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जम्मू-कश्मीर के कुछ ऐसे कानून जो आपको कोई नहीं बताएगा

जम्मू-कश्मीर के बारे में कुछ खास बातें

जम्मू और कश्मीर राज्य 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हुआ था. भारतीय संविधान के अनुसार जम्मू तथा कश्मीर राज्य भारतीय संघ का संवैधानिक राज्य है तथा इसकी सीमाएं भारतीय सीमाओं का एक भाग हैं. दूसरी तरफ संविधान के भाग 21 के अनुच्छेद 370 में इसे एक विशेष राज्य का दर्जा दिया गया है. आइये अब जानते हैं कुछ और कानूनों के बारे में जो सिर्फ जम्मू और कश्मीर पर ही लागू होते हैं.

कानूनों

1. नहीं लागू हो सकती राष्ट्रपति शासन

जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती. इस कारण यहां पर राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता है.

2. संपत्ति का अधिकार

धारा 370 के तहत भारतीय लोगों को भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार है. लेकिन वो जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं. ये हक सिर्फ वहां के लोगों का है.

3. आपातकालीन प्रावधान

भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में वित्तीय आपातकाल घोषित नहीं कर सकता है. धारा 360 यानी देश में वित्तीय आपातकाल लगाने वाला प्रावधान जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता है.

4. भारतीय दंड संहिता

जम्मू-कश्मीर राज्य में रणबीर दंड संहिता (Ranbir Penal Code) या RPC एक लागू आपराधिक कोड है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत यहां पर भारतीय दंड संहिता लागू नहीं है.

5. जम्मू और कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA)

ये अधिनियम सरकार को दो साल की अवधि के लिए परीक्षण के बिना 16 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को सजा देनी की अनुमति देता है.

6. आतंकवादी और असुरक्षित गतिविधियां अधिनियम (TADA)

PSA की तरह, इस अधिनियम ने भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता को भंग करने और भविष्य में ऐसे कृत्यों को करने के संदेह पर 1 साल तक की अवधि के लिए हिरासत की अनुमति दी है.

7. जम्मू और कश्मीर की सीमाओं में वृद्धि या कमी नहीं हो सकती है:

ये अनुच्छेद 370 के कारण है कि भारतीय संसद राज्य की सीमाओं को बढ़ा या कम नहीं कर सकती है.

8. कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दूओं और सिखों को 16% आरक्षण नहीं मिलता है. ST को जम्मू-कश्मीर में कोई आरक्षण नहीं दिया गया है, हालांकि राज्य में 11.9% ST हैं.

9. धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं है, RTE लागू नहीं है, CAG लागू नहीं होता. भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता है.

10. सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (AFSPA)

सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून (AFSPA) की जरूरत उपद्रवग्रस्त पूर्वोत्तर में सेना को कार्यवाही में मदद के लिए 11 सितंबर 1958 को पारित किया गया था. जब 1989 के आस पास जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद बढ़ने लगा तो 1990 में इसे वहां भी लागू कर दिया गया था.

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