Paralympics History: पैरालंपिक खेलों की शुरुआत कैसे हुई, अब तक भारत का प्रदर्शन कैसा रहा

जब बात पैरालंपिक (Paralympics) खेलों की होती है तो यह खेल बस खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं रहती है. पैरालंपिक खेल (Paralympics Games) हौसलों का खेल है, कुछ कर दिखाने का खेल है, यह खेल खुद से लड़कर जीतने का है. यह खेल उम्मीदों और जज्बातों का है.

पैरालंपिक (Paralympics) खेलों में भाग लेने वाले अधिकतर खिलाड़ी किसी न किसी दुर्घटना के शिकार हुए हैं. किसी ने रोड एक्सीडेंट में अपने पैर खो दिया. तो किसी को बिजली का ऐसा झटका लगा कि पूरा बाजू ही काम करने के लायक नहीं बचा. तो वहीं कोई खिलाड़ी पोलियो का शिकार बने, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने हौसलों को बुलंद करते हुए देश के लिए मेडल लाए.

भारत (India) की पैरालंपिक टीम टोक्यो पैरालंपिक्स (Tokyo Paralympics) में अब तक 1 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल जीत 34वें नंबर पर है. पैरालंपिक गेम्स 25 अगस्त से शुरू हुआ और 5 सितंबर तक चलेगा. इस बार पैरालंपिक गेम्स में भारत के 54 खिलाड़ियों ने 9 खेलों में भाग लिया है.

पैरालंपिक खेलों की शुरुआत कैसे हुई –

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद घायल सैनिकों को मुख्य धारा में जोड़ने के लिए पैरालंपिक खेलों की शुरुआत की गई. विश्वयुद्ध के खत्म होने के बाद साल 1948 में स्टोक मानडेविल अस्पताल में नियोरोलॉजिस्ट सर गुडविंग गुट्टमान ने सैनिकों के रिहेबिलेशन के लिए खेल चुना. तब इसे अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर गेम्स कहा गया.

Paralympics history
Source- Jaun News

साल 1948 में नियोरोलॉजिस्ट गुट्टमान ने दूसरे अस्पताल के मरीजों को भी खेलों में शामिल किया. साल 1952 में इस खेल का फिर से आयोजन किया गया तब ब्रिटिश सैनिकों के अलावा डच सैनिकों ने भी इस खेल में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

साल 1960 में पहली बार रोम में पैरालंपिक खेल का आयोजन कराया गया. पहले पैरालंपिक खेलों में 23 देशों के 400 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. तैराकी को छोड़कर सभी खिलाड़ी व्हीलचेयर के साथ भाग ले सकते थे. ब्रिटेन के मार्गेट माघव पैरालंपिक खेल में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने.

पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रदर्शन –

साल 1972 Heidelberg पैरालंपिक में भारत का पहला गोल्ड मेडल-

साल 1972 में जर्मनी के Heidelberg में आयोजित पैरालंपिक खेलों में भारत ने पहला गोल्ड मेडल जीता. 50 मीटर फ्रीस्टाइल स्वीमिंग में मुरलीकांत पेटकर ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया.

साल 1984 न्यूयॉर्क पैरालंपिक में भारत ने जीते 4 मेडल-

जोगिंदर सिंह बेदी के नाम भारत के लिए सबसे अधिक 3 मेडल जीतने का रिकॉर्ड है. साल 1984 के पैरालंपिक खेल में जोगिंदर सिंह बेदी ने सिल्वर मेडल जीता. इसके अलावा बेदी ने ज्वेलिन थ्रो और चक्का फेंक में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर रिकॉर्ड बनाया. इसके अलावा ज्वेलिन थ्रो में भीमराव केसरकर ने सिल्वर मेडल जीता.

साल 2004 एथेंस पैरालंपिक में भारत ने जीते 2 मेडल-

साल 2004 में एथेंस में आयोजित पैरालंपिक खेलों में देवेंद्र झाझरिया ने जेवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीता. इसके अलावा राजिंदर सिंह बेदी ने 56 किलोग्राम में पॉवरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता.

