केरल में लगा वीकेंड लॉकडाउन, बीते 24 घंटों में 22 हजार से ज्यादा मामले आए सामने

केरल में कोरोना बढ़ते मामले को देखते हुए राज्य सरकार ने इस सप्ताह वीकेंड लॉकडाउन लगाने का फैसला लिया है. वहीं केंद्र सरकार नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल से छः सदस्यीय टीम को केरल भेजेगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि केरल में अभी बड़ी संख्या में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं ऐसे में टीम कोविड प्रबंधन के अंतर्गत राज्य में चल रहे प्रयासों में मदद करेगी. गौरतलब है कि पिछले कुछ सप्ताहों से केरल में कोरोना के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं. जबकि दूसरी लहर के बाद देश के बाकि हिस्सों में कोरोना के मामलों में लगातार कमी दर्ज की गई है.

बुधवार को केरल में कोविड-19 के 22,056 नए मामले सामने आए. इसके साथ ही अब तक केरल में कुल कोविड-19 के 33,27,201 मामले सामने आए हैं वहीं मरने वालों की संख्या 16,457 हो गई है. राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 17,761 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं ऐसे में कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या अब 31,60,904 हो गई है. केरल में 1,49,534 कोरोना मरीजों का इलाज चल रहा है. राज्य में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला मलप्पुरम और त्रिशुल है यहां क्रमशः 3,931 और 3,005 कोरोना के केस सामने आए हैं. अगर राज्य में वैक्सीनेशन की बात करें तो केरल में अब तक 1,90,09,965 लोगों को वैक्सीन लग चुका है.

भाजपा ने की आलोचना-

बुधवार को भाजपा ने केरल में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के लिए तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया और ईद-उल-अजहा के लिए दिए गए प्रतिबंधो के लिए राज्य सरकार की आलोचना की. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि देश में आधे से अधिक मामले केरल से आ रहे हैं, लेकिन वहां की वामपंथी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा फटकार लगाए जाने के बाद भी बकरीद के लिए ढील दी.
पात्रा ने आगे कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने कांवड़ यात्रा रद्द करने के शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन किय़ा, लेकिन केरल सरकार ने बकरीद पर इस आदेश पर ध्यान नहीं दिया. पात्रा ने समाचार पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति जीत गई है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है. ऐसा लगता है कि केरल में तीसरी लहर की शुरुआत हो चुकी है.