पंजाब के नये और पहले दलित मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कौन हैं, पार्षद से सीएम तक का सफर कैसा रहा

चरणजीत सिंह चन्नी ने 20 सितंबर को पंजाब के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण कार्यक्रम में राहुल गांधी, नवजोत सिंह सिद्धू और हरिश रावत भी शामिल हुए. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस समारोह से दूरी बनाए रखी. कार्यक्रम में मौजूद सभी ने चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद की बधाई दी. चन्नी के अलावा कांग्रेस नेता ओपी सोनी और सुखजिंदर एस रंधावा ने भी मंत्री पद की शपथ ली.

Source- The Indian Express

मंत्री रह चुके हैं चरणजीत सिंह चन्नी

सिटी काउंसिल अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री चुने जाने तक चरणजीत सिंह चन्नी का सियासत में लगातार कद बढ़ता गया. वह पूर्व कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में कैबिनेट में टेक्निकल एजुएकेशन, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग, एंप्लॉयमेंट जेनरेशन और टूरिजम एंड कल्चर अफेयर डिपार्टमेंट संभाल रहे थे. चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व मुख्यमंत्री अमिंरदर सिंह के खिलाफ तीन अन्य मंत्रियों के साथ बगावत कर चुके हैं.

दलित चेहरा हैं चरणजीत सिंह चन्नी

चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री हैं. राज्य में तकरीबन 32 प्रतिशत आबादी सिख दलितों की है. जालंधर, होशियारपुर, शहीद भगत सिंह नगर और कपूरथला में दलितों की आबादी सबसे अधिक है. ऐसा माना जा रहा है कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर दलित वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) से गठबंधन कर चुके शिरोमणि अकाली दल पहले ही घोषणा कर चुकी है कि विधानसभा चुनाव जीतने पर दलित समुदाय से आने वाले नेता को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

राहुल गांधी से है खास संबंध-

पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गांधी परिवार के साथ अच्छे संबंध हैं इसलिए सुनील जाखड़, सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रताप सिंह बाजवा जैसे बड़े नामों के बाद भी चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुख्यमंत्री पद की मुहर लगी.

Source- Tv9

कभी पार्षद थे चरणजीत सिंह चन्नी

चरणजीत सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत मोहाली के खरड़ से पार्षद के रूप में शुरू किया था. चन्नी के पिता हरसा सिंह खरड़ में टेंट हाउस का बिजनेस करते थे. कॉलेज के दौरान चन्नी अपने पिता के टेंट हाउस बिजनेस में उनकी मदद करते थे. इसके बाद उन्होंने घनौली में एक पेट्रोल पंप खोला.

चरणजीत सिंह दो बार नगर परिषद के अध्यक्ष रहे. इसके बाद चन्नी ने चमकौर साहिब विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. इस सीट से चुनाव जीत कर चरणजीत सिंह चन्नी अकाली दल में शामिल हुए फिर बाद में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. साल 2015-16 में वह पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी थे. चन्नी तीन बार चमकौर साहिब विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

चरणजीत सिंह चन्नी पर #MeToo का आरोप

मुख्यमंत्री बनने के बाद चरणजीत सिंह से जुड़ा एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है. पंजाब बीजेपी के एक नेता ने चन्नी से जुड़े तीन साल पुराने मामले का जिक्र किया. साल 2018 में चन्नी पर आरोप लगा था कि उन्होंने मंत्री पद रहते हुए एक महिला आईएएस अधिकारी को अनुचित मेसेज भेजा था.

जब यह मामला उठा तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “मैंने चन्नी से महिला अधिकारी से माफी मांगने के लिए कहा और उन्होंने माफी मांग ली थी.” उस वक्त चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी सफाई में कहा था कि टेक्स्ट मैसेज अनजाने में आईएएस महिला अधिकारी को चला गया था. अब यह मामला सुलझ गया है.

कैप्टन अमरिंदर सिंह का इस्तीफा

पंजाब में कांग्रेस पार्टी के भीतर कई दिनों से चल रही गुटबाजी और शीर्ष नेताओं के दबाव के कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा. राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस्तीफा देने के बाद उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का नया मुख्यमंत्री बनाती है तो मैं इसका विरोध करूंगा क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, मुझे पता है कि नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्तान के साथ कैसे संबंध है.

Marshal of the Air Force अर्जन सिंह ने 1965 के युद्ध में पाकिस्तान को दिया था मुंहतोड़ जवाब