Anand Giri : महंगे शौक रखने वाला, नरेंद्र गिरि की मौत का मुख्य आरोपी आनंद गिरि कौन है

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत के बाद उनके शिष्य आनंद गिरि को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. बाघंबरी मठ के व्यवस्थापक अमर गिरि ने आनंद गिरि पर आरोप लगाया है कि महंत नरेंद्र गिरि पिछले कुछ समय से आनंद गिरि की वजह से तनाव में चल रहे थे. उत्तर प्रदेश पुलिस को मौके पर एक सुसाइड नोट बरामद हुआ जिसमें आनंद गिरि का जिक्र है. नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था.

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आनंद गिरि कौन हैं

आनंद गिरि का जन्म 21 अगस्त साल 1980 को राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित ब्राह्मणों की सरेरी में हुआ था. आनंद गिरि का असली नाम अशोक चोटिया है. उनके पिता रामेश्वरलाल चोटिया पेशे से किसान हैं. आनंद गिरि के तीन बड़े भाई और एक छोटी बहन है. आनंद गिरि की मां का निधन पांच महीने पहले ही हुआ था. उनके एक भाई सरेरी गांव में सब्जी बेचते हैं. जबकि दो भाई सूरत में कबाड़ का बिजनेस करते हैं.

12 साल की उम्र में छोड़ा घर

फ्रेंच कट दाढ़ी रखने वाले योग गुरू आनंद गिरि साल 1996 में नरेंद्र गिरि के संपर्क में आए जो उन्हें उत्तराखंड स्थित हरिद्वार ले गए. उस समय आनंद गिरि की उम्र लगभग 12 साल की थी. कई साल तक हरिद्वार में रहने के बाद आनंद गिरि प्रयागराज चले गए.

मां के निधन पर गांव आए थे आनंद गिरि

अशोक चोटिया से आनंद गिरि बनने के बाद वह सिर्फ दो बार अपने गांव आए. पहली बार दीक्षा लेने के लिए और दूसरी बार 5 महीने पहले जब उनकी मां का निधन हुआ था.

योग गुरू के रूप में बनाई पहचान

आनंद गिरि ने अपने पासपोर्ट पर मां का नाम हिंदू देवी पार्वती और पिता के नाम पर अपने गुरू (नरेंद्र गिरि) का नाम लिखवाया है. योग गुरू के रूप में पहचान बनाने वाले आनंद गिरि कई देशों की यात्राएं कर चुके हैं. उनका दावा है कि वह ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों की संसद में भाषण दे चुके हैं.

आनंद गिरि को प्रयागराज में छोटे महाराज के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है कि आनंद गिरि युवाओं के यूथ आइकन और स्टाइल आइकन हैं. वह हैंडल छोड़कर बुलेट चलाने जैसे कई स्टंट कर चुके हैं.

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गुरू नरेंद्र गिरि के चहेते शिष्य थे आनंद गिरि

आनंद गिरि बचपन से ही अपने गुरू नरेंद्र गिरि के साथ रहे. नरेंद्र गिरि कई मौकों पर अपने शिष्य आनंद गिरि को भाषण देने का मौका देते थे. आनंद गिरि, नरेंद्र गिरि के करीबी शिष्यों में से एक थे. फर्राटेदार अंग्रेजी और हिन्दी बोलने वाले आनंद गिरि ने खुद को योग गुरू के रूप में स्थापित किया है.

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आनंद गिरि का प्रशासन से लेकर राजनेताओं से है सीधे संपर्क

प्रयागराज में आनंद गिरि का रसूख यह है कि प्रशासन के बड़े अधिकारी से लेकर केंद्रीय मंत्री भी उनके सामने हाथ जोड़ते हैं. एक इंटरव्यू के दौरान वह उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को केशव कहकर बुलाते हुए नजर आ रहे हैं.

प्रयागराज के प्रतिष्ठित हनुमान मंदिर में आनंद गिरि का दबदबा है. इस मंदिर में देश-विदेश से लोग दर्शन करने आते हैं. मंदिर आने वाले वीआईपी लोगों को दर्शन कराने का काम आनंद गिरि ही करते हैं.

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आनंद गिरि पर लगा था यौन उत्पीड़न का आरोप

कुछ साल पहले आनंद गिरि योग सिखाने ऑस्ट्रेलिया गए थे. जहां एक महिला ने आनंद गिरि पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया था. इस मामले के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

महंत नरेंद्र गिरि के साथ चल रहा था विवाद

आनंद गिरि और उनके गुरू नरेंद्र गिरि के बीच बाघंबरी मठ की जमीन को लेकर विवाद चल रहा था. आनंद गिरि ने अपने गुरू नरेंद्र गिरि पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मठ की 8 बीघा जमीन 40 करोड़ रुपये में बेच दी. इसे लेकर आनंद गिरि ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर जांच करवाने की मांग की थी. वहीं नरेंद्र गिरि ने अपने शिष्य पर आरोप लगाया था कि संत बनने के बाद भी आनंद गिरि अपने परिवार के संपर्क में थे.

इस मामले में साधु संतो ने नरेंद्र गिरि का साथ दिया. इसके बाद आनंद गिरि को बाघंबरी मठ और निरंजन अखाड़े से निकाल दिया गया था. हालांकि बाद में आनंद गिरि ने अपने गुरू से माफी मांग ली थी लेकिन इसके बावजूद उन्हें बाघंबरी मठ में आने की इजाजत नहीं दी गई थी.

महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि में क्या विवाद था, नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में क्या लिखा