साल 2012 लंदन पैरालंपिक-

साल 2012 लंदन पैरालंपिक में भारत को केवल एक मेडल मिला. हाई जंपर गिरिशा एन. गौड़ा ने 1.74 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता था.

साल 2016 रियो पैरालंपिक में भारत ने जीते 4 मेडल-

साल 2016 के रियो पैरालंपिक खेलों में भारत ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता. जेवेलिन थ्रो में देवेंद्र झाझरिया और लॉन्ग जंप में मरियप्पन थंगावेलु ने गोल्ड मेडल जीता. इसके अलावा वरुण सिंह ने भी हाई जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. वहीं गोला फेंक में दीपा मलिक ने रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतकर भारत की पहली पैरालंपिक महिला बनी.

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Source- The Quint

पैरालंपिक खिलाड़ियों की ग्रेडिंग कैसे तय होती है

पैरालंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को उनकी शारीरिक स्थिति के आधार पर श्रेणीबद्ध किया जाता है. जैसे- मान लिजिए की शॉटपुट खेल में किसी देश के पांच खिलाड़ियों ने भाग लिया. उनमें से दो खिलाड़ी केवल एक हाथ से विकलांग हैं और तीन खिलाड़ियों के दोनों हाथ नहीं हैं, तो इन खिलाड़ियों को अलग-अलग श्रेणी में रखा जाएगा जिससे कि मुकाबला बराबरी का हो.

खिलाड़ियों के लिए 10 मानदंड

पैरा खिलाड़ियों के 10 मानदंड हैं. मांसपेशियों में दिक्कत, जोड़ो की निष्क्रियता, शरीर के किसी अंग का काम न करना, दोनों टांगो की लंबाई में अंतर, छोटा कद, मांसपेशियों में जकड़न, शरीर की गति में नियंत्रण की कमी, हाथ और पैरों की उंगलियों का सही से काम नहीं करना, साफ तौर पर दिखाई न देना और सीखने की अवरूद्ध क्षमता.

पैरालंपिक्स गेम्स में एफ (F) का मतलब फील्ड से होता है. इसमें शॉटपुट, जेवलिन थ्रो, डिसकस थ्रो जैसे गेम शामिल हैं. इसमें भी विकंलागता के आधार पर 31 श्रेणियों में बाटा गया है. टी(T) का मतलब टैक होता है, जैसे- रेस, हाई जंप आदि. इसमें 19 श्रेणियां होती हैं. श्रेणियों को नंबर के आधार पर बांटा गया है जैसे- एफ-32,33,34,35….आदि. जितना कम नंबर होगा वह उतना ही अधिक विकलांग होगा.

इसके अलावा व्हीलचेयर के खेल भी शामिल हैं जिन्हें WH-1 या WH-2 के नाम से जाना जाता है. जिसमें बास्केटबॉल, रग्बी, टेनिस, फेंसिंग शामिल हैं. इसके अलावा तीरंदाजी, बैंडमिंटन, साइकिलिंग, शूटिंग, नाइक्वांडो. जू़डो भी पैरालंपिक खेलों में शामिल है.

जो खेल खड़े होकर खेला जाता है वह एस (स्टैंडिंग) से शुरू होते हैं. अगर एस(S) के आगे एल (L) लिखा है तो इसका मतलब शरीर के नीचे के हिस्से में दिक्कत है और यदि एस (S) के आगे यू (U) लगा हो तो इसका मतलब है कि खिलाड़ी के शरीर के ऊपरी हिस्से में दिक्कत है.

पैरा खिलाड़ियों का चयन कैसे होता है

पैरा गेम्स में सामान्य खेलों की तरह एक न्यूनतम योग्यता मानदंड (एमईसी) होता है. यह मानक इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी (आईपीसी) तय करती है, लेकिन जरूरी नहीं कि खिलाड़ी ने लक्ष्य हासिल कर लिया तो उसे क्वालीफाई माना जाएगा. आईपीसी हर देश को एक निश्चित कोटा देता है. हर देश कोटा के तहत क्वालीफाई खिलाड़ियों के बीच फाइनल सेलेक्शन ट्रायल करवाता है. हालांकि इसके अलावा विश्व रैंकिंग के आधार पर भी खिलाड़ियों का चयन किया जाता है.

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