कश्मीर का अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी कौन था, जिसकी मौत से पाकिस्तान में मातम है

कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी (Syed Ali Shah Geelani) की लंबी बीमारी के बाद 1 सितंबर को श्रीनगर स्थित उनके आवास पर मृत्यु हो गई. वह 91 साल के थे. उन्हें हैदरपुरा के कब्रिस्तान में दफनाया गया. गिलानी की मौत पर कश्मीर से लेकर पाकिस्तान के नेताओं ने अपना दुख प्रकट किया है.

जम्मू- कश्मीर (Jammu&Kashmir) की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर लिखा, ‘गिलानी साहब के निधन की खबर से दुखी हूं. हम ज्यादातर बातों पर सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन मैं उनकी दृढ़ता और उनके विश्वासों के साथ खड़े होने के लिए उनका सम्मान करता हूं. अल्लाह तआला उन्हें जन्नत और उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना प्रदान करें.’

कौन था सैयद अली शाह गिलानी ?

सैयद अली शाह गिलानी का जन्म 29 सितंबर साल 1929 को जम्मू-कश्मीर स्थित बांदीपुर के सोपोर मेंं हुआ था. उनकी प्रारंभिक पढ़ाई कश्मीर में हुई. ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के लिए गिलानी पाकिस्तान (अविभाजित भारत) स्थित लाहौर के ओरिएंटल कॉलेज चले गए. उन्होंने कुछ सालों तक शिक्षक की नौकरी की.

Syed Ali Shah Geelani
Source- Business Standard

सैयद अली शाह गिलानी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत मौलाना मोहम्मद सईद मसूदी, एक वरिष्ठ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता के संरक्षण में की. लेकिन बाद में वह जमात-ए-इस्लामी में चले गए. गिलानी पहली बार साल 1972 में चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचे. जिसके बाद साल 1977 और साल 1987 में इस सीट से विधायक रहे. लेकिन साल 1889 में राज्य में आपातकाल लगने के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद गिलानी ने साल 1993 में 26 अलगाववादी संगठनों को मिलाकर ‘ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस’ का गठन किया. 19 साल के मीरवाइज उमर फरूक इसके संस्थापक चेयरमैन बने, हालांकि बाद में गिलानी को हुर्रियत का चेयरमैन चुना गया.

साल 2004 में गिलानी ने ‘जमात-ए-इस्लामी’ से अलग होकर ‘तहरीक-ए-हुर्रियत’ नाम की खुद की पार्टी बनाई. वहीं उन्होंने जून 2020 में ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया.

Syed Ali Shah Geelani
Source- BBC

पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित

गिलानी का मानना था कि स्थानीय नागरिकों की मर्जी के अनुसार कश्मीर मुद्दे का समाधान हो. वह कश्मीर का पाकिस्तान में विलय होने के प्रबल समर्थक थे. साल 2020 में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से नवाजा था.

गिलानी पर पाकिस्तान से फंडिंग लेने और कश्मीर में अलगाववाद भड़काने के आरोप थे. जिसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया. गिलानी एक दशक से भी ज्यादा समय से अपने घर में नजरबंद थे. साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही गिलानी और हुर्रियत के कई बड़े नेताओं के खिलाफ एनआईए की जांच चल रही थी.

गिलानी की मौत पर पाकिस्तान में मातम

सैयद अली शाह गिलानी के निधन पर पाकिस्तान ने भी शोक जताया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर लिखा, ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानी सैयद अली गिलानी के निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ, उन्होंने अपने लोगों और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए जीवन भर संघर्ष किया’.

साल 2014 में उड़ी थी मौत की अफवाह

साल 2014 में गिलानी की मौत को लेकर अफवाह फैली थी, जिसके बाद कश्मीर में इंटरनेट सेवा को सस्पेंड कर दिया गया था. गिलानी ने साल 2014 में लोगों को चुनावों को बॉयकॉट करने का आग्रह किया था. हालांकि उस साल राज्य में 65 प्रतिशत मतदान हुआ.

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