एक्टिविस्ट कमला भसीन का निधन, महिलाओं के उत्थान के लिए किया था अनेकों काम

प्रख्यात महिला अधिकार कार्यकर्ता, कवयित्री और लेखिका कमला भसीन का निधन हो गया है. वह कैंसर से पीड़ित थी. सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी दी. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि एक्टिविस्ट कमला भसीन का आज 25 सितंबर की सुबह 3 बजे निधन हो गया है. यह भारत और दक्षिण एशियाई क्षेत्र में महिला आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है. विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने अपनी जीवन का जश्न मनाया. कमला हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी.

अभिनेत्री शबाना आजमी ने कमला भसीन के निधन पर शोक जताते हुए कहा, कमला भसीन ने अपनी जिन्दगी को अच्छी तरह जीते हुए अपनी आखिरी सांस तक महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी है.

कमला भसीन कौन हैं

कमला भसीन का जन्म 24 अप्रैल साल 1946 को हुआ था. उनके पिता राजस्थान में डॉक्टर थे. भसीन ने राजस्थान विश्वविद्यालय से एमए किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जर्मनी चली गयी. उन्होंने बैड होननेफ में जर्मन फाउंडेशन फॉर डेवलपिंग कंट्रीज के ओरिएंटेशन सेंटर में लगभग एक साल तक पढ़ाया.

साल 1970 में कमला भसीन ने महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए अनेकों काम किया. साल 2002 में उन्होंने फेमिनिस्ट नेटवर्क ‘संगत’ की स्थापना की. भसीन ने ग्रामीण और आदिवासी समुदायों की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया. वह महिलाओं को जागरूक करने के लिए नाटक, गीत और कला जैसे साधनों का उपयोग करती थीं.

कमला भसीन ने एक बार कहा था कि अगर महिलाएं पुरूषों से यह कह दें कि उनके साथ अच्छा सलूक किया जाए नहीं तो वह बच्चें पैदा नहीं करेंगी. तब उस वक्त क्या होगा. होगा यहीं कि सेनाएं ठप हो जाएंगी.

उन्होंने कई बार अपने भाषणों में इस बात का जिक्र किया है कि जब बच्चा पैदा होता है तो वह केवल एक इंसान होता है लेकिन समाज उसे धर्म, जाति, और भेद के आधार पर कई छोटे-छोटे वर्गों में बांट देता है. प्रकृति इंसानों में भेद कर सकती है लेकिन भेदभाव कभी नहीं करती. समाज ही भेदभाव करना सिखाता है. भेदभाव के कारण ही लोग एक-दूसरे से नफरत करना सीखते हैं.

महिलाओं के मुद्दे पर लिख चुकी हैं कई किताबे

कमला भसीन ने नारीवादी जेंडर इक्वालिटी, नारीवाद और पित्तासत्तामक मुद्दों पर कई किताबें लिख चुकी हैं. उनकी किताबों को कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है. उनकी प्रमुख किताबे Exploring masculinity, Understanding gender, Borders & Boundaries: Women in India’s Partition, What is patriarchy? हैं.

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