ओणम त्योहार क्यों मनाया जाता है, भगवान विष्णु से इस त्योहार का क्या है संबंध

अगर आप उत्तर भारत के रहने वाले होंगे तो केरल बहुचर्चित त्योहार ओणम के बारे में बहुत कम ही जानते होंगे. दस दिन तक चलने वाला ओणम त्योहार उत्तर भारत में मनाई जाने वाली दिवाली से कम नहीं होता है. केरल के लोग इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं. इस साल ओणम 12 अगस्त से शुरू हो चुका है और 23 अगस्त को इसका आखिरी दिन होगा.

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भाद्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है

ओणम के दिन घरों को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है इसके अलावा तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं. ओणम हर साल भाद्र मास के शुक्ल पक्ष के त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार ओणम का प्रमुख दिन 21 अगस्त तारीख को है. वहीं मलयालम कैलेंडर के पहले महीने चिंगम में इस त्योहार को मनाया जाता है. ओणम पर्व राजा बलि की याद में मनाया जाता है इसके अलावा किसान इस पर्व को अच्छी फसल के लिए मनाते हैं.

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राजा बलि कौन थे-

ओणम पर्व राजा बलि के लिए मनाया जाता था. मान्यताओं के मुताबिक राजा बलि के राज्य में प्रजा बहुत सुखी और संपन्न थी. इस दौरान भगवान भगवान विष्णु ने वामन अवतार में तीन पग में पूरी पृथ्वी लांघकर उनका उद्धार किया था. ऐसा माना जाता है कि राजा बलि साल एक बार अपनी प्रजा को देखने के लिए धरती पर जरूर आते हैं इसलिए उनके आने की खुशी में केरल के लोग इस पर्व को मनाते हैं. इसके अलावा यह त्योहार किसानों के लिए भी अहम होता है. किसान इस त्योहार को अच्छी और नई फसल आने के लिए मनाते हैं.

दक्षिण भारत का त्योहार

केरल के अलावा ओणम त्योहार पूरे दक्षिण भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन केरल में नौका दौड़ का आयोजन कराया जाता है. इसके अलावा स्थानीय लोग राज्य की पारंपरिक नृत्य कथकली करते हैं. लोग अपने घरों की सजावट करते हैं, रंगोली बनाते हैं, घर के बाहर दीप जलाते हैं, अलग-अलग तरह के पकवान बनाए जाते हैं. इसके अलावा ओणम के पहले दिन हाथियों को सजाकर उनकी रैली निकाली जाती है.

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