पैरालंपिक के इतिहास में भारत का अब तक का प्रदर्शन कैसा रहा

भारत टोक्यो पैरालंपिक (Tokyo Olympics) में शानदार प्रदर्शन दिखाते हुए 2 गोल्ड मेडल समेत अब तक कुल 8 मेडल जीत चुका है. पैरालंपिक (Paralympics) के इतिहास में भारत (India) ने अब तक 20 पदक जीते हैं जिसमें 6 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है. पैरालंपिक खेलों (Paralympics Games) की शुरूआत साल 1960 में हुई थी.

भारत का अब तक पैरालंपिक खेलों में प्रदर्शन-

साल 1972 में पैरालंपिक खेलों में भारत को मिला पहला मेडल-

मुरलीकांत पेटकर ने साल 1965 के भारत-पाक युद्ध में अपना योगदान दिया था. मुरलीकांत ने साल 1972 में जर्मनी के हीडलबर्ग में आयोजित पैरालंपिक खेलों में पुरुषों की 50 मीटर फ्रीस्टाइल 3 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था. इस भारतीय पैरा तैराक ने 37.33 सेकेंड के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया था.

मुरलीकांत भारतीय सेना में कोर ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स में जवान थे. इसके साथ ही वे एक बॉक्सर भी थे. बाद में बुलेट इंजरी के कारण उन्हें अपना एक हाथ खोना पड़ा. मुरलीकांत को साल 2018 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

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न्यूयॉर्क पैरालंपिक साल 1984-

साल 1984 के पैरालंपिक खेलों को ब्रिटेन और यूएसए ने सह-मेजबानी की थी. इस पैरालंपिक में भारत को 4 मेडल मिले. भीमाराव केसरकर ने पुरुष जेवलिन थ्रो एल6 में 34.55 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता. इसके अलावा भारतीय एथलीट पुरुष वर्ग के 100 मीटर फ्रीस्टाइल एल6 में भी हिस्सा लिया लेकिन शुरुआती राउंड से आगे नहीं बढ़ पाए.

जोगिंदर सिंह बेदी ने जीते 3 मेडल-

न्यूयॉर्क पैरालंपिक में भारत की तरफ से बेहतरीन प्रदर्शन दिखाते जोगिंदर सिंह बेदी ने तीन मेडल अपने नाम किए. उन्होंने पुरुषों के शॉटपुट एल6 में सिल्वर मेडल जीता. उन्होंने 10.08 मीटर दूर गोला फेंका था.

जोगिंदर सिंह बेदी ने दूसरा मेडल जेवलिन थ्रो एल6 में जीता. बेदी ने 34.18 मीटर का थ्रो करके ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इसी मुकाबले में भारत के भीमराव केसरकर ने सिल्वर मेडल जीता था.

जोगिंदर सिंह बेदी ने अपना तीसरा मेडल मेंस डिस्कस थ्रो एल6 में 28.16 मीटर का थ्रो करके ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया.

एंथेस पैरालंपिक साल 2004-

भारत ने साल 1984 से लेकर साल 2004 तक पैरालंपिक खेलों में भारत को मेडल के लिए इंतजार करना पड़ा. भारत के इस इंतजार को देवेंद्र झाझरिया जेवेलिन थ्रो एफ44/46 इवेंट में गोल्ड पदक जीतकर खत्म किया. देवेंद्र ने 62.15 मीटर की दूर भाला फेंका जो उस समय वर्ल्ड रिकॉर्ड था. देवेंद्र झाझरिया को साल 2012 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया.

राजिंदर सिंह रहेलू ने एंथेस 2004 के पैरालंपिक में पुरुषों के 56 किलोग्राम वर्ग में 157.5 किलोग्राम का भार उठा के ब्रॉन्ज मेडल जीता. साल 2008 के बींजिग पैरालंपिक खेलों में राजिंदर ने फिर कोशिश की लेकिन वे पांचवे स्थान पर रहे. राजिंदर सिंह को साल 2005 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

लंदन पैरालंपिक साल 2012-

लंदन पैरालंपिक में भारत को केवल एक मेडल मिला. गिरिश एन गोड़ा ने मेंन हाई जम्प एफ42 में सिल्वर मेडल जीता था. काउंटबैक में गिरिश गोल्ड से चूक गए थे. साल 2013 में गिरिश को पद्मश्री और साल 2014 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

रियो पैरालंपिक साल 2016-

तमिलनाडु के रहने वाले मरियप्पन थंगावेलु ने रियो पैरालंपिक में पुरुषों के हाई जंप एफ42 इंवेट में गोल्ड मेडल हासिल किया. उन्होंने 1.89 मीटर की छलांग लगाई थी. बाद में मरियप्पन को पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वहीं साल 2020 में उन्हें भारत के सर्वोत्तम खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित किया गया.

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रियो पैरालंपिक में भारत ने दूसरा मेडल हाई जंप में ही जीता. वरुण सिंह भाटी ने पुरुष वर्ग के हाई जंप एफ42 में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम करते हुए पोडियम पर मरियप्पन थंगावेलु के साथ शामिल हुए. उन्होंने ब्रॉन्ज के लिए 1.86 मीटर की छलांग लगाई. वरुण को साल 2018 में अर्जुन पुरुस्कार से सम्मानित किया गया.

देवेंद्र झाझरिया ने भारत को रियो पैरालंपिक में गोल्ड मेडल दिलाया. पैरालंपिक में यह उनका दूसरा गोल्ड मेडल था. देवेंद्र झाझरिया ने 63.97 मीटर का थ्रो करके रिकॉर्ड बनाया. देवेंद्र झाझरिया ने आठ साल की उम्र में एक बिजली के तार के संपर्क में आने के बादअपना बायां हाथ खो दिया था. साल 2017 में देवेंद्र को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न से सम्मानित किया गया.

दीपा मलिक पैरालंपिक खेलों में पदक लाने वाली पहली महिला हैं. साल 2016 के रियो पैरालंपिक में दीपा ने महिलाओं के शॉट पुट एफ53 इवेंट में 4.61 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता था.

दीपा मलिक को साल 2012 में अर्जुन पुरुस्कार, साल 2017 में पद्मश्री और साल 2019 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वर्तमान में दीपा मलिक भारत की पैरालंपिक कमेटी की अध्यक्ष हैं.

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