जयपुर के आमगढ़ किले को लेकर क्यों आमने-सामने हैं मीणा समुदाय और हिंदू समूहों के लोग

जयपुर में आदिवासी मीणा समुदाय और स्थानीय हिंदू समूहों के बीच एक किले को लेकर विवाद चल रहा है. दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है और दोनों ही पक्ष किले में इकट्ठा होने और अपनी ताकत दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं.

क्या है पूरा मामला-

मीणा समुदाय के लोगों का कहना है कि आमगढ़ किला, जयपुर में राजपूत शासन से पहले एक मीणा शासक द्वारा बनवाया गया था. निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा ने कहा कि समुदाय के लोग किले में अम्बा माता सहित अन्य देवताओं की पूजा करते थे.

जून में किले में मूर्तियों को तोड़े जाने और भगवा झंडा फहराने की खबरों के बाद मीणा समुदाय के सदस्यों ने हिंदू समूहों पर आदिवासी प्रतीक को हिंदुत्व में शामिल करने की कोशिश करने और अम्बा माता का नाम बदलकर अंबिका भवानी करने का आरोप लगाया.

यह मामला तब तूल पकड़ा जब 21 जुलाई को भगवा झंडा उतराते समय फट गया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. हिंदू समूहों ने मीणा समुदाय के रामकेश मीणा की उपस्थिति में झंडा फाड़ने का आरोप लगाया. जबकि विधायक और अन्य मीणा नेताओं ने कहा कि हिंदू समूहों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही ध्वज को उतारा गया और यह गलती से फट गया था, जबकि हिंदू सदस्य के ही लोग इसे नीचे ला रहे थे.

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इस विवाद में ब्राह्मण समूह भी शामिल हो गया. कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा कि किले के पास अंबिका भवानी पीढ़ियों से यहां अनुष्ठान करने वाले पुजारियों के परिवार से हैं.

किले का इतिहास-

अमागढ़ किले का वर्तमान स्वरूप 18वीं शताब्दी में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने कराया था. ऐसा माना जाता है कि जय सिंह द्वितिय द्वारा निर्माण कराने से पहले इस स्थान पर कुछ और था. कछवाहा वंश के राजपूत शासन से पहले जयपुर और उसके आस पास के इलाकों में मीणाओं का शासक था.

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व सहायक प्रोफेसर और आदिवासी संस्कृति के स्कॉलर डॉ. हीरा मीणा ने बताया कि किले का निर्माण नदला गोत्र के एक मीणा सरदार ने किया था, जिसे अब बड़गोती मीणा के नाम से जाना जाता है. मीणा समुदाय के सरदारों ने लगभग 1100 ईस्वी तक राजस्थान पर शासन किया.

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उन्होंने आगे कहा कि अम्बा माता अंबिका भवानी से अलग हैं. अन्य आदिवासी समूहों की तरह ही मीणा समुदाय के लोग भी पूर्वजों की पूजा करते हैं. अम्बा माता मीणा समुदाय वालों की पूर्वज हैं देवता नहीं. अम्बा माता का अंबिका भवानी या दुर्गा से कोई संबंध नहीं है. हिंदू संगठनों द्वारा अम्बा माता को अंबिका भवानी के रूप में बताना गलत है.

दोनों पक्षों ने दर्ज करायी है रिपोर्ट-

इस मामले में अब तक तीन एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. जून में मूर्तियों की तोड़फोड़ और चोरी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करायी गई थी. आदर्श नगर के एसीपी नील कमल के अनुसार, पुलिस ने मुस्लिम समुदाय के किशोरों के एक ग्रुप को हिरासत में लिया है.

भगवा झंडा उतारने के बाद दोनों पक्षों ने आईपीसी की धारा 295 और आईटी अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी है. मीणा समुदाय के लोगों का कहना है कि मूर्तियों को तोड़े जाने में कोई हिन्दू- मुस्लिम एंगल नहीं था. विधायक रामकेश मीणा ने हिंदू संगठनों के चरमपंथी तत्वों को दोषी ठहराते हुए कहा कि किले में प्रवेश करने की घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे थे.

मीणा समुदाय-

राजस्थान में मीणा समुदाय का काफी दबदबा है. अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 25 विधानसभा सीटों में से अधिकांश का प्रतिनिधित्व कांग्रेस और बीजेपी दोनों के मीणा विधायक करते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाति राज्य की जनसंख्या का 13.48 प्रतिशत है. राज्य भर में बिखरी हुई आबादी के कारण, समुदाय अनारक्षित सीटों पर भी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है.