Marshal of the Air Force अर्जन सिंह ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को दिया था मुंहतोड़ जवाब

मार्शल ऑफ द एयर फोर्स ((Marshal of the Air Force) अर्जन सिंह (Arjan Singh) ने जो मुकाम हासिल किया है शायद ही वह मुकाम कोई भारतीय एयर फोर्स (Indian Air Fource) अफसर हासिल कर पाए. पांच सितारा पद वाले मार्शल ऑफ द एयर फोर्स को हासिल करने वाले पहले व्यक्ति थे. अर्जन सिंह ने 1965 की जंग में भारतीय वायुसेना का बहादुरी से नेतृत्व किया था.

अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल साल 1919 को अविभाजित पाकिस्तान के फैसलाबाद (पाकिस्तान) में हुआ था. उन्होंने 19 साल की उम्र में क्रैनवेल के रॉयल एयरफोर्स कॉलेज में दाखिला लिया. साल 1939 में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की. साल 1944 में वह भारतीय वायुसेना में एक स्वाड्रन का अरकान अभियान का नेतृत्व किया. इसी साल उन्हें फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया गया.

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अर्जन सिंह ने फरवरी साल 1945 में केरल में बहुत नीचे से उड़ान भरी थी. जिसके बाद उन्हें कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि ट्रेनी पायलट दिलबाग सिंह का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्होंने ऐसा किया था. बाद में दिलबाग सिंह भारत के एयर चीफ मार्शल बने.

आजादी के वक्त रॉयल एयर फोर्स के पहले फ्लाई पास्ट का किया नेतृत्व

भारत के आजादी के दिन अर्जन सिंह ने रॉयल इंडियन एयर फोर्स के पहले फ्लाई पास्ट का नेतृत्व करते हुए लाल किले के ऊपर उड़ान भरी. साल 1959 में वह एयर वाइस मार्शल बनाए गए. 1 अगस्त साल 1964 से 15 जुलाई 1969 तक वह वायुसेनाध्यक्ष रहे.

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1965 युद्ध में भारतीय वायुसेना का किया नेतृत्व

अर्जन सिंह ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 1965 के युद्ध में भारतीय वायुसेना का नेतृत्व किया. जब उनसे पूछा गया कि भारतीय वायुसेना कितनी देर में पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार होगी तो उन्होंने कहा कि एक घंटे में. उनकी बात सुनकर सब हैरान हो गए. अर्जन सिंह ने एक घंटे के भीतर ही वायुसेना को निर्देश दिया कि वह पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करे.

15 जुलाई साल 1969 में भारतीय वायुसेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने भारत सरकार के सलाहकार बने . अर्जन सिंह स्विट्जरलैंड, वेटिकन सिटी और Liechtenstein में राजदूत रहे. साल 1989 से 1990 तक वह दिल्ली के उपराज्यपाल के पद पर रहे.

व्हीलचेयर पर होने के बावजूद पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम को दी श्रद्धांजलि

27 जुलाई साल 2015 में जब भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ तो उन्हें श्रद्धांजलि देने अर्जन सिंह भी पहुंचे. अर्जन सिंह उस वक्त व्हीलचेयर के सहारे चलते थे लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने खड़े होकर पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि दी.

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दिल का दौरा पड़ने की वजह से 16 सितंबर साल 2017 को अर्जन सिंह का निधन हो गया. वह 98 साल के थे. अर्जन सिंह के सम्मान में साल 2016 में पश्चिम बंगाल के परगना बेस का नाम बदलकर अर्जन सिंह एयर फोर्स स्टेशन रख दिया गया.

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