Tokyo Paralympic : सुमित अंतिल ने फाइनल में तीन बार वर्ल्ड रिकाॅर्ड तोड़कर जीता गोल्ड, रेसलर बनना चाहते थे

भारतीय पैरालंपियन और जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल ने रविवार को टोक्यो ओलंपिक में लाजवाब प्रदर्शन करते हुए F64 कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने 68.55 मीटर का जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंककर इस मेडल को जीता है. टोक्यो पैरालंपिक के फाइनल में उन्होंने ना सिर्फ गोल्ड मेडल जीता बल्कि एक नया वर्ल्ड रिकाॅर्ड भी सेट किया. सुमित अंतिल के गोल्ड मेडल के साथ ही टोक्यो पैरालंपिक में भारत के दो गोल्ड मेडल हो गए हैं. इससे पहले अवनि लेखारा ने शूटिंग में भारत के लिए जीता था. 

फाइनल में तीन बार तोड़ा अपना ही वर्ल्ड रिकाॅर्ड

किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि सुमित टोक्यो पैरालंपिक के फाइनल राउंड में अपने ही वर्ल्ड रिकाॅर्ड को एक नहीं, दो नहीं बल्कि तीन बार तोड़ देंगे. जी हां जैवलिन थ्रो के फाइनल में उन्होंने तीन बार अपना ही वर्ल्ड रिकाॅर्ड तोड़ा और नया वर्ल्ड रिकाॅर्ड सेट किया. फाइनल मैच के दौरान सुमित अंतिल इतने फाॅर्म में थे कि उनके सबसे छोटे थ्रो को पार करके ही ऑस्ट्रेलिया के माइकल बरियन ने सिल्वर मेडल जीत लिया.

सुमित ने अपने पहले प्रयास में 66.95 मीटर का भाला फेंककर एक नया रिकाॅर्ड बनाया. इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में 68.08 मीटर का भाला फेंककर अपनी ही रिकाॅर्ड तोड़ा और अपने पांचवें प्रयास में उन्होंने 68.55 मीटर भाला फेंककर फिर एक बार नया वर्ल्ड रिकाॅर्ड सेट करने के साथ ही इतिहास भी रच दिया. 

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बचपन से ही रेसलर बनना चाहते थे

सुमित अंतिल का जन्म 6 जुलाई 1998 को हरियाणा के खेवड़ा में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था. उनके पिता वायु सेना में एक JWO ऑफिसर थे, जिनका 2004 में देहांत हो गया. सुमित को बचपन से ही काफी मेहनती रहें हैं. उन्हे बचपन से ही कुश्ती में रुची थी. इसलिए वे एक रेसलर बनना चाहते थे और बचपन से ही इसके लिए मेहनत कर रहे थे.

एक दुर्घटना ने तोड़ दिया रेसलर बनने का सपना

एक दिन उनके साथ ऐसा हादसा हुआ, जिसने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया. उनका रेसलर बनने का सपना टूट गया. बात 2015 की है जब सुमित एक दिन ट्यूशन से अपने घर लौट रहे थे, तभी उनके गाड़ी की दुर्घटना हो गई. क्योंकि उनके पिता भारतीय सेना में थे, इसिलए उन्हें आर्मी हाॅस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया.

इस दुर्घटना में सुमित इतनी बुरी तरह से चोटिल हुए थे कि डाॅक्टर्स को सुमित के घुटने के नीचे के हिस्से को काटना पड़ा. 53 दिन के रेस्ट के बाद उन्हें पुणे के आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर ले जाया गया. वहां उन्हें एक प्रोस्थेटिक यानी आर्टिफिशियल पैर लगाया गया. 

फिर भी हार नहीं मानी, दोस्त ने फिर बदली जिंदगी

आर्टिफिशियल पैर लगने के बाद सुमित ने रेसलर बनने का सपना छोड़ दिया लेकिन नाॅर्मल वर्कआउट करते रहते थे. हालांकि दुर्घटना के बाद उन्होंने कुश्ती छोड़ दी थी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी थी और दूसरे खेलों में हाथ आजमाना चाहते थे. तभी जुलाई, 2017 में उनके गांव के एक दोस्त और पैरा एथलिट राजकुमार ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स  के बारे में बताया.

उस वक्त सुमित दिल्लाी में दिल्ली में बी.कॉम कर रहे थे. पैरा एथलेटिक्स ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. शुरुआत में वह शॉट पुटर बनना चाहते थे. इसी के बारे में राय लेने के लिए भारतीय कोच विरेंद्र धनखड़ से मिले. उन्होंने सुमित को जैवलिन कोच नवल सिंह से मिलवाया. चर्चा करने पर नवल ने सुमित को जैवलिन थ्रो का सुझाव दिया.

प्रैक्टिस के दौरान प्रोस्थेटिक पैर भर जाता था खून

पहले तो उसके लिए इतना वर्कआउट करना एक चुनौती थी. क्योंकि उनके पांव के स्टंप में बहुत दर्द होता था और कभी-कभी तो प्रोस्थेटिक पैर का अंदरूनी हिस्सा बहुत अधिक गर्मी के कारण खून से भर जाता था. लेकिन उनके परिवार और दोस्तों ने हमेशा उनका मनोबल बनाए रखा. उनके समर्थन के कारण ही सुमित ने कभी हार नहीं मानी और सिर्फ प्रैक्टिस पर ध्यान लगाया. 

2018 में ट्रेनिंग शुरू की

2018 में वे दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम के पैरा एथलेटिक्स से जुड़े और ट्रेनिंग लेनी शुरु कर दी. एक साल की कड़ी मेहनत और ट्रेनिंग के बाद उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरु कर दिया. इसके बाद उन्होंने 2019 के पेरिस ओपन हैंडिस्पोर्ट में सिल्वर मेडल जीता.

एक साल के ट्रेनिंग में ही बनाया वर्ल्ड रिकाॅर्ड

2019 में ही इटली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में फिर से सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इस इवेंट में उन्होंने F64 कैटेगरी में वर्ल्ड रिकाॅर्ड तोड़ा था. इसके तुरंत बाद उन्होंने फिर एक बार वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में अपना ही वर्ल्ड रिकाॅर्ड तोड़ कर इतिहास रच दिया. उन्होंने ये कारनामा 2019 में दुबई में आयोजित हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में किया था, जहां उन्होंने F64 कैटेगरी सिल्वर मेडल जीतकर टोक्यो पैरालंपिक के लिए भी क्वालिफाई किया था. अब टोक्यो पैरालंपिक में तीन बार अपना ही रिकाॅर्ड तोड़कर एक बार फिर से इतिहास रच दिया है.

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