Tokyo Paralympic : गोल्ड जीतने वाली अवनि लेखारा 11 वर्ष की उम्र में हो गईं थी पैरालाइज्ड, एक किताब ने बदली जिंदगी

भारतीय शूटर अवनि लेखारा ने टोक्यो पैरालंपिक में भारत के लिए पहला गोल्ड जीत लिया है. अवनि ने महिला शूटिंग की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 प्रतिस्पर्धा में चीन की खिलाड़ी शी झांग को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही अवनि ने 249.6 अंक स्कोर करके पैरालंपिक में अब तक के वर्ल्ड रिकाॅर्ड की भी बराबरी की.

गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी

अवनि पैरालंपिक में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं. लेकिन अभी उनका सफर टोक्यो पैरालंपिक में अभी खत्म नहीं हुआ है. वे अभी शूटिंग की तीन और प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने वाली हैं. 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग SH1 कैटेगरी में अवनी वर्तमान में पांचवें पायदान पर हैं. वो अभी टोक्यो ओलंपिक में महिला R8 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन SH1, मिक्स्ड R3 10 मीटर एयर राइफल प्रोन SH1 और मिक्स्ड R6 50 मीटर राइफल प्रोन SH1 कैटेगरी में हिस्सा लेंगी. 

11 साल की उम्र में हो गईं थी पैरालाइज

अवनि का जन्म 8 नवंबर 2001 को राजस्थान के जयपुर में हुआ था. मात्र 11 साल की उम्र में ही उनके साथ एक जानलेवा कार हादसा हो गया था. इस जानलेवा हादसे में अवनी पैरालाइज्ड हो गई थी, जिसके बाद से उनकी जिंदगी एक व्हीलचेयर तक सीमित हो गई. इस हादसे में आए चोट की वजह से उन्हें आज भी दिक्कतें आती हैं.

दरअसल, साल 2012 में अवनी अपने पिता प्रवीण लेखरा के साथ जयपुर से धौलपुर जा रहीं थीं, तभी वे दोनों एक हादसे का शिकार हो गए. इस दुर्घटना में उनके पिता को ज्यादा चोट नहीं आई लेकिन अवनी की रीढ़ की हड्डी टूट गई और जिंदगी भर के लिए चलने में असमर्थ हो गईं.

हादसे के बाद किया ट्राॅमा का सामना

इस हादसे के बाद अवनी मानसिक रुप से बहुत टूट गईं थी. हादसे के बाद किसी स्कूल में भी उनका एडमिशन नहीं हो सका. दो साल तक अवनि ने घर से स्कूल की पढ़ाई की. हादसे के बाद अवनि दिमागी रूप से काफी परेशान रहती थीं. वो एक मेंटल ट्राॅमा से गुजर रहीं थीं.

एक किताब ने बदली जिंदगी

तभी एक दिन अवनि ने अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा ‘A Shot At History’ पढ़ी. इस किताब ने उनकी जिंदगी बदल दी. अभिनव बिंद्रा की जीवनी पढ़ने के उन्हें काफी प्रेरणा मिली और उन्होंने एक बार फिर से अपने लिए सपने देखने शुरु कर दिए. पहले उन्होंने आर्चरी यानी तीरंदाजी में जाने का प्रयास किया लेकिन रुचि न होने की वजह से उसे छोड़ दिया. एक बार स्कूल की गर्मियों की छुट्टियों के दौरान वे अपने पिता के साथ एक शूटिंग रेंज में गईं और यहीं से अवनी ने फैसला किया कि शूटिंग में अपना करियर बनाएंगी.

जज बनना चाहती थीं अवनि

बता दें कि अवनी अभी बी.ए. एलएलबी की पढ़ाई भी कर रहीं हैं. अवनि अपने जीवन या तो जज बनना चाहती था या आगे चलकर भारत के लिए गोल्ड जीतना चाहती थी. उनके इस सपने में उनके माता-पिता और उनके कोच ने भरपूर साथ दिया.

नेशनल चैंपियनशिप में पांच गोल्ड

अवनि ने 2015 में जयपुर के जगतपुरा स्पोर्ट्स कंप्लेक्स से अपने शूटिंग करियर की शुरुआत की. उन्होंने अपने पहले ही नेशनल चैंपियशिप में ब्राॅन्ज मेडल जीता. 2017 में उन्होंने पहली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय इवंट में हिस्सा लिया. उन्होंने 2017 के IPC पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीता. दो साल बाद उन्होंने 2019 में क्रोएशिया में हुए पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में फिर से सिल्वर मेडल अपने नाम किया था.

इसी जीत के साथ उन्होंने टोक्यो पैरालंपिकन के लिए भी क्वालिफाई किया थी. अवनी ने इसी साल महिलाओं की R2 मीटर एयर राइफल SH1 कैटेगरी में नेशनल पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था. अवनी नेशनल चैंपियनशिप में पांच बार गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

देश दुनिया के मुद्दों से जुडे़ विश्लेषण पढ़ने के लिए हमें Google News पर फॉलो करें

Avani Lekhara : टोक्यो पैरालंपिक्स में गोल्ड जीतने वाली अवनि लेखारा कौन हैं