Tokyo Paralympics : टेबल टेनिस में फाइनल तक पहुंचने वाली भाविना पटेल कौन हैं ?

भाविना पटेल ने टोक्यो पैरालिम्पिक में टेबल टेनिस के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है. टेबल टेनिस के फाइनल में पहुंचने वाली वह पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. इसी के साथ उन्होंने सिल्वर मेडल पक्का कर लिया है.

क्वार्टर फाइनल में 2016 की गोल्ड मेडलिस्ट को हराया था

ग्रुप मैच में हारने के बाद भाविना ने पहले क्वार्टर फाइनल फिर सेमीफाइनल में शानदार खेल का प्रदर्शन किया. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने 2016 रियो पैरालिम्पिक की गोल्ड मेडल विजेता और वर्ल्ड नं. 2 सर्बिया की बोरिसलावा पेरिच रांकोविच को सीधे सेट में 3-0 से हराकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था.

2016 में भी किया था क्वालिफाई लेकिन नहीं ले पाई थी हिस्सा

सेमीफाइनल में भाविना ने चीन की झांग मियाओ को 3-2 से हराकर गोल्ड मेडल की दावेदार बन गईं हैं. रविवार को फाइनल में उनका मुकाबला चीन की झाउ यिंग से होने वाला है. बता दें कि भाविना पहली बार पैरालिमपिक में हिस्सा ले रहीं हैं. हालांकि इससे पहले भी उन्होंने रियो पैरालिम्पिक के लिए क्वालिफाई कर लिया था लेकिन कुछ पेपरवर्क में गड़बड़ी की वजह से वे रियो हिस्सा नहीं ले पाईं थीं. 

बचपन में हुई थी पोलियो का शिकार, परिवार ने हमेशा दिया हौसला

भाविना का जन्म 6 नवंबर 1986 को गुजरात के मेहसाना जिले से सुंधिया गांव में हुआ था. वहीं उनके परिवार की कटलरी एक छोटा सी दुकान थी. भाविना अभी मात्र एक साल की ही थी तभी वे पोलियो का शिकार हो गईं. पोलियो के अटैक के बाद भाविना के शरीर के नीचले हिस्सा ने काम करना बंद कर दिया. भाविना का कहना है कि उन्हें एक दूसरी बीमारी थी, जिसकी वो दवा लेती थीं. उसी दवा की वजह से उन्हें पोलियो का अटैक आया. हालांकि उनका परिवार उनके इस बीमारी से काफी दुखी रहता था लेकिन उन्होंने कभी भाविना का साथ नहीं छोड़ा. 

शिक्षक बनना चाहती थीं, एक विज्ञापन ने बदली जिंदगी

2004 में भाविना का परिवार मेहसाना जिले को छोड़कर अहमदाबाद चला गया. अपने शुरुआती जीवन में भाविना एक शिक्षक बनना चाहती थीं. इसके लिए उन्होंने परीक्षा भी पास कर लिया लेकिन उनकी विकलांगता की वजह से इंटरव्यू में उनका चयन नहीं किया गया.

कुछ समय बाद उनके पिता हंसमुख भाई पटेल को एक विज्ञापन के जरिए Blind’s People Association (BPA) के बारे में पता चला. इस एसोसिएशन को दिव्यांग लोगों की सहायता के लिए अवाॅर्ड मिल चुका था. इस वजह से उनके पिता ने 2007 में ITI कोर्स के लिए भाविना का दाखिला इस संस्थान में करवा दिया, जिसके बाद भाविना कभी पिछे मुड़कर नहीं देखा.  

ITI के दौरान टेबल टेनिस की तरफ बढ़ा रुझान

BPA में पढ़ाई के दौरान ही भाविना की रुचि टेबल टेनिस की तरफ बढ़ी. BPA में खेलने के दौरान उनके कोच ललन दोशी ने उनकी प्रतिभा को पहली बार पहचाना था. वो अभी भी उन्हीं से ट्रेनिंग लेती हैं. शादी हो जाने के बाद उनके पति निकुल पटेल ने उनका और हौसला बढ़ाया. उनके पति ने सभी परिस्थियों में उनका साथ दिया. 

भारत सरकार ने भी दिया भरपूर समर्थन

परिवार के समर्थन के अलावा उन्हें भारत सरकार का भी बहुत समर्थन मिला है. भारत सरकार ने उन्हें Target Olympic Podium Scheme (TOPS) में शामिल किया, जिससे उन्हें बड़े प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मौका मिला. इसके अलावा भाविना को वित्तीय सहायता भी मिली. भारत सरकार ने उन्हें टोक्यो पैरालिंपिक के लिए के लिए व्यक्तिगत प्रशिक्षण, डाइटिशियन, खेल मनोवैज्ञानिक, टीटी टेबल, रोबोट और टीटी व्हीलचेयर और कोचिंग फीस उपलब्ध करवाया.

वर्ल्ड रैंकिंग में दूसरे पायदान पर रह चुकी हैं

2011 में PTT थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भाविना ने इंडिविजुअल कैटेगरी में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता. इस जीत के साथ ही भाविना की विश्व रैंकिंग में दूसरे पायदान पर आ गईं थी. इसके बाद 2013 में बीजिंग में हुए एशियन पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल की क्लास 4 कैटेगरी में भाविना ने  फिर से सिल्वर मेडल जीता. 

अब तक जीत चुकी हैं 26 इंटरनेशनल मेडल

2017 में उन्होंने बीजिंग में ही हुए इंटरनेशनल टेबल टेनिस फेडरेशन एशियन पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप की महिला एकल क्लास 4 कैटेगरी में ब्राॅन्ज मेडल जीता था. आखिरकार 2021 में भाविना ने टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए क्वलिफाई कर पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी बनीं.

भाविना इंटरनेशनल इवेंट में भाविन ने अभी तक 5 गोल्ड, 13 सिल्वर और 8 ब्राॅन्ज समेत कुल 26 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. भारत सरकार की तरफ से उन्हें सरदार पटेल और एकलव्य अवाॅर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.  

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