भारतीय सेना को मिला घातक MMHG हैंड ग्रेनेड, 100 साल से अधिक पुराने HE 36M ग्रेनेड की जगह लेगा

भारत में निर्मित मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड (MMHG) का पहला बैच भारतीय सेना को दे दिया गया है. भारतीय सेना ने 400 करोड़ के हुए डील में कुल 10 लाख हैंड ग्रेनेड्स का ऑर्डर दिया था. पहले बैच में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने भारतीय सेना को 40,000 ग्रेनेड्स सौंपे हैं. ये ग्रेनेड पहले विश्व युद्ध से इस्तेमाल हो रहे ब्रिटिश जमाने के पुराने डिजाइन के ग्रेनेड नंबर 36 की जगह लेंगे. ये MMHG ग्रेनेड्स घातक होने के साथ-साथ इस्तेमाल करने में ज्यादा सुरक्षित भी है.

DRDO ने 15 साल में तैयार किया

इन मल्टी मोड हैंड ग्रेनेड्स को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय प्राइवेट फर्म इकोनोमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) द्वारा बनाया गया है. इन ग्रेनेड्स को DRDO ने तैयार किया था. अधिकारियों के अनुसार, इस ग्रेनेड पर पिछले 15 वर्षों से काम चल रहा था. इसे तैयार करने में DRDO और OFB का बहुत अहम योगदान रहा है.

प्राइवेट कंपनी इकोनोमिक एक्सप्लोसिव लिमिटेड(EEL) ने उत्पादन किया

बाद में ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलाॅजी की मदद से EEL ने भारतीय सेना के लिए इन ग्रेनेड्स का उत्पादन किया. पिछले साल भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के लिए 10 लाख आधुनिक ग्रेनेड्स के उत्पादन के लिए EEL ने रक्षा मंत्रालय के साथ एक काॅन्ट्रैक्ट किया था.

MMHG Hand Grenades Photo Source : Solargroup

HE 36M हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करती है भारतीय सेना

वर्तमान में भारतीय सेना भारत की सरकारी कंपनी ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) द्वारा निर्मित HE 36M हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करती है. HE 36M हैंड ग्रेनेड को मूल रुप से द्वितीय विश्व युद्ध को दौरान तैयार किया था. ये ग्रेनेड विलियम मिल्स द्वारा बनाई गई ब्रिटिश हैंड ग्रेनेड्स का सीरीज है.

प्रथम विश्व युद्ध में किया गया था तैयार

1915 में ‘मिल्स बाॅम्ब’ ने पहली बार इन ग्रेनेड्स का उत्पादन किया था. इन ग्रेनेड्स को राइफल से भी फायर किया जा सकता है. 36M ग्रेनेड पूरी तरह से सेना का विश्वास जीतने में नाकाम रहे हैं, क्योंकि कई बार ये असमय फट जाता है, इसलिए यह फेंकने वाले के लिए खतरा बन जाता है.  

MMHG ग्रेनेड कई मामलों में बेहतर, दो मोड पर करता है काम

MMHG ग्रेनेड 36M की तुलना में कई मामलों में बेहतर है. ये ग्रेनेड पुराने ग्रेनेड की तुलना में सैनिकों के लिए ज्यादा सुरक्षित है. इसके अलावा घुसपैठ हमले के मामले में भी इसके कई फायदे हैं. MMHG ग्रेनेड ओफेंसिव और डिफेंसिव जैसे दो मोड पर काम करता है. भारतीय सेना अब तक डिफेंसिव मोड के ग्रेनेड का ही ज्यादातर इस्तेमाल करती आ रही है. 

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दो मोड में कैसे काम करता है MMHG ग्रेनेड

ओफेंसिव हमलों में ग्रेनेड में फ्रैगमेंट स्लीव नहीं होता है और इसका उपयोग कम तीव्रता वाले हमलों के लिए किया जाता है. इस मोड का उपयोग पांच मीटर के दायरे में हमला करने के लिए किया जाता है.

डिफेंसिव मोड में ग्रेनेड को फ्रैगमेंटेड स्लीव के साथ तैयार किया जाता है. जब कोई सैनिक कहीं छुपा हुआ होता है और दुश्मन खुले में होता है तब इस मोड के ग्रेनेड का इस्तेमाल किया जाता है. इसे 10 मीटर तक के दायरे में इस्तेमाल किया जा सकता है.

अधिक शेल्फ लाइफ, पहले से अधिक घातक

EEL की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार सामान्य स्टोरेज की स्थिति में MMHG ग्रेनेड की शेल्फ लाइफ 15 वर्ष है यानी इन्हें लंबे समय तक के लिए स्टोर करके रखा जा सकता है. वेबसाइट में यह भी कहा गया है कि उत्पाद में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए दो डिले ट्यूब दिए गए हैं. वहीं इसे ज्यादा घातक बनाने के लिए 3800 समान फ्रैगमेंट का इस्तेमाल किया गया है.

दूसरे देश भी दिखा रहें हैं दिलचस्पी

इस ग्रेनेड की अटैक क्षमता और सुरक्षा दृष्टि से मजबूत देखते हुए कुछ देशों ने खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. इंडोनेशिया ने तो पहले ही इस ग्रेनेड का ऑर्डर EEL को दे दिया है. 

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