Missile Tracking Ship Dhruv: समुद्र से दुश्मनों पर नजर रखेगा ध्रुव, भारत की पहली मिसाइल ट्रैकिंग शिप

भारत (India) अपनी समुद्री ताकत बढ़ाने जा रहा है. 10 सितंबर को भारत (India) अपना पहली बैलेस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग शिप ध्रुव (Dhruv) लॉन्च करेगा. न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल को ट्रैक करने वाला यह भारत का पहला ट्रैकिंग शिप होगा. 10 सितंबर को आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) इसे लॉन्च करेंगे.

ध्रुव (Dhruv) ट्रैकिंग शिप को विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) और नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) के साथ मिलकर बनाया है. इस शिप को बनाने का काम जून साल 2014 से चल रहा था. साल 2018 में यह बन कर पूरी तरह तैयार हो गया और साल 2019 में इसका ट्रायल शुरू किया गया. इसे शिप को VC-11184 के नाम से भी जाना जाता है.

Dhruv
Source- DefenceXP

मिसाइल ट्रैकिंग शिप क्या होती है

मिसाइल ट्रैकिंग शिप, रडार और ऐंटिना की मदद से किसी भी मिसाइल को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं. ट्रैकिंग शिप की शुरुआत अमेरिका ने की थी. अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रयोग हुए जहाजों को ट्रैकिंग शिप के रूप में प्रयोग करने लगा. उसके बाद अमेरिका ने तकरीबन 25 ट्रैकिंग शिप बनाए.

ध्रुव शिप में क्या खास है

ध्रुव शिप की चौड़ाई 22 मीटर और लंबाई 175 मीटर है. 300 क्रू क्षमता वाला यह शिप 39 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगा. इसे बनाने में 725 करोड़ रुपये खर्च हुआ है.

यह शिप Active electronically scanned array (AESA) रडार से लैस है. यह रडार दुश्मनों की सैटेलाइट्स का पता लगाता है. इस तकनीक की मदद से मिसाइल की क्षमता और रेंज का भी पता लगाया जा सकता है. इसके अलावा ध्रुव परमाणु मिसाइल के साथ बैलेस्टिक मिसाइल और लैंड बेस्ड सैटेलाइट्स का भी पता लगा सकता है. यह 2 हजार किलोमीटर तक और 360 डिग्री पर दुश्मनों पर नजर रख सकता है.

ध्रुव शिप कमांड. कंट्रोल, कम्यूनिकेशन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट ऐंटिना तकनीक पर काम करता है. यह दूसरे जहाजों से निकलने वाले इलेट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन से उसकी लोकेशन को ट्रैक कर सकता है.

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Source- TV9

ध्रुव कैसे करेगा काम

अभी तक मिसाइल ट्रैकिंग शिप, एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज के भीतर होने पर ही ट्रैक कर पाती थी जब तक एयर डिफेंस सिस्टम मिसाइल को ट्रैक करती थी तब तक मिसाइल अपने टारगेट के पास पहुंच जाती थी.

अब ध्रुव शिप, रेंज में आने वाली सभी मिसाइलों को ट्रैक करके उसकी जानकारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेज देगा. यानी एयर डिफेंस सिस्टम की रेंज में आने से पहले ही मिसाइल की जानकारी मिल जाएगी और समय रहते उसे डिफ्यूज किया जा सकेगा.

अब तक सिर्फ 4 देशों के पास थी यह तकनीक

भारत अब दुनिया का 5वां देश बन जाएगा, जिसके पास मिसाइल ट्रैकिंग शिप है. अभी तक सिर्फ अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन के पास यह तकनीक थी.