानवाधिकार कार्यकर्ता अहमद मंसूर को अनजान नंबर से कई सारे मैसेज आ रहे थे. जब इन मैसेजेस की जांच करवाई गई तो पता चला कि मैसेज में भेजी गई लिंक को क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता.

2 अक्टुबर 2018 को सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या हो गई थी. जांच में पाया गया कि जमाल खशोगी की हत्या से पहले पेगासस के जरिए उनकी जासूसी हो रही थी.

साल 2019 में व्हाट्सएप ने बताया था कि पेगासस के जरिए करीब 1400 पत्रकारों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप की जानकारी पर सेंध लगाई गई है. इस मामलें को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा में उठाते हुए केंद्र सरकार पर कई आरोप भी लगाए थे.  इसके अलावा मैक्सिको सरकार पर भी गैर कानूनी तरीके से जानकारी जुटाने के आरोप लगे थे